Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Mar 19, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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🍂 लम्हें।

अपने दिल में छुपा कर रखता हूं बहुत से मैं एहसास, के आज भी ये दिल मेरा एक धड़कती धड़कन को रोता है।

गर ज़िन्दगी जो जीना एक ज़ुल्म है तो ये सांसे क्यों हर लम्हा जिंदा ज़िन्दगी को धड़का कर जाती है।।

खो गया हूं पा कर के कुछ तो खुद सा खुद के जैसा खुद में ही कहि जो।

तन्हा यादें, सूखे अश्क़, पथराई सी रुकी सांसे, ख़ामोश अल्फाज़ो से बोलते एहसास साथ खुद में कही जो।।

धक धक धक एक ख़ामोशी सी है जो शोर हर ओर, धक धक धक धड़कनों को सुनता हूं, ख़ामोश धक धक धक से अपनी हर रोज।

बुलाते है गुज़रते हर लम्हो से बिछुड़े यारो को हम, आज भी हर धक धक धक उतना ही शोर मचाती है याद उनको करते हुए हर लम्हा ही हर रोज़।।

इस पर, उस पर क्या, अपनो पर क्या, खुद पर भी खुद का एतबार बचा ना सका तो खुद से ही खुद को एक नफ़रत सी होने लगी है अब।

ग़ुनाह कर के गुन्हेगार हो चुके है जो, आज भी यक़ीन है उन्हें हमारे गुन्हेगार होने पर, कर न सके ज़ुल्म जब गुनहगारों का हम साबित तो खुद से खुद को एक नफरत सी होने लगी है अब।।

हर साए से डर सा जाता हूं मैं आजकल, हर साए से ख़ुद के खो जाने का एक एहसास सा हो जाता है जो।

नही मालूम हक़ीक़त है क्या हक़ीक़तों की बेदर्द इस ज़माने में, फ़क़त जान जाते है हक़ीक़त उनकी हम अक्सर, हर हक़ीक़त से ख़ुद ही खुद की ख़ुद से नज़रअंदाज़ है जो।।

नाउम्मीदी एक ज़हर है हर लम्हा घुटती ज़िन्दगी, हर घुटन से एक ज़हर रग रग में दौड़ जाता है जो।

हर कसूर की सज़ा बेगुनाह पाते हुए, हर गुनाहों से सितमगरो के खुद को खुद का गुन्हेगार बनाते गए है जो।।

हर ख़्वाब कोई फ़साना हसीं, एक सकूँ सा सांसो में छोड़ जाता है जो।

वक़्त अब भी बेदर्दी बेदर्द सा चलता जा रहा है जो, हर गुज़रते लम्हे से कहि कोई छूटता सा जा रहा है जो।।

हर एहसास से हकीकत के अक्स हक़ीक़त का कायम एक बेबर्द सा आईना, अक्स हक़ीक़त के हर एहसासों से डर से जाता हूं मैं।

जिंदगी खामोशी से ख़ामोश हो जाना चाहती है अक्सर, हर एहसास से ख़ामोश जिंदगी के तड़प जाता हूं मैं।।

🌠 रुकी ज़िंदगी से रुक गए एहसास, तड़प सांसो से कायम मेरे रुके हर एहसास, हर एहसासों से रुके रुके रुक सा गया हूं मैं।

महोबत एक सितम सांसों का सांसो पर रुकती, हर रुकती सांस से रुकती जिंदगी, हर गुज़रते लम्हे से गुजर जाता हूं मैं, हर गुज़रते लम्हे से गुज़र जाता हूं मैं… हा हर गुज़रते हर लम्हे से गुज़र जाता हूं मैं।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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नमस्कार मित्रों, जल्द ही मैं आपका अपना रचनाकार एव कवि-शायर मित्र विक्रांत राजलीवाल अपनी आजतक की सबसे बहेत्रिन नज़्म दस्ताने। या इसे आप कुछ इस तरह से भी कह सकते है कि मेरे साधारण से जीवन की मेरी आजतक की नज़्म शायरियों में से यह दस्ताने मैने सबसे पहले लिखी थी। अन्य नज़्म शायरी मेने […]

via 🌹 दास्तां। (दर्दभरी महोबत की अति विस्तृत दस्ताने) — Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation’s -स्वतंत्र लेखक-

Mar 17, 2019

अब वो महफिले ना रही, अब वो हुनरबन्ध क़लमकार भी कहा दिखते है जमाने में। सुनते थे कभी जो बुज़ुर्गो से अपने कि लहू बहता था उन महफ़िलो में शायरी से शायरों के।। वो दौर, वो दस्तूर, वो ज़माना, जरूर रहे होंगे, बहता लहू भी जम जाता होगा हुस्न ओ इश्क़ के बाजारों में, वर्ना […]

via 💏 महोबतें — Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation’s -स्वतंत्र लेखक-

Mar 16, 2019

Mar 16, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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💏 महोबतें

अब वो महफिले ना रही, अब वो हुनरबन्ध क़लमकार भी कहा दिखते है जमाने में।

सुनते थे कभी जो बुज़ुर्गो से अपने कि लहू बहता था उन महफ़िलो में शायरी से शायरों के।।

