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🌹 बेगुनाह मोहब्ब्त। (दर्द ए मोहब्ब्त की एक दिलकश दास्ताँ) Republished with Facebook Live Video!

वक़्त की चादर पर जो अब एक गुनाह हो गया।

समझा सनम को जो बेवफ़ा तो एक गुनाह हो गया।।

दिल को उस के मासूम को एक इल्ज़ाम जो हमनें दे दिया।

खुद ही मार कर दिल पर फिर ख़ंजर ख़ूनी जो दिल रो दिया।।

जिस्म से बूढ़ा अब अपने जो हो गया हूं।

झुर्रियों में अपनी अब कहि जो खो गया हूं।।

जान ना बच पाई अब कोई जो मुझ में।

तबियत भी कुछ बदहवास सी है अब जो मुझ में।।

छूटने को है बस अब जो मेरी जान।

पल भर का ही हु शायद अब जो मैं मेहमान।।

देख कर ये हाल अपना तड़प के रो दिया, अब भी जख़्मी दिल मेरा।।

चेहरे की झुर्रियों से मेरी दिलबर की वफ़ा झलकती है।

नोच डालो तुम इन्हें, इनसे बेवफ़ाई मेरी अब झलकती है।।

गुजरते है दिन मेरे मौत के सन्नाटे में।

डर जाता है दिल मेरा इन सुनी अंधेरी रातो में।।

देख कर ये हाल अपना तड़प के रो दिया, अब भी जख़्मी दिल मेरा।।

सिहर (काप) जाता हूं देख कर महबूब ए मोहब्ब्त का वो आईना।

दिखती नही उस में वफ़ा, बतलाता है मुझ को वो आईना।।

टूटी खटिया पे तन्हा पड़ा, अब किसे मैं ढूंढ रहा।

देख कर ये हाल अपना तड़प के रो दिया, अब भी जख़्मी दिल मेरा।।

तन्हा अंधेरी इन रातो में टूट कर बिजली सी मुझ पर कोई चोंध जब जाति है।

बन के साया एक मौत का कोई, अक्स अपना मुझे जब दिखा जाती है।।

कड़क के टूटी खटिया ये मेरी जैसे कर्राह जाती है और भी टूट जो जाती है।

लेते हुए नाम ए सनम एक याद आह दिल से निकल जाती है उसको शायद जो बुलाती है।।

याद सनम को करते हुए धड़कने जो जख़्मी दिल की रुक जाती है उसको शायद जो बुलाती है।।।

देख कर ये हाल अपना तड़प के रो दिया, अब भी जख़्मी दिल मेरा।।।

टूटी खटिया ये वीरान कोठरी तन्हा पड़ा है कब से दीवाना सनम का जो यहाँ।

कर गई बेवफ़ाई मौत भी जो ढूंढ ना पाई मुझे वहा, कब से दीवाना तन्हा पड़ा सनम का जो यहाँ।।

वफ़ा ए महबूब जो वफ़ा सनम की एक इल्ज़ाम उस पर कोई बेहूदा दीवाना हो गया।

दुपट्टे पे रेशमी जो मख़मली उसका, दाग दीवाना बेहूदा सा उस पर हो गया।।

समझा जो बेवफ़ा सनम को अपने, ए वक़्त तो ये दीवाना खुद ही बेवफ़ा हो गया।

देख कर ये हाल अपना तड़प के रो दिया, अब भी जख़्मी दिल मेरा।।

वो तो हर पल घुटती रही।

तन्हा जीती और मरती रही।।

हाल ये उसका जो जान ना पाया।

बेबसी ये उसकी जो अपना उसे मान ना पाया।।

सितम जो रूह पर मासूम, वार बेदर्दी से कर दिया।

खुद ही दिल हाथो से अपना, जो चिर कर रख दिया।।

दे कर वफ़ा को इल्ज़ाम बेवफ़ाई का उसकी, गुन्हेगार ये दीवाना जो उसका अब हो गया।

देख कर ये हाल अपना तड़प कर रो दिया, अब भी जख़्मी दिल मेरा।।

जान हक़ीक़त ए सनम दीवाना जो उसे जान गया।

मासूम धड़कने वो मासूम दिल दीवाना जो उसे पहचान गया।।

ना कोई चाल ना ही कोई इल्ज़ाम उस पर अब रहा ना बाकी।

टूट गए आईने सब फ़रेबी कोई इलज़ाम कोई फ़रेब अब रहा ना बाकी।।

मज़बूरियों ने इस ज़माने की जो बेदर्द, एक दिवाने को सनम से जुदा जो कर दिया।

सितम ए दिल दिल को दिवाने के सरेराह, बेबसी ने उसकी चकनाचूर जो कर दिया।।

ढूंढता है दीवाना अब भी उसे वक़्त की किताब में।

महफूज़ है यादें अब भी उसकी जो वक़्त की किताब में।।

हो कर जुदा दीवाना अपने सनम से मिल ना पाया फिर उसे।

ढूंढता है निसान ए क़दम सनम के हर तरफ पुकारता है अब भी उसे।।

देख कर ये हाल अपना तड़प के रो दिया अब भी जख़्मी दिल मेरा।।

दिन वो अब भी जवानी के अपने याद आते है।

महबूब की अपने हर सौगात साथ अपने लाते है।।

धड़कनों में एक आख़री मेरे अब भी एक तम्मना है।

हर धड़कन टूटने से पहले अपनी आखरी एक दीदार सनम का अब भी चाहते है।।

याद है वो मदहोश निगाहें उनका वो क़ातिल हुस्न, जवानी के अब भी वो दिन।

बन के मोहब्ब्त फड़कती रगों में दौड़ता लहू, सनम से अपने दीवानगी के वो दिन।।

वो वक़्त वो समा वो मिज़ाज ए मौसम बेहद अज़ीब था।

वो आलम मदहोशी का हर तरफ वो गुल वो गुलिस्तां वो महकता ग़ुलाब ए मोहब्ब्त बेहद अज़ीब था।।

करता था मोहब्ब्त एक हुस्न से जो एक दीवाना, वो दस्तूर ए मोहब्ब्त वो ज़ालिम ज़माना बेहद अज़ीब था।।।

एक इंतज़ार था हर लम्हा एक हसीन का, कर दे मदहोश जो दिवाने को।

कर दे जख़्मी दिल चिर के क़ातिल निग़ाहों से अपने जो निहार कर दिवाने को।।

अंगड़ाई लेता महकता वो सनम अब भी है याद दिवाने को।

बदलती निगाहें वो लहू बरसाता आसमां अब भी है याद दिवाने को।।

देख कर ये हाल अपना तड़प के रो दिया, अब भी जख़्मी दिल मेरा।।

याद है वक़्त वो जब…

एक रोज़ इत्तफाक एक अज़ीब सा हो गया।

टकरा गए जो एक हुस्न से तो वार धड़कते दिल पर हो गया।।

नही नादां ये इश्क़ ये दीवाना तंग एक गली से एक रोज़ जो गुजर गया।

सामना वो मदहोश हुस्न से वार शराबी निग़ाहों का दिल पर अपने जो हो गया।।

नही मिलता है फिर चैन की लूट गया ये दीवाना, एक हसीना से सरेराह टकरा जाने के बाद।

नज़र आता है फिर हर तरफ चेहरा वो उनका हसीन, क़ातिल से सरेराह अपने टकरा जाने के बाद।।

कहते है अनहोनी ज़माने में जिसे एक दिवाने से अब वो हो गई।

आता है नज़र हर तरफ चेहरा वो उसका, यकीं है मोहब्ब्त दिल ए दिवाने को अब एक हसीना से जो हो गई।।

ढूंढता है दीवाना वही हसीं समा, वो मदहोश निगाहें, वो हुस्न ए यार दुबारा।

यकीं है दीवाना पा जाएगा एक रोज़ उसे, धड़केगा ये दिल ए दीवाना दुबारा।।

हटा दिया रुख से अपने नक़ाब जो उन्होंने सरेराह भरे बाजार ।

कर दिया जख़्मी ये दिल ए दीवाना जो उन्होंने रुख से अपने हटा कर नक़ाब सरेराह भरे बाजार।।

खिल उठा जो चेहरा वो हसीन उनका, एक दूजे को करीब से देखने के बाद।

किया नज़ारा बेहिंतिया मोहब्ब्त का उन्होंने, भर के नज़रो में मोहब्ब्त एक दूजे को देखने के बाद।।

भर कर मदहोश निग़ाहों में बेहिंतिया मोहब्ब्त दिवाने को उन्होंने क्यों देख लिया।

कर दिया वार धड़कनों पर मेरे, जख्म दिल पर देकर सरेराह जो उन्होंने मुझे लूट लिया।।

दिल की किताब के पन्नों पे हुस्न का गुलाबी नाम लिख दिया।

हुई जो नज़रे चार सरेराह उनसे, धड़कते दिल को थामे दिवाने ने उनसे उनका नाम पूछ लिया।।

उस दिलबर का जो अब बुरा हाल हो गया।

उसका भी जीना जो अब दुशवार हो गया।।

आए वो करीब हमारे तो उनको भी हम से प्यार हो गया।

देखा जो नज़रो में नज़रो के एक दूजे के इज़हार ए प्यार हो गया।।

नही मिलता है आराम धड़कनो को मेरी अब क्यों?।

नही रहता है सकूँ सांसो में मेरी अब क्यों?।।

ख़्याल ए सनम हर लम्हा सताता है मुझे अब क्यों?।

बेचैन ए दीवाना हर लम्हा रहता है तन्हा रातों में अब क्यों?।।

मोहब्ब्त जब खुद मुझ पर महरबान हो गई।

वीरान दुनिया ये मेरी अब गुलज़ार हो गई।।

रहता है ख्याल ए सनम इस दिल मे जो मेरे, ना जाने क्यों एक हसीना वो मुझ पर महरबान हो गई।।।