वो दौर, वो दस्तूर, वो ज़माना, जरूर रहे होंगे, बहता लहू भी जम जाता होगा हुस्न ओ इश्क़ के बाजारों में, वर्ना ये रोग ए महोबत, आज से तो नही।

हर अल्फ़ाज़ एक ज़हर महोबत का सरेराह कभी चढ़ाते तो कभी उतारते है रग रग में आज भी ये हुस्न वाले, जहर महोबत का आज भी उतना ही ज़हरीला है।।

हम कहते है कि हमें भी रखते है शौक क़त्ल का, हुस्न ओ इश्क के बाजार में, हथियार हमारे भी बहुत तेज़ है।

महोबत करते है तो यकीं रखें, कर देंगे कायल हम आपको भी अपना बहुत ही प्यार से, ज़हर महोबत का हमारा भी तेज है।।

बदलते मौसमों से बदल ना जाना, महोबत कर के हमसे सनम कभी दूर ना जाना, फ़क़त बदल जाए चाहे मिज़ाज़ ए इश्क ये महोबत का आपका ज़माना।

तीर नज़रो से चलाते हुए, आप दिल मे हमारे सीधे ही उतर जाना, हर वार से हुस्न के अपने आप हमारा क़त्ल बेबर्दी से करते जाना, बागी हो जाए चाहे ये सारा ज़माना।।

इश्क जानता है दग़ा, फरेब, बेवफ़ाई एक फ़ितरत है आपकी, हुस्न से फिर भी आपके इश्क़ जो वफ़ा चाहता है।

तड़पता दिल, टूटी धड़कने, हर बेवफ़ाई से रुकती सांसे, हो गए बर्बाद महोबत से दीवाना जिनकी, उनसे ही वफ़ा फिर भी निभाए जाता है।।

हमे है एक इंतज़ार आज भी किसी के एक इक़रार का, गुम है जो रूह में मेरी, मेरी महोबत और अपनी हर एक बेवफ़ाई के साथ।

करते है महोबत वो भी बेहिंतिया मगर ज़हर सांसो से लिपट कर पहेलु में हमसे नफ़रत और महोबत किसी गैर के साथ, और महोबत किसी गैर के साथ…हा महोबत किसी गैर के साथ।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
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महोबत से कायल है महबूब की वो अपने, लम्हा लम्हा मर्ज़ ए महोबत से घायल है महबूब की वो अपने। देखता है सूरत ए यार बेहद नज़दीक से वो अपने, करता है प्यार महबूब को बेहद नज़दीक से वो अपने।। हुस्न के वार से इश्क़ तड़प जाता है बेहिंतिया, उठ उठ कर सर्द रातो में […]

via 🌹अश्क़। — Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation’s -स्वतंत्र लेखक-

Mar 16, 2019

Mar 16, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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🌹अश्क़।

महोबत से कायल है महबूब की वो अपने, लम्हा लम्हा मर्ज़ ए महोबत से घायल है महबूब की वो अपने।

देखता है सूरत ए यार बेहद नज़दीक से वो अपने, करता है प्यार महबूब को बेहद नज़दीक से वो अपने।।

हुस्न के वार से इश्क़ तड़प जाता है बेहिंतिया, उठ उठ कर सर्द रातो में जख्मों को कुरेद देता है वो अपने बेहिंतिया।

उसकी मदहोश आँखें उसके दर्दो को बयाँ करती है हर दर्द से उसके उसका दीवाना तड़प जाता है आज भी बेहिंतिया।।

चिर के दिल ख़ंजर से ज़हरीले अपना, फैला दिया ज़हर रग रग में नाम ए महोबत बेवफाई का उसके जो आज भी बहुत ज़हरीला।

पहुचाता है सकूँ जख्मों को मेरे, हर एक ज़ख्म नया, कर देता है जिंदा ज़हर झूठी महोबत का उसकी जो आज भी बहुत ज़हरीला।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

16/03/2019 at 6:15 pm

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Mar 16, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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💏 Lover’s

Garden singing songs, flowers show dancing.

Every lover in the moonlight in the night wants to meet each other ..

Every sad heart from fragrance of love is also becomes jumpeed

Every lover loves fulfillment with love, and gets satisfied by doing love.

Through the heart of the heart, through the holy feelings, the heart, with the sense of the feeling, the two together become one united.

Moments of sad sadness, full of pain & suffering, find themselves in the embrace of their lover, when they want to lose in each other’s shadow.

The garden sings song, flowers show dancing.

Every lover in the moonlight in the night wants to meet each other ..

Hugged flame, with a love full of love.

Confluence Spirit Spirit, Confluence Supernatural It is filled with Divinity ..

Tander age, young body, fun, they are filled with hoyden

The juice is filled with love, on the other side, for the sake of love, the love of the thirsty love is distraught ..

Smiling moments of thirst for heart,
Look at the eyes from every emotion, heart, when the lovers speak silently to each other

The feeling of touching love is the supernatural, touching heart of every love, by touching one’s touch, the two become one.

The flowers sing the song, the flowers show dance.

Every lover in the moonlight in the night wants to meet one another ..

Written by Vikrant Rajliwal

16/03/2019 at 3:25FB_IMG_1539495833444 pm

(This is the English translation of my new Hindi language,💏 प्रेमी।, if there is any error, please forgive me.)