खिलते है गुल बागों में अक्सर, हुस्न से इश्क की वहा जब मुलाक़ात होती है।

देखते है मदहोशी से निग़ाहों में मदहोश उनकी जब, बिन बोले ही अक्सर वहा फिर बात होती है।।

सादगी से अपनी हुस्न वो अंजान सा लगता है।

नज़दिक से कर दीदार ए जलवा ए हुस्न हाल बेहाल सा दिवाने का लगता है।।

सितमगर से एक अक्सर नज़रे चार होती है।

जख़्मी ये दिल वार धड़कनो पर जब मुलाक़ात उनसे होती है।।

तन्हा थे जो लम्हे कभी ज़िन्दगी ये दिवाने की हसीं वादिया महक महकती मोहब्ब्त के बन गई।

बेनाम थी जो धड़कने कभी ज़िन्दगी ये दिवाने की एक नाम वो नाम ए सनम नाम जो उनके हो गईं।।

धड़कता है दिल देख कर दिवाने का चेहरे की हसीं जो उनके वो सुर्ख लाली एक।

डरता है दिल ए दीवाना नादां सोच कर कमसिन उसे जो हसीना वो मतवाली एक।।

ज़िंदगी ये हमारी खुशनुमा और भी हो जाती है।

हसीं चेहरे की सुर्ख लाली देख हमारी धड़कने जब बढ़ जाती है।।

दे कर दिवाने को क़ातिल जब मुस्कुराहट एक झलक देख लेती है वो।

धड़कते दिल की धड़कती हर धड़कनो को हमारी धड़का और भी देती है वो।।

भर के मदहोश निगाहों में अपनी बेहिंतिया मोहब्ब्त वो।

दे कर ज़ख्म दिल और जख़्मी दिल ए दीवाना कर देती है वो।।

राह ए मोहब्ब्त सुने थे दिवाने ने किस्से जो कई हज़ार।

हो गए फ़ना जो जल कर परवाने हुस्न पर उनकी उन मज़ारों पर हर बार।।

ऐसा क्यों लगता है मोहब्ब्त ये दिवाने को भी जला देगी।

बेवफ़ाई जो करि उन्होंने तो मुझ को भी रुला देगी।।

मलिका ए हुस्न है सनम वो मेरा, ये जानता है दीवाना।

कतार है दीवानों की उसके आस पास, ये मानता है दीवाना।।

महरबान है हुस्न वो हसीना सिर्फ इश्क़ ए दीवाना पर, इस बात से नही है इश्क़ ये अनजान।

दे देगा मोहब्ब्त में हुस्न की इश्क़ ये अपना उनके लिए अपनी ये जान।।

लगने लगी है सितमगर वो अपनी, उसकी दुनिया रंगीन है।

मरता है सारा जहां उस पर, हर अदा से अपने वो कमसिन है।।

बिखेर देती है मदहोश निग़ाहों से देख कर, जब वो क़ातिल अपनी जो मुस्कान।

खिल जाते है गुल जमीं पर बंजर, हो जाता है हुस्न से उसके फिर वो गुलिस्तां।।

हुस्न है धड़कने हर किसी की और उनकी जवानी है जान।

उनके ही मदमस्त हुस्न से है वीरानों यहां धड़कती जो जान।।

धड़कता है दिल सीने में जो सनम के, हर धड़कन है उसकी दिवाने की जो जान।।।

दिलाते है यकीं रख के दिल पर हर बार दिवाने के हाथ वो।

मर तो सकती है जल कर मग़र बेवफ़ाई जो ख़ंजर दिल पर दिवाने के मार नही सकती है वो।।

बदल गया मौसम बदल गई फ़िज़ाए जो मोहब्ब्त की एक रोज़।

टूटी है कड़क कर दिल पर जो बिजली दिवाने के एक रोज़।।

बदला जो रुख बहती हवाओ ने एक रोज़, जरूर कुछ बात है।

हुआ हादसा जो कहि पर एक रोज़, जरूर ये दिल यू ही नही परेशान है।।

बदला है रुख हवा का एक रोज़ जो कहि, एहसास उसका यहा हो रहा।

टूटी है डोर ए मोहब्ब्त एक रोज़ जो कहि, दर्द ए दिल उसके खिंचाव से उसका दीवाना रो रहा।।

बिजली एक रोज़ क़यामत की मुझ पर टूट गई।

धड़कते दिल की धड़कने मेरे कहि जो छूट गई।।

फट कर आसमां भी गर्ज के रो पड़ा।

डर कर मोहब्ब्त भी सरेराह मर गई।।

याद है नज़ारा अब भी वो आह से भरा।

बिना कुछ कहे ही दिल रो रहा था मेरा।।

याद है नज़ारा अब भी दर्द ए दिल जो दर्द भरा।

बिना ज़ख्म ही चिर रहा था जख़्मी दिल मेरा।।

अज़ीब सा एक वाक्या एक रोज़ जो दिवाने ने देख लिया।

सनम से करते हुए किसी गैर को मोहब्ब्त जो दिवाने ने देख लिया।।

बेवफ़ाई पर सनम की दिल को उस रोज दिवाने के हैरत हुई।

बेवफ़ा वो क्यों सनम मेरे, किसी गैर की भूल कर मुझे जो हुई।।

निकला था इश्क तो हुस्न के एक दीदार में।

कदम शोलो पर रख जलते जो उसके प्यार में।।

दहक उठे दिल मे फिर क्यों जलते शोले।

हो गए बर्फ फिर क्यों मोहब्ब्त के जलते शोले।।

हो गया जख़्मी दिल वो मेरा जो तड़प गया।

छोड़ दामन में किसी गैर के उनको फिर वो रो दिया।।

नही है अंजान एहसास ए हुस्न हर चाल ज़हरीली हुस्न की इश्क़ अब जान गया।

बेवफ़ा है हुस्न जो अपने इश्क़ से, सितम खुद पर इसे इश्क़ अब मान गया।।

दिल चिर देती है यू ही दिवाने का अब भी वो।

धड़कने तोड़ देती है फ़रेबी नज़रो में ला कर मोहब्ब्त वो।।

दिया है जला दिल इश्क़ का कर के हुस्न ने बेवफ़ाई।

दिया है रुला रूह ए मोहब्ब्त जो उसने कर के मोहब्ब्त की रुसवाई।।

नाक़ाम इश्क़ को हुस्न की मक्कारी जो अब भी दिखती है।

छुप छुप कर सितमगर किसी गैर से वो अब भी मिलती है।।

याद है…

दिखा कर जलवा ए हुस्न ने जलवा ए बेवफ़ाई, धड़कने धड़कते दिल की जब रोक दी।

ऐसा मारा तमाचा टूटे दिल पर मेरे, जीते जी ही उसने सांसे मेरी रोक दी।।

लेकर फ़रेबी मुस्कुराहट आई जब वो मेरे पास।

भर कर नज़रो में मोहब्ब्त झूठी बैठ गई वो मेरे पास।।

कर दिया जख़्मी रख के दिल पर उसमे बेवाफ़ाई से अपना जब हाथ।

कर रही है बैठ कर अब नज़दीक मेरे वो मोहब्ब्त की बात।।

तोड़ दी हर धड़कने रोक दी सब सांसे कर दिया इतना मज़बूर।

दिखता नही दिवाने को अक्स अपना, नही कोई अपना कसूर।।

लेता है बदल रूप वो हुस्न अपना।
लगा कि दाग दामन पर रौशन,
निकलती है ढक दाग को कर के रंगीन वो पर्दा अपना।।

पर्दा है महीन शराफ़त भरा, ढक नही पाता दाग दामन पर अपने बेवाफ़ाई से जो भरा।

झटक कर हाथ दिवाने का एक बेवफ़ा ने सरेराह, मज़ाक मोहब्ब्त का सरे अंजुमन जो उड़ा दिया।।

बेवफ़ा सनम से मुलाक़ात अब भी जो हो रही है।

जख़्मी ये दिल ए दीवाना रूह उसकी जो रो रही है।।

लगता है हुस्न अंजान मगर इश्क़ नही अब नादां।

फ़ितरत है फ़रेबी जो उनकी इश्क़ नही अब अंजान।।

एहसास ए दीवाना सनम जो दगाबाज़ हो गए।

कर के मोहब्ब्त किसी गैर से दामन में उसके खो गए।।

ज़ख्म दिल का सहलाना हाथो से अपने नही असां।

धड़कनो से नाम एक बेवफ़ा का अपनी खुद मिटा पाना नही असां।।

लपटों से धधकती आग के दीवाने को अपने सनम ने जो छोड़ दिया।

कर के मोहब्ब्त किसी गैर से जो बेवफ़ा दिवाने से अपने, दिल दिवाने का तोड़ दिया।।

बेवाफ़ाई का बेवफ़ा सनम से इक़रार करवाना असां नही।

सितमगर का फ़रेबी दिल से उसके नाम मिटाना असां नही।।

मोहब्ब्त का अपनी उसी तरह दिवाने से करती है अब भी वो इज़हार।

भर के मदहोश निगाहों में मोहब्ब्त, दिल पर करती है दिवाने के वो वार।।

धड़कने मुस्कुराहट से अब भी एक उसकी दिवाने की बढ़ जाती है।

इठलाती चाल पर अब भी जो उसकी, सांसे दिवाने की रुक जाती है।।

खड़ा है दीवाना उसके इंतज़ार में अब भी वही।

ए वक़्त टूटे दिल मे मगर एहसास ए मोहब्ब्त कोई एहसास नही।।

बेवफ़ा सनम दिवाने से मुलाक़ात फिर भी है करती।

झूठी मोहब्ब्त से इज़हार ए मोहब्ब्त का वो है करती।।

तड़प दिल की देख कर अपनी दीवाना यह मान गया।

करता है मोहब्ब्त सनम से अब भी, आह से टूटे दिल की इस बात को मान गया।।

अंजान है हुस्न एहसास ए दीवाना जो अपनी वो बेवफ़ाई से।

परेशान है इश्क, एहसास ए हुस्न जो अंजान है वो खुद अपनी बेवफ़ाई से।।

रुला देती है आँसुओ से दिवाने को मोहब्ब्त के अपने झूठे।

तड़पा देती है दिल ए दीवाना दिखा कर मोहब्ब्त के फ़साने झूठे।।

डाल दिया है पर्दा रूह पर क्यों अपनी उसने।

रोक दी है सांसे दिखा कर फ़रेबी मोहब्ब्त क्यों अपनी उसने।।

नही पड़ता है फ़र्क कोई कर के मोहब्ब्त ज़ाहिर उनको झूठे अपने एहसासों से।

हो गया है फ़ना कब का दीवाना देख नज़दीक दिल के उन्हें फ़रेबी उनकी मोहब्ब्त से।।

जख़्मी दिल के ज़ख्म एक रोज़ जो फिर से रो दिए।

देख दामन में किसी गैर के फिर से उन्हें, टुकड़े टूटे दिल के टुकड़े टुकड़े हो गए।।

हर टुकड़े से दिल के निकल रही फ़रियाद।

तोड़ा दिल दिवाने का सनम ने अब है जो गैर के साथ।।

आईने ने मोहब्ब्त के दीवाने को फिर से जला दिया।

दिखा कर अक्स ए बेवफ़ाई सनम का, फिर से मार दिया।।

दौलत ए मोहब्ब्त से दीवाना दिखता था कभी जो शहंशाहों सा।

बेवफ़ाई ए सनम ने कर दिया कंगाल उसे दिखता है हाल ए सूरत अब उसका कोई फ़कीरी सा।।

बदल गया बदलते मौसम की तरह जो दिलबर मेरा।

मुर्झा गया गुलिस्तां पतझड़ आने से पहले ही मोहब्ब्त का मेरा।।

ए मोहब्ब्त हर बार मोहब्ब्त से इश्क जो मज़बूर हो गया।

जान बेवफ़ाई जो हक़ीक़त ए यार, कहि अंधेरे गर्द में खो गया।।

हिम्मत ए इश्क़ टूट जाती है जो बता दे वो हुस्न को।

आईना ए हक़ीक़त जो दिखा दे बेवफ़ाई उसकी जो उसको।।

यकीं है इस कदर एक दिवाने का वफ़ा ए मोहब्ब्त पर अपनी।

कर देगा इस कदर मज़बूर हुस्न को दिखा कर आईना मोहब्ब्त का वो अपनी।।

हो कर बेबस वफ़ा से कर लेगा इकरार ए दगा खुद मोहब्ब्त का सनम वो बेवफ़ा अपनी।।।

मिलते है कर के पत्थर जो एहसासो को इस दिल के अब भी एक बेवफ़ा के साथ।

करती बयां मोहब्ब्त की वो अब भी दिवाने को अपनी हर एक बात।।

अपनी मोहब्ब्त और वफ़ा उसे मोहब्ब्त की एक जिंदा मिसाल लगती है।

अश्को से भीगा दामन में मेरे फ़रेबी जब सर वो अपना रखती है।।

बदस्तूर जारी है बेवफ़ा सनम से मोहब्ब्त की मुलाकाते।

हो जाएगी फ़ना एक रोज़ मोहब्ब्त से मेरी, मोहब्ब्त की दे रही है वो सौगातें।।

सुन कर एक बेवफ़ा से वफ़ा के वो अल्फ़ाज़।

रो दिया दिल तड़प कर सुन बेवफ़ा लबो से वफ़ा के अल्फ़ाज़।।

मासूम है धड़कने जो दिल में मेरे, करती है कई संगीन सवाल।

दे दु ज़वाब हर सवाल का जो ऐसे नही थे दिवाने के हाल।।

होती है सितमगर से अपने अब भी क्यों मोहब्ब्त की ये जख़्मी मुलाक़ातें।

मिलती है दामन में बेवफ़ाई के सरेराह जो वफ़ा की ये बेचैन सौगातें।।

नही है वाकिफ़ हक़ीक़त से हुस्न वो बेवफ़ा सनम मेरा।

नही रहा नादां इश्क़ ये अब जख़्मी है जो मेरा।।

नसों में अपनी ज़हर एक बेवाफ़ाई भरा उनकी जो उतार दिया।

कर के वफ़ा बेवफ़ा से एक खुद को हमने जीते जी ही जो मार दिया।।

बेवफ़ाई से सनम की ख़ुद को जिंदा ही हमने जला दिया।

रुसवाई से मोहब्ब्त की अपनी, प्याला ज़हर का हलक से उतार दिया।।

याद आई जब उसकी तो ज़ख्मो को अपने नासूर बना दिया।

मार कर जख़्मी दिल पर ख़ंजर ख़ूनी लहू अपना बहा दिया।।

उतार कर फड़कती रगों में सीसा कोई पिंघला, दिल से नाम बेवफ़ा का मिटा दिया।।।

दिया है दाग मोहब्ब्त का, नाम ए मोहब्ब्त लबो से उसके निकलने ना अब पाए।

मज़बूर है इश्क जान हक़ीक़त अब भी नज़रो में बहुत, कहि बदनाम ना वो हो जाए।।

कसमें हज़ारो वफ़ा की हमसे, हुस्न वो बेवफ़ाई से आज भी दोहरा गया।

हर सितम झेल कर जख़्मी दिल पर हज़ारो अपने, इश्क ये फिर से आज जख़्मी होता गया।।

जलता है दिल दिवाने का एक, धड़कनो में अब जान नही।।

छूटता है दम दिवाने का एक, सांसो पर उसे अब एतबार नही।।

लगते है ज़ख्म दिल पर मगर आह अब निकलती नही।

दर्द है बेहिंतिया सांसो पर मगर चोट क्यों दिखती नही।।

मिलता है हुस्न ए यार मुस्कुरा कर अब भी आता है दिवाने के जब भी करीब।

देता है सौगात प्यार की बैठाकर एतबार से अब भी अपने करीब।।

तोड़ दिया एतबार एक बेवफ़ा ने अपने यार का क्यों?।

मार कर ख़ंजर बग़ल से ख़ूनी उस को, दम घोट दिया प्यार का क्यों?।।

यकीं मोहब्ब्त का भर कर मदहोश निग़ाहों में अपनी फ़रेबी दिल ए दीवाना तोड़ दिया।

एतबार वफ़ा का बेवफा सनम ने दिला कर हर टुकड़े को टूटे दिल के फिर बिखेर दिया।।

ऐसा लगता है खेल बर्बाद ये मोहब्ब्त का खत्म जल्द ही हो जाएगा।

दिल है फ़रेबी हुस्न का, रौशनी मोहब्ब्त से मोहब्ब्त की दीवाना जरूर उसे दिखलाएगा।।

हैरान है दीवाना, हैरानी की ये बात।

दिख रही है सूरत उसकी वो कुछ उदास।।

आई क़रीब एक रोज़ वो, सूरत कुछ उसकी उदास दिखती है।

ऐसा लगता है तबियत कुछ उसकी नासाज़ लगती है।।

पूछते है दिवाने से अपने बेवफ़ा वो सनम एक रोज़, हो गए जुदा जो हम तो क्या करोंगे।

याद करोंगे हुस्न ए यार को या कर के बदनाम हमे, किसी गैर पर मरोंगे।।

रख दिया ना जाने क्यों हाथ दिल पर बेवफ़ा उस सनम ने जख़्मी दिल जो दिवाने का।

ले रही है एतबार ए वफ़ा अब क्यों, सब कुछ लूट कर वो अपने दिवाने का।।

फ़रमाते है बेवफ़ा वो सनम मेरे वक़्त ए जुदाई भरी बातें।

पूछते है बिन सनम कट पाएँगी क्या दिवाने की तन्हा रातें।।

कहती है दिवाने से वो, जल्द ही जुदा अब शायद हो जाएंगे।

ना दिखो जो तुमको कभी, तन्हा तो नही तब हो जाओंगे।।

कसक ए मोहब्ब्त से दामन ए वफ़ा पाक कर रहे है जो।

मदहोश निग़ाहों से गिरते वो अश्क़, फ़रेबी कत्ल दिवाने का कर रहे है वो।।

यकीं ए दीवाना सनम वो बेवफ़ा वफ़ा गैर से कर रहे है जो।

कर के क़त्ल सुने अरमानों का सरेराह बातें जुदाई भरी कर रहे है वो।।

बात सनम कोई बेवफ़ा जुदाई की जब करने लगे।

सुर्ख गुलाबी लबो से ख़ुद हक़ीक़त अपने बयाँ करने लगे।।

दे देगा इश्क़ दिलासा फिर भी उसे।

धड़कने सुना देगा दिल चिर कर फिर भी उसे।।

दिखा कर आईना बर्बाद मोहब्ब्त का अपनी।

हर ज़ख्म से टूटे दिल के आ रही है एक आह अपनी।।

अंगार है बरस रहे जो अश्क़ बन के, नम आँखों से मेरा लहू।

इम्तेहां ए मोहब्ब्त जो हो रहा तड़प के रो रही है मेरी रूह।।

हो गया बेवफ़ा हुस्न वो, बेवफ़ाई की एक मिसाल बन गया।

बहा कर अश्क़ नम निग़ाहों से अपने, आशिक़ का अपने दिल चिर दिया।।

दे रहे है यकीं, मोहब्ब्त का एतबार बेवफ़ा सनम वो अपनी।

करता है हुस्न सिर्फ इश्क़ से मोहब्ब्त, दर्द ए जुदाई दे देगी जान वो अपनी।।

दिल चिर कर अपना दिखा सकती है वो।

हर धड़कन को रोक कर मिटा सकती है वो।।

लिख दिया टूटे दिल की जो वीरान धड़कनो पर एक नाम वो नाम ए मोहब्ब्त।

इश्क़ को हुस्न पर ना रहा फिर अब क्यों एक यकीं जो यकीं ए मोहब्ब्त।।

झेल गया ख़ंजर ए बेवफ़ाई धड़कनो से अपने, इश्क़ ए दीवाना जो नादां नही।

कर देगा रुसवा ज़माना वफ़ा ए मोहब्ब्त हमारी, अंजाम ए मोहब्ब्त ऐसा कोई नही।।

दिल बदल जाए हुस्न ए सनम जो मिज़ाज ए मौसम की तरह।

थाम के हाथ मोहब्बत किसी गैर से जो चली जाए बेवफ़ा चाल सियार की तरह।।

मोहब्ब्त है जो किसी गैर से तो हाथ उसका थाम ले।

ले रही है इम्तेहां ए दीवाना जो बेवफ़ा अब तो रब का नाम ले।।

आ रही जो खबर आग गुलिस्तां में लग गई।

मोहब्ब्त करते किसी गैर से नज़रे दिलरुबा की अपने दिवाने पर जो ठहर गई।।

उड़ गए क्यों होश ए यार जो सरेराह, मदहोश निगाह एक दम से उसकी, सन सी क्यों जो रह गई।

एहसास ए पत्थर वो एहसास ए यार, ना जाने क्यों सरेराह उनकी, पथराई निगाहें जो बरस गई।।

भीगा जो अश्को से दामन किसी गैर का उनके, आग गुलिस्तां में दिवाने के जो लग गई।।।

समझ गया दिल ए नादां ये दीवाना, वो वक़्त भी आ गया, जुदा जब हो जाएंगे।

करते है गैर से बेवफ़ा सनम जो मोहब्ब्त, ये पल उसी के अब हो कर वो रह जाएंगे।।

सदियों से है तन्हा इश्क़, बेदर्द ज़माने में जो तड़प रहा।

याद हुस्न को करते हुए, घुट घुट कर हर लम्हा जीता और मर रहा।।

देखना है अंजाम ए मोहब्ब्त, बेवफा सनम वार सीने पर कब करेंगे।

तन्हा छोड़ दिवाने को अपने, हाथ किसी गैर का सरेराह वो थाम लेंगे।।

क़यामत दिल पर बेवफ़ा के बन कर बिजली कोई टूट गई।

लिपटी थी दामन से गैर के, निंद जब उसकी उड़ गई।।

नज़रे मिली दिवाने से तो नज़रे उसकी झुक गई।

जख़्मी हो गया दिल मेरा, धड़कने जब उसकी रुक गई।।

तस्वीर ए मोहब्ब्त थी धुंधलाई सी जो, एकदम से साफ वो अब हो गई।

चली हवा तूफ़ानी सी जब, हर बात अधूरी सी जब पूरी हो गई।।

उतर गया नक़ाब ए चेहरा सूरत से जो उनकी, बिन बोले ही हर बात वहा फिर हो गई।।।

जख़्मी दिल ए दीवाना हर ज़ख्म को दिल के कुछ सकूँ मिला।

कुरेदें ज़ख्म दिल के जो हर ज़ख्म अब नासूर बना।।

तड़पती रूह दिवाने की उसको कुछ आराम मिला।

रह गई थी कब्र जो खुली उन एहसासो को अब मुक्कमल मुकाम मिला।।

झूठी महफ़िल में हुस्न की इश्क़ ए दीवाने अब कोई काम नही।

एक बेवफ़ा की मोहब्ब्त में मोहब्ब्त जो अब नीलम हुई।।

फट गए पर्दे बेवफ़ाई के महीन सब उनमे अब आराम नही।

आ गई सूरत ए यार असल नज़र, नक़ाब ए वफ़ा अब बेवफ़ाई नही।।

नही है आदि इश्क़ ये मेरा इन बेदर्द से दर्दो का दिवाने।

ना जाने सह गया सितम कैसे इन बेदर्द बेदर्दो का दिवाने।।

दिखते नही बेवफ़ा सनम कहि, बेवफ़ाई से अपनी क्या सहम गए।

गुजर गए है ना जाने मौसम कितने, रुसवाई से अपनी सितमगर कहि छुप गए।।

जानते है इश्क़ ए दीवाना है सवाल कई।

छुपे है हर सवाल ए मोहब्ब्त है मसले कई।।

हर मसाला है मोहब्ब्त दिल की गहराई से जो।

हर गहराई है राज दिल के छुपाए उन्होंने जो।।

नादां है इश्क़ हो गया जो नीलम।

कुचला गया खाई ठोकरे उसने जो सरेआम।।

फिर एक रोज़…

निकला है चाँद कहि आज किसी ओर से, एक अरसे के बाद।

दिख रहे है मासूम चेहरे पर उसके बेवफ़ाई के घिनोने जो दाग।।

रोशनी है बेनूर सी उसकी, जल रहा जो ये एतबार।।।

दर्द ए जुल्म की हो गई अब इंतेहा, हर दर्द, हर अधूरी आरज़ू एक साथ जो रो पड़े।

आ गए नज़दीक बेवफ़ा दिवाने के क्यों, झुका कर निगाहें अपनी साथ दिवाने के वो जो खड़े।।

देख रही है मदहोश निगाहों में अपनी भर कर प्यार।

तड़प रही है टूटे दिल पर दिवाने के रख कर अपना हाथ।।

उठ चुका है हर पर्दा बेवफ़ाई का चेहरे से जो उनके।

आ गई है दुबारा फिर ये कौन सा नक़ाब जो चेहरे पर उनके।।

दे रहा है हो कर बेसुध हुस्न दुहाई वफ़ा की दिवाने को तन्हाई में अपने।

ले रहा है लिपट कर नाम ए वफ़ा दिवाने से तन्हाई में अपने।।

आँखों से आँसू रुकते नही।

तड़प दिल की कुछ कम तो नही।।

लव्ज़ है मासूम से उसके, सुर्ख लबो से नज़रे क्यों हटती नही।।।

दर्द ए दिल बन कर अश्क़ मासूम निग़ाहों से शराबी जो उसकी झलक गया।

खून ए ज़िगर दिवाने का देख कर उसकी तड़प जो तड़प गया।।

आँसुओ से बेवफ़ा सनम के दर्द झलक रहे।

तड़पता दिल हर टूटती धड़कने नाम ए दीवाना ले रहे।।

सुन कर नाम ए वफ़ा लबों से बेवफा के एक, ज़ख्म ए दिल जो दिवाने के जलते रहे।

हुस्न मरता रहा इश्क तड़पता रहा, देख ये हाल ए सनम ज़ख्म दिल के रो रहे।।

मोहब्ब्त से उनकी ज़ख्म छीलते रहे, हम मरते रहे, हर लम्हा ही दिल दीवानों के जो जलते रहे।।।

रख कर टूटे दिल की टूटी धड़कनो पर हाथ अपना, दे रहे है यकीं वो।

दामन है पाक हुस्न का ए दिवाने, नही है बेवफा वो।।

नही है बेवफ़ा सनम वो, सितम दिल पर उसके हो रहा।

मज़बूर है दस्तूर ए ज़माने से टूट कर दिल उसका रो रहा।।

ना समझ बेवफ़ा सनम को अपने ए दिवाने।

ना दे इल्ज़ाम ए बेवफ़ाई दिल को उसके ए दिवाने।।

मज़बूर है ये हसीना बेदर्द से, खून के रिश्तों और मुफ़लिसी भरे अफ़साने से।।

ले कर नाम ए मोहब्ब्त ए दिवाने ये हुस्न है बदनाम।

जाता है पहलो में गैर के, रूह को उसके नही है आराम।।

मोहब्ब्त के अलावा सितम है कई इस ज़माने में ए दिवाने।

तोड़ सकती है दिल हसीना अपना, पी कर ज़हर ए रुसवाई बेदर्दी इस ज़माने में ए दिवाने।।

देख कर दामन में गैर के, ना समझ लेना तुम गैर मुझ को ए मेरे दिवाने।

जिंदा है अब भी मोहब्ब्त तुम्हारी, हर धड़कन पे है नाम ए दीवाना जो तेरा ए दिवाने।।

एहसास है जो एक गैर का, जान मुफ़लिसी ने निकाल दी कर के अपना बेदर्द वार।

साया है जो एक मौत का, लटकी है सर पर अब भी एक नंगी जो तलवार।।

सितम से मज़बूर है हसीना ये अपनो से, नही छोड़ सकती उनका जो साथ।

निकला है बिज जो दरख़्त से एक, बन गया अब हुस्न ए शबाब जो तुम्हारा ग़ुलाब।।

कांट दु उस दरख़्त को ले कर मोहब्ब्त का अब कैसे मैं नाम।।।

याद फिर भी आए जब मेरी, चाँद आसमां पर देख लेना।

ना मिले सकूँ ए दिल जब, नाम ए बेवफ़ा सनम को अपने दे देना।।

कर देना रुसवाई इस ज़माने में, एक नाम बेवफ़ा हर जगह बेवफ़ाई से लिख देना।

हालात ख़िलाफ़ जो हो गए, जुबां से निकले ना कोई भी अल्फ़ाज़।

जल्द ही ले आएगा एक अंजान घर आंगन में मेरे बारात।।

मज़बूर है बेहिंतिया बेवफ़ा सनम को जान लेना, अलग ना उससे अब हो पाऊंगी।

हो रही हु जुदा जो अपने महबूब से, फिर से ना अब मिल पाऊंगी।।

समझ लेना तुम मुझे बेवाफ़ाई की कोई घिनोनी सौगात।

आ रही है जल्द ही आंगन में मेरे एक अजनबी की बारात।।

हो कर ओझल नज़रो से हुस्न कहि अब खो गया।

छोड़ कर तड़पता दिवाने को दूर नज़रो से हो गया।।

हाल ए दिल जान अपने सनम का, दिल ए दीवाना एक रो रहा।

समझा जो बेवफ़ा वफ़ा को उसकी, रूह ए दीवाना एक दीवाना तड़प रहा।।

आईना ए मोहब्ब्त चमक गया महबूब की सच्चाई से।

दिख रहा अक्स ए मोहब्ब्त उनकी अब वफ़ाई से।।

जान कर हक़ीक़त ए सनम तड़प गई रूह दिल भी रो रहा।

ज़ख्म बेहिंतिया पहले से थे, जख़्मी अब फिर से दिल ए दीवाना हो रहा।।

दिल है बीमार मेरा, रोग ए मोहब्ब्त जो लाइलाज़।

दर्द ए दिल की दवा जो नही, हर धड़कन भी जो सनम के नाम।।

दर्द ए दिल बीमार का एक रोज़ जो बढ़ गया।

हर नव्ज़ रुक गई और कलेजा भी जो फट गया।।

देखी जो आंगन में बारात सनम की उसके, ये दिल तड़पा बेहिंतिया और धड़कना भूल गया।

जान दर्द ए जुदाई ये दिल जो एक दिवाने का टूटा, टूटने से पहले एक आह लेना भी भूल गया।।

हो रही है आतिश बाजी आंगन से ये किस के यू ही अचानक से।

रो रहे है ज़ख्म दिल के हो कर नासूर ये किस के यू ही अचानक से।।

आंगन से उनके धुन जो शहनाई की आ रही है दर्द भरी।

टूटती धड़कने तोड़ते हुए दूर सनम को ले जा रही है दर्द भरी।।

हाल ए बेहाल है उधर भी जो सनम का, देख रही है पल पल हर लम्हा वो किस की राह।

सुनी है नज़रे उसकी, नही निकलती दिल से जो उसके आह से भरी कोई आह।।

रात है मेहंदी की सब सखिया है उसके साथ।

लब है ख़ामोश उसके, बेचैन है धड़कने करने को दिवाने से कोई बात।।

जगमगाहट है सितारों सी घर आंगन जो उसका चमक रहा।

जल रहे है फानूस हर ओर दिल से फिर भी अंधेरा झलक रहा।।

दे रही दुहाई तड़पती धड़कने दिल की होने से पहले उसकी जो विदाई।

दिख जाएगा दीवाना जरूर वो उसका होने से पहले उसकी आखरी जो विदाई।।

उठ गई डोली बुझ गई हर शमा उसके इंतज़ार की उसके साथ, आया ना दिलबर वो दिल का उसके, यार हरजाई।

दर्द ए दिल सरेराह नम आंखों से झलक गया।

बैठ गई डोली में हसीना, दीवाना भी उसका तड़प गया।।

उठी थी डोली जिस लम्हा ये आसमां, ये चाँद भी उसका लाल हो गया।

गिरी थी बिजली दिल पर जो मेरे, गर्ज कर बरसा के शोले वो भी जो रोआ फिर बरस गया।।

टूट गया दिल ए दीवाना हर धड़कन से जख्मी हो गया।

देख कर मंजर एक दिवाने की बर्बादी हर कोई वहा रो दिया।।

तन्हा छोड़ तड़पता सनम दूर कहि परदेश को चला गया।

कसमे वादे तोड़ कर सब, हर टुकड़े पर दिल के दास्ताँ ए बेवफ़ाई लिख गया।।

दिन गुजरते रहे दूर सनम से जुदाई मे।

मौसम ज़िन्दगी के बदलते रहे बेदर्द अंधेरी तन्हाई में।

बिछुड़े सनम से फिर कभी मिल ना पाया जो दीवाना।

याद सनम को करते हुए तार टूटे दिल के कभी छेड़ ना पाया फिर से दीवाना।।

रह गए जो सवाल अधूरे कई, टूटे दिल की तन्हाई में।

ढूंढ़ ना पाया जबाब उनका कोई, हर लम्हा दीवाना तन्हाई में।।

जबाब अधूरे एहसासो का अपने हर सवालों का मुमकिन अब नही।

दीदार ए यार मिल जाए वो बिछुड़ा सनम ए मोहब्ब्त मुमकिन अब नही।।

एहसास ए सनम के हर एहसास है जख़्मी अब भी दिल मे जो बाकी।

टूट गए जो तार ए मोहब्ब्त हर एहसास है अधूरा एक साया जो मौत का अभी बाकी।।

महबूब की मोहब्ब्त से जख़्मी ये दिल दिवाने का हो गया।

इंतज़ार है अब भी उसका, जान के दिल दिवाने का रो गया।।

देख कर ये हाल अपना तड़प के रो दिया, अब भी जख़्मी दिल मेरा।।

सताती है हर लम्हा याद तेरी, जान दिवाने की निकल जाती है।

होता नही दीदार ए यार, तड़प ये तेरी दिवाने को बहुत रुलाती है।।

आती है याद दिवाने की क्या तुझ को भी ए बिछुड़े सनम, याद से दिवाने की क्या तू भी तड़प जाती है।

ले कर नाम ए दीवाना अपने दिवाने को, हर लम्हा क्या तू भी उसे बुलाती है।।

तन्हा है हर धड़कन बेशक़ से टूटे दिल की मेरे, हर धड़कन से छुपाए हु सूरत ए यार आवाज़ अब नही उन धड़कनो में कोई है।

ज़ख्म ना सिलने पाए टूटे दिल की हर जख़्मी धड़कनो के मेरे, आहट अब दिवाने को अपनी मौत की आई है।।

याद हर लम्हा बेवफ़ाई अपनी, दिल में एक तन्हाई, सुनी नज़रो में अब भी सूरत ए यार दिवाने, याद दिल मे मेरे जो उसकी समाई है।।।

देख कर ये हाल अपना तड़प कर रो दिया अब भी ज़ख्मी दिल मेरा, अब भी ज़ख्मी दिल मेरा, अब भी ज़ख्मी दिल मेरा।।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

पुनः प्रकाशित #FacebookLive video के साथ।

27 जून 2020 2:11 am

#FacebookLive link is https://www.facebook.com/vikrantrajliwal85/videos/2651787795092523/

बेगुनाह मोहब्ब्त।
🌹Begunah Mohbbat
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Featured

एक एहसास-ज़िंदगी।

ज़िंदगी की हर एक कसौटियों पर,  हम ख़ुद को परखते हुए चलते गए।


हर हालात ए ज़िंदगी से झुझते हुए, हम खुद को हर हालात ए ज़िंदगी के मुताबिक ढालते गए।।


सकूँ सांसो का ज़िंदगी मे कभी पा ना सके, हम ज़िंदगी को ठोकरों पर ठोकर लगाते गए।


बच्चपन गुज़रा, ज़वानी भी ढल सी गई जो एक दम, हम ख़्वाबों को जिंदगी के पूरा करने में ज़िंदगी को बिताते गए।।


एहसास ख़ुद का हमें आज भी डराता है, हम हर एहसास को ज़िंदगी से अपने मिटाते गए।


हर लम्हा एक तन्हाई सी मालूम होती है, हम अपनों में खुद को हर मरतबा तन्हा पाते गए।।


याद आती है आज भी बचपन की वो गलियां, उम्र गुजरती गई, सितम ज़िंदगी का हम सहते गए।


उम्र गुजार दी हमनें सलीका ज़िंदगी का सीखते हुए, हम आज भी सलीका ज़िंदगी का जो सिख ना सके।।


हर हक़ीक़त को ज़िंदगी की अपने सीने से लगाए, हर हक़ीक़त को ज़िंदगी की हम ज़िंदगी से झुठलाते गए।


इश्क़ है हमें आज भी जिंदगी से बेहिंतिया, ज़हर सांसो से जिंदगी का पीते हुए हम जो मुस्कुराते गए।।


विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।


तारिक़ 13 महीना जून वर्ष 2020 समय
रात्रर 10:01 बजे।

विक्रांत राजलीवाल।
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💥 Recovery Man Author Vikrant Rajliwal

💥
You can produce a positive change in your personality today. The only requirement is a positive move and a qualified experienced person.

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When you want to make your precious life free from intoxication, it means that you want to be free from the company you all know in society as incompatible. With this, you are willing to make some positive changes in your chaotic life.

But here you did this idea and there all the above positive changes took place in your life and you ended up the chaos of your life and achieved life advancement. Do you think so

If you have come down then you are in great need of a responsible chancellor, otherwise you can waste your precious life on your own hands due to your ignorance or you may even die from your family members without any reason.

Recovery And Addiction by Vikrant Rajliwal

Why so? Have you ever considered it?

Because you first need a person who can accept you with your true state of mind. With this, the unknown problem you are feeling today or the unknown problems that have arisen in front of you like a chakravyuh, they had also faced the same problems and who could conquer those problems and reach here today. is.

Some real facts written by Vikrant Rajliwal which is a tangible result of true experiences.

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आप आज ही अपने व्यक्तित्व में एक सकरात्मक परिवर्तन उतपन कर सकते है। केवल आवश्यकता है तो एक सकरात्मक भरे कदम एवं एक योग्य अनुभवी व्यक्ति से एक मुलाकात की।

💥 जब आपने अनमोल जीवन को नशे से मुक्त करना चाहते है तो! इसका तातपर्य यह है कि आप अपनी उस संगत जिसे समाज में हम सभी असंगत के रूप में जानते है से मुक्त होना चाहते है। इसके साथ ही आप अपने अव्यवस्त जीवन में कुछ सकरात्मक परिवतर्न उतपन करने के इच्छुक है।

परन्तु यहाँ अपने यह विचार किया और वहाँ उपरोक्त सभी सकरात्मक परिवर्तन आपके जीवन मे उतपन हो गए और आप अपने जीवन की अव्यवस्था को समाप्त कर जीवन उन्नति को प्राप्त हो गए! क्या आपको ऐसा ही लगता है?

यदि आपका उतर हा है तो आपको एक जिम्मेवार कौंसलर की अति आवश्यकता है अन्यथा आप स्वयं अपने हाथों ही अपने अनमोल जीवम को अपनी अज्ञानता के कारण बर्बाद कर सकते है या बिना कारण ही स्वयं अपने परिवार के सदस्यों से आहात भी हो सकते है।

ऐसा क्यों? क्या कभी यह विचार किया है अपने?

क्योंकि आपको सर्वप्रथम एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता होती है जो आपको आपकी वास्तविक मनोस्थिति के साथ स्वीकार कर सके। इसके साथ ही जो अनजानी समस्या आप आज महसूस कर रहे है या जो अनजानी समस्याओं आपके सामने एक चक्रव्यूह के समान अक्समात खड़ी हो गई है कभी उन्होंने भी उन्ही समस्याओं का सामना किया था और जो उन समस्याओं पर विजय प्राप्त करते हुए आज यहाँ तक पहुच पाए है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित कुछ वास्तविक तथ्य जो सत्य अनुभवों का एक ठोस परिणाम है।

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स्वयं को किसी के समुख इतना ना झुकाए की वह आपको अपने मुनाफ़े एवं स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर सकें।

इसके विपरीत आप स्वयं में कुछ ऐसे सकरात्मक परिवर्तन उतपन कीजिए, जिससे आपको किसी के समुख झुकना ही ना पड़े।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Do not bend yourself in front of anyone so that they can use you for their profit and selfishness.

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Written by Vikrant Rajaliwal.

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Dear Loved One’s,My First Introduction video is uploaded now!

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🖤 The Reality.

🕊️ Birds knows the principle of this world, the same person is alive here who has also shed his blood to save himself. Who’s mother, who’s father is here? The one who has power is the same mother, the same father is here.

There are a lot of bookish things in this wild world, asul, ideal is found in many examples in this world. But the truth is that the dagger is bloody in the hand and the mask on the face stands silently for shame! Friend has wealth in his pocket, his corruption flourishes in the shadows.

A Mantra

If you kill humanity, then do it in such a way that humanity itself becomes ashamed. Every evidence and witness should be your slave. Never see the truth come out! No matter whoever is in power, you should never get off the mask.

Written by Vikrant Rajliwal

Vikrant Rajliwal

🖤 हक़ीक़त।

🕊️ पंछी जानता है इस दुनिया का असूल, यहाँ वही जिंदा है जिसने खुद को बचाने के लिए अपनो का लहू भी बहाया है। कौन माँ, कौन बाप है यहाँ? जिसकी सत्ता है वही माई है वही बाप है यहाँ।

किताबी बातें बहुत होती है इस वहशियाना संसार में, असूल, आदर्श कि मिलती है मिसालें बहुत इस संसार मे। परन्तु सत्य है कि हाथ मे खंजर खूनी और चेहरे पर नकाब शराफत का लिए खामोशी से खड़ा है! मित्र है दौलत जेब मे उसकी, साए में फलता फूलता है उसके भ्र्ष्टाचार।

एक मंत्र।

करू कत्ल इंसानियत का तो ऐसे करू कि खुद इन्सानियत भी शर्मशार हो जाए। हर सबूत और गवाह खुद तुम्हारे गुलाम हो जाए। देखना सत्य कभी भी बाहर ना आने पाए! सत्ता किसी की भी हो, नकाब चेहरे से तुम्हारे कभी उतरने ना पाए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

विक्रांत राजलीवाल।

जीवन चक्रव्यूह। / Life Cycle.

💥जीवन चक्रव्यूह। (Translation in english is below.)


 ये जीवन एक रण क्षेत्र और जीवन से जुड़े प्रत्येक मार्ग जब द्रोण द्वारा रचित चक्रव्यूह के समान ही प्रतीत होते हुए, आपको प्रत्येक क्षण एक धर्म युद्ध लड़ने के लिए विवश करें! यदि आपके समीप गुरु कृष्ण के समान कोई गुरु ना हो? आपके कंधे पर वीर अर्जुन के समान गांडीव और आपके तरकश में जब कोई तीर भी ना हो?


तब अभिमन्यु के समान युद्ध करना आपकी विवशता होती है। हर साम, दाम, दण्ड और भेद से गूँजते हुए, प्रत्येक वार, प्रत्येक अत्याचार का सामना करते हुए, स्वयं को किसी प्रकार जीवित रखते हुए इस चक्रव्यूह  से निकलना एक लक्षय बन जाए। जितना आप इससे बचो उतना ही यह आपको थकाए,  जितना उलझो इससे उतना ही यह घायल करते हुए आपको द्वार के मृत्यु पर ले जाए। 


प्रारम्भ जीवन जो चक्र एक, पृथक भृम है सबके, पृथक सत्य है सबके, पृथक पृथक है भावनाए। आज भी एक मौन सत्य का खड़ा है द्वार सृष्टी पर, साथ प्रगति है, साथ है विनाश एक घनघोर साथ अपने लिए। देख कर भी अनदेखा न्याय, सत्य को जीसने किया,  विनाश सृष्टि का जो होगी एक प्रलय, कारण उसका तू उसी को जान। कारण तू उसका उसी को जान, हा कारण उसका तू  उसका…उसी को जान। 


विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।16/मई/शनिवार 2020

💥 “Life Cycle” ^Zivan Chakravyooh^
 

When this life seems like a battlefield and every path related to life, like the Chakravyuh composed by Drona, force you to fight a dharma “War of Divine Path” war every moment, if there is no Guru like Guru Krishna near you?  Gandiv like Vir Arjun on your shoulder and when there is no arrow in your quiver?  


Then you are forced to fight like Abhimanyu.  Every object, price, punishment and distinction, every attack, every torture, keeping themselves alive somehow, it becomes a goal to come out of this cycle.  The more you avoid it, the more it exhausts you, the more it entangles, the more it injures you and takes you to the death of the door.  


The cycle of life, which is one, separate earth, is the true truth of all, is separate and separate.  Even today, a silent truth stands at the door, with progress, with destruction, with a pouring for oneself. Seeing undiscovered justice, resurrected the truth, the destruction of the world will be a catastrophe, because you know him only.  The reason you know him only, yes, the reason you know him… know him only.  


Written by Vikrant Rajliwal.16/may/Saturday 2020 (If there is an error in translation, then I apologize)

विक्रांत राजलीवाल।

निवास स्थान है पाताल लोक अभी हमारा। (छंद काव्य) विक्रांत राजलीवाल।

निवास स्थान है पाताल लोक अभी हमारा, नाम अज्ञात है पता लापता अभी हमारा।

मोह माया है मिथ्या जगत जो समस्त ये अनन्त हमारा, लक्ष्य मोक्ष है साधना तप तपस्या, उद्देश्य जीवन का हमारा।।

हर कदम है व्यहू चक्र से पीड़ित अभी हमारा, तूणीर रिक्त है  बाणों से, साथ शत्रु की छाया, कोटनीति छल कपट, ये जीवन की विपरीत धारा।

अश्रु अध्रु समाए स्वयं में, रक्त देह का खोलता हमारा, धैर्य धर्म चोटिल जो न्याय परीक्षा, अटल युद्ध है सुनिचित, धर्म जीवन का हमारा।।

विजय पराजय, परिणाम न्याय का, दंड मृत्य, क्षमा सौभाग्य, सत्य ज्ञान स्थापित धरा पर, अस्तित्व रहे सुरक्षित, धर्म मानवता का हमारा।

विक्रांत राजलीवाल।

हर्ष उमंग, जीवन की ऊर्जा, प्राण वायु, शीतल जल, रहे संतुलित,   चक्र धरा का, पवित्र चेतना, जीवन जो हमारा।।

शत्रु मित्र, साथी जो पग पग, शत्रु कुटिलता, मित्र विशवास, अक्स दर्पण में पृथक पृथक दिखाई सत्य के आए, रहे स्मरण एक भाव भातृत्व का सदियों पुराना जो हमारा।

देह जीवन, ऊर्जा जीवित अंतरात्मा, ध्यान वही जो सत्य दिखलाए, ज्ञान वही जो स्वयं से मिलाए, मिथ्या मृत्य, मिथ्या जीवन, मिथ्या एहसास समस्त, धरा मृत्यु पर, स्थिर है मिथ्या, स्थिर है अस्तित्व जो हमारा।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

प्रकाशित तारीख 9 महीना मई वर्ष 2020

समय रात्रि 9:10 बजे

🌹 दर्द दिल का उत्तर गया। (ग़ज़ल) विक्रांत राजलीवाल।

दर्द दिल का उत्तर गया, हर अल्फ़ाज़ में मोहब्ब्त कोई खामोशी सी साथ अपने लिए।

हर जख्म भी आतुर है बिकने को, नाम ए मोहब्ब्त वो नाम महबूब का कर दिया बदनाम सरेराह, हर अश्क़ भी मेरे बन गए, खुद एक मोहब्ब्त की कोई दास्ताँ।।

ये कलम धड़कती है मेरी, हर धड़कन से एक शोर सा उठ जाता है मेरे।

दिल के बाजार में ये दीवाना, जब गीत कोई मोहब्ब्त का अपना गुनगुनाता है।।

बिकने को उतर आया बाजार में, सीने से लगाए तस्वीर ए यार, तड़प गए हर ज़ख्म दिल के मेरे, मोहब्ब्त भी सरेराह हमारी नीलाम हुई।

विक्रांत राजलीवाल।

कोई कहता है शेर सुनाओ, तो कोई कहता है दास्ताँ ए मोहब्ब्त अपनी हमे भी बतलाओ, हो गया मजबूर ये दीवाना, ज़िंदगी भी हमारी खुली किताब हुई।।

हर लम्हा हम उन्हें याद करते गए, जाम ए लहू वो लहू जिगर का अपने पीते गए।

महफ़िल महफ़िल नाम मोहब्ब्त का लेते गए, नज़रों में मोहब्ब्त के एक गुन्हेगार, हम गुनाह जो करते गए।।

गुज़र गए ना जाने ज़माने कितने और ना जाने मौसम भी कितने आ आ कर बीत गए।

हर दर्द बन गए ज़िंदगी का सबक कोई, हर आह भी आहे भरती रही, ज़ख्म टूटे एहसासों से टूट कर बिखर गए मेरे, जिंदगी भी हालत पर मेरे जब हँसती रही।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

प्रथम प्रकाशित तारीख 9/महीना मई/वर्ष 2020/समय सुबह 9:30 बजे।

एक सत्य अनुभव।

एक सत्य अनुभव।

जब एक 16 वर्षीय बालक सुधार के मार्ग का महत्व महसूस करते हुए उस पर चलने का निर्णय करता है। उस समय उसकी वह छवि जिसके साथ वह अपना जीवन व्यतित कर रहा था एकदम से बदल जाती है और उसको एक अंजाने भय से भयभीत करते हुए तोड़ कर रख देती है।

उस समय उसके समस्त जानने वाले उसके इस सुधार के मार्ग को अपनाने या उसे उस पर चलते हुए देख कर, जो वास्तव में उसकी वास्तविक मनोस्थिति से एकदम अंजान होते है उसे अपने अपने तरीके से दुत्कार या अस्वीकार कर देते है क्यों कि उस सुधार के मार्ग से एक छवि हमेशा आपके समुख अपने होने का एक एहसास आपको अत्यंत ही समीप से करवाती है और वह छवि होती है आपके जीवन का वह समय जिससे आहात होकर उस बालक ने यह अत्यंत ही जटिल और दुर्गम मार्ग को चुना।
यह मार्ग इतना जटिल और दुर्गम क्यों होता है? क्योंकि आपके व्यक्तित्व में वह ज्ञान और जीवन ऊर्जा नही होती है जो आपको आपकी वास्तविक मनोस्थिति से परिचित करवा कर, उसका समाधान उपको प्राप्त करवा सके। 
अंत मे इतना ही कहना चाहूंगा कि फिर भी जो दृढ़ संकल्प व्यक्तित्व के व्यक्ति अपने व्यक्तित्व के सुधार हेतु प्रयत्नशील रहते है वह एक दिन अवश्य ही स्वयं के वास्तविक व्यक्तित्व या जिसको आज कल हम रियल पर्सनैलिटी कहते है को प्राप्त कर जाते है।

यदि मैं स्वयं के विषय मे कहु तो मुझ को  15 या 16 वर्ष की आयु में अपने व्यक्तित्व ने अनेको अनेक प्रकार के दोष दिखाई दिए; जिनमे से कुछ शारीरिक दोष थे तो बहुत से मानसिक दुष्विचार के दोष थे। आज लगभग 20 वर्षो के उपरांत भी मैं अपने उस निर्णय पर एक विश्वाश बनाए रखने का प्रयत्न करते हुए स्वयं के व्यक्तित्व को स्वयं के प्रति दुर्विचारो एवं दुर्व्यवहारों से मुक्त करने हेतु पर्यासम्य हु।


विक्रांत राजलीवाल।

4/05/2020 समय प्रातः 11:00 बजे।

💥 एक एहसास! सत्य से प्रेरित है जो। (विक्रांत राजलीवाल) ✍️

अक्सर कई बार कई चिरपरिचित एवं अलग अलग व्यक्तित्व के व्यक्ति अक्सर मुझ से पूछते है कि विक्रांत राजलीवाल जी आप अभी कुछ समय पूर्व तक अनपढ़ 2008 तक(10th pass) की श्रेणी में थे। और आपको 2004 मे लगभग 19 महीने तक पुनर्वासकेन्द्र (रिएबीटेशन सेंटर) में रहना पड़ा था! यहाँ वर्ष की वास्तविक स्थिति का मुझे आज भी पूर्णतः ज्ञात नही है क्योंकि आज भी आपको नशे के कारण जिन मानसिक स्थितियों से सामना करना पड़ा था; उसकी वजह से आज भी आपको कुछ कुछ विषय पूर्णता स्मरण नहो हो पाते। यहाँ तक मुझ को ज्ञात या स्मरण है वह वर्ष  2004 है परंतु मेरे गुरुजन मुझ को आज भी वर्ष 2003 का स्मरण दिलाने की बात करते है।
खैर जो भी हो…

आपको 2004 से 2005 तक मानसिक चिकित्सालय शाहदरा भी ले जाया जाता था। सैकेर्टिस्ट के साथ विचारविमर्श करने को। इसी दौरान आपने एक साल के कम्प्यूटर कोर्स के साथ ही एक हिंदी एवं अंग्रेजी तंकन एवं कुछ 10 महीने तक हिंदी की आशुलिपि का कोर्स भी किया/सीखा। एवं आप आगे शिक्षा प्राप्त करने का अवसर भी प्राप्त करने की कोशिश में सक्रिय थे। ऐसे में दिसम्बर 2007 में आपका विवाह  भी सम्पन कर दिया गया। इन सब के बाबजूद जब आपको आगे शिक्षा प्राप्त करने का अवसर भी प्राप्त हुआ; वो भी शादी के उपरांत तो आप देखते ही देखते पढ़ लिख गए; 2009 में 12th इंदिरागांधी ओपन यूनिवर्सिटी से और 2013 में  दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक पास कर के डिग्री प्राप्त करि। अपने असिस्टेंट कमांडेंट से लेकर आईएएस तक परीक्षाओं का सामना किया।

अपने एक अति संवेदनशील समाजिक मुदो पर अपने प्रथम प्रयास से अपनी समाजिक एवं मानवता की भावनाओ से पूर्ण कविताओं के द्वारा जो समाजिक कुरीतियों पर जो प्रहार किया वो भी बेहद सराहनीय एवं गर्व का विषय है।

जिस यहाँ आप स्वयं कभी भर्ती थे आप ने वहाँ एक गुरु के समान बहुत से कक्षाएं लगाई एवं अपने अनमोल जीवन अनुभवों को अन्य यूजिंग एडिक्ट्स के साथ से साँझा कर उन्हें एक दिव्य राह दिखलाई।

साहित्यिक क्षेत्र में भी अपने देखते ही देखते बहुत सी रचनाएँ गढ़ने के साथ प्रकाशित एवं रिकॉर्ड करि। चाहे वो हिंदी के काव्य हो कविताएं हो छंद हो या उर्दू की नज़म, गजक, गीत हो या विस्तृत नज़म कहानियां (दास्ताने)। रोमांचक उपन्यास, किस्से, व्यंग्य, नाटक के साथ सामाजिक, आध्यात्मिक एवं मनोवैज्ञानिक भावनाओं से प्रेरित विस्तृत और लघु लेख हो या बहुत से आध्यात्मिक एव स्वयं के जीवन अनुभवों से सम्बंधिक ब्लॉग।

👉 आपके अपने विक्रांत राजलीवाल द्वारा अब तक के लिखित, प्रकाशित एवं रिकॉर्डिड लेखन कार्य के साथ आगामी रचनाओं पर एक दृष्टि।👇👇👇

1) प्रथम प्रकाशित पुस्तक एहसास: अत्यधिक संवेदनशील काव्य-नज़म की पुस्तक एहसास संयोग प्रकाशन घर शहादरा द्वारा प्रकाशित एवं ए वन मुद्रक द्वारा प्रिंटिड। वर्ष जनवरी 2016(जिसे उसी दौरान विश्व पुस्तक मेला में भी प्रदर्शित किया गया था।)

2( वर्ष 2017 से अब तक अपनी लेखनी ब्लॉग वेबसाइट https://vikrantrajliwal.com पर सेकड़ो सदाबहार ग़ज़ल, नज़म, के साथ, सैकड़ो काव्य कविताए, सेकड़ो शेर उर्दू में, सैकड़ो शेर हिंदी में, के साथ कुछ गीत-गाने
एवं धार्मिक काव्य 💥 राम जन्म एवं 💥 हनुमन्त।

एवं

3) हिंदी काव्य किस्सा 🇮🇳 मंत्री जी।

5) व्यंग्य किस्सा 🙃 मसखरे और नाटक 🇮🇳 सत्य है या भृम।

6) मेरी सबसे ख़ास दर्दभरी मोहब्ब्त की विस्तृत नज़म दास्तानों के साथ,

7)  मेरा प्रथम विस्तृत रोमकंचक उपन्यास भोंडा। (एक कहानी जो दिल को छू जाए) लिख एवं प्रकाशित कर चुका हूं।

भोंडा। (एक कहानी जो दिल को छू जाए) अपनी लेखनी ब्लॉग साइट https://vikrantrajliwal.comपर आपके पठन हेतु प्रकाशित है।

👉 YouTube पर रिकॉर्डिड वीडियो भोंडा। (एक कहानी जो दिल को छू जाए।) का लिंक है।

🌹… https://youtu.be/P8YjIu5S5cc

एवं बहुत से संवेदनशील लेख अपनी लेखनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर आपके पठन हेतु प्रकाशित किए है।

👉 YouTube चेंनल Kavi & Shayar Vikrant Rajliwal
Url adress is 👇👇👇 https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A

👉 अब तक कि कुछ खास FacebookLive videos का लिंक पता है।

1) https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=903529033412424&id=204032090116708

2) https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1522177451271047&id=204032090116708

3) https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=221447672266776&id=204032090116708

4) https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=473747996541799&id=204032090116708

5) https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=436523326979688&id=204032090116708

👉 ✍️ अब तक मेरी कलम से लिखी गई एवं प्रकाशित कुछ अत्यधिक दर्दभरी मोहब्ब्त की विस्तृत और लघु नज़म दास्ताने इस प्रकार है।

1) एक इंतजार…मोहब्ब्त। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)

2) पहली नज़र। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)

3) बेगुनाह मोहब्ब्त। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)
4) मासूम मोहब्ब्त। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)
5) एक दीवाना। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)

6) पैगाम ए मोहब्ब्त। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)

7) सितमगर हसीना। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)
YOUTUBE LIVE https://youtu.be/F8TKFt7G4Us

8) अक्सर सोचता हूं तन्हा अंधेरी रातों में कि… (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)
YouTube live https://youtu.be/ElipaWVQOrw

9) धुंधलाता अक्स। दर्द ए जिंदगी की दर्दभरी नज़म दास्ताँ ( मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)
YouTube live https://youtu.be/_tKFIu1onQw

10) एक खेल जिंदगी। दर्द ए जिंदगी की दर्दभरी नज़म दास्ताँ (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)
YouTube live https://youtu.be/02TpemeSFsA

👉 हिंदी भाषी काव्य किस्सा 🇮🇳 मंत्री जी।
का युट्युब वीडियो लिंक है।

👉 व्यंग्य किस्सा मसखरे एवं नाटक सत्य है या भृम  का युट्युब वीडियो लिंक है।

अ) 🙃मसखरे।

आ) सत्य है या भृम।

👉 कुछ अध्ययमिक एवं मनोवैज्ञानिक लेख का युट्युब वीडियो लिंक है।

अ) 💥 ब्रह्मांड एवं मस्तिक।

आ) 🙂 चरित्र।

आगामी रचनाएँ 👉 👇

शीघ्र ही एक रोमांचक और मार्मिकता के एहसासों से पूर्ण एक दिलचसब कहानी को प्रकाशित एवं रिकार्डिक करूंगा।

एक अत्यधिक विस्तृत जिंदगी के हर रंग को अत्यंत ही समीप से दर्शाता एक नाटक+उपन्यास।

अब तक लिखि गई मेरी समस्त दर्दभरी मोहब्ब्त की दस्तानों का एक संग्रह। नज़म-गज़ल सँग्रह, काव्य कविताओं का सँग्रह। उपन्यास भोंडा। (एक कहानी दिल को छू जाए) का ब्लॉग वेबसाइट के साथ एक पुस्तक में प्रकाशन।

प्रथम प्रकाशित पुस्तक की अत्यधिक संवेदनशील काव्य नज़म को संशोधित कर पुनः प्रकाशन।

✍️ एक नवीन उपन्यास पर भी कार्य करने का विचार बना रहा हु।

👉 उपरोक्त विषयों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय यह है कि आज आप अपने परिवार  के सदस्यों के साथ एक सम्पन और शान्ति से परिपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे है। यह सब देखते ही देखते आप ने कैसे कर दिखाया?

क्या यह कोई चमत्कार है या कोई जादू टोना है?

👉 तो मै उन सभी महानुभवों से यही कहना चाहूंगा कि जो कार्य आपको अकस्मात ही घटित हो गया हूं के जैसा प्रतीत हो रहा है या जिस कार्य की अवधि आपको अति पल भर की या चन्द वर्षो की प्रतीत हो रही है!

मित्रों यह पल भर या चन्द वर्षो की अवधि का कार्य सम्पन्न करने के लिए मुझ को लगभग 16 से 17 वर्ष का समय लगा है। यह सब इतना सरल नही था जितना कि आपको प्रतीत हो रहा है।

वर्ष 2004 में जब मुझको ज्ञान की प्राप्ति का मार्ग दिखा या ज्ञान का एहसास हुआ था। पुनर्वासकेन्द्र में दर्द ए जिंदगी की हकीकत से झूझते हुए, जीवन के हर एहसास को महसूस करते हुए उन्हें बेहद समीप से समझते हुए! तब…

अंत मे हुआ एक साक्षात्कार स्वम् से स्वम् का, अपने वास्तविक व्यक्त्वि को स्वीकार करते हुए उसको निखारने का, मेरे मित्रो।उस समय से निरन्तर चलते हुए, जलते हुए आज मैं यहाँ तक पहुच पाया हु और अब भी मैं निरन्तर ही सत्य की दिव्य आगमी में जलता हुआ चलता जा रहा हु। वर्ष 2008 में इंद्रा गांधीयूनिवर्सिटी से 12 कक्षा का फार्म भरा और वर्ष 2013 में दिल्ली विश्विद्यालय से स्नातक की डिग्री उत्तीर्ण करि।अवसर की कमी के बाबजूद अपने कर्मो पर एक विशवास रखते हुए आपने स्नातक की शिक्षा के उपरांत 2013 में संघ लोक सेवा आयोग की कोचीन ली एव तैयारी करि।

एक आध स्नातक स्तरीय सरकारी परीक्षा का लिखित परीक्षा भी पास किया। 2016 में अपने शोषित समाज के मासूम व्यक्तिओ को कुछ राहत पहुचने की लिए अपनी अति संवेदनशील कविताओ की पुस्तक प्रकाशित करवाई। जिसका नाम एहसास है।

2016 जुलाई में प्रथम मोबाइल के साथ कम्प्यूटर पर प्रथम बार सोशल मीडिया के संपर्क में आया और 2017 से जुलाई से सोशल मीडिया एवं मेरी लेखनी बालिग वेबसाइट https://vikrantrajliwal.com के माध्यम द्वारा सभ्य रचनात्मक साहित्य के साथ; समाजिक एवं आध्यात्मिक लेखन कार्य करना आरम्भ किया। जमीनी स्तर पर भी जहाँ तक सम्भव हो सका निस्वार्थ भाव के साथ सक्रिय रहा हु।

👉 यह सब कैसे सम्पन हो पाया; मित्रो इसके पीछे एक महान भावना छुपी है और वह है मेरे माता और पिता का असीम प्रेम, अनुशाशन और विश्वास।

👉  इस कार्य के पीछे छुपी है एक महान भावना और वह है 💥 ईष्वर की असीम कृपया एवं आप सब मित्रो और गुरुजनों का असीम प्रेम एवं आशीर्वाद।

अंत मे मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि…

🕊️  यह जो चन्द पलो का सफर है न जो, किया है तय कई वर्षों में।

जलना पड़ा था जलना पड़ेगा, जलता ही जा रहा हु मैं।।

हर दर्द एक सबक बन जाता है न जो, सीखा देता है मुस्कुराना हर दर्द ओ सितम में।

बहती है जो धारा ये जीवन की, देता है सुनाई एक संगीत फिर उस मे।।

टूट जाते है छुप जाते है जब सहारे उम्मीद के सब।

निकलता है सूर्य पुकार एक सत्य से तब।।

यह जो चन्द पलो का सफर है न जो, किया है तय कई वर्षो में।

जलना पड़ा था जलना पड़ेगा जलता ही जा रहा हु मैं।। 

स्वतन्त्र लेखक/कवि-शायर/गीतकार-नज़्मकार-गज़लकार/उपन्यासकार/नाटककार/व्यंग्यकार/ब्लॉगर/सत्य अनुभवों से प्रप्त जीवन संघर्ष का एक यात्री विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित उनके जीवन से सम्बंधित एक सत्य अनुभव।🖋

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