Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Jan 18, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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💦 निर्दोष धड़कन। (Live Video)

🌅 सुप्रभात प्रिय पाठकों एव ह्रदय अज़ीज़ श्रुताओं।

सुबह की ताजगी से महक जाए आपके जीवन की सुंदर हर बाग़वानी।
खिल उठे खुशियों के गुल दूर हो जाए जीवन से आपके हर परेशानी।।

👉 कल आपके और अपने यूट्यूब चैनल Kavi Vikrant Rajliwal पर अपनी प्रथम प्रकाशित पुस्तक से एक अति संवेदनशील कविता एक दर्द भरे किस्सा का परतम भाग Live प्रस्तुत किया था यह आप सभी प्रियजनों के लिए अपनी उस Live वीडियो का लिंक साँझा कर रहा हु।

आशा करता हु आप सभी प्रियजनों को मेरा यह एक छोटा सा प्रयास पसन्द आए। एव आप सभी इस अति संवेदनशील विषय को लिखने एव Live सुनने के पीछे छुपे वास्तविक कारण तक पहुच सके।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

आज ही अपने प्रिय रचनाकार मित्र विक्रांत राजलीवाल की ब्लॉग साइट एव यूट्यूब चैनल से जुड़ कर उनकी हर प्रकाशित एव आगामी रचनाओ के पाठन एव उनके स्वर से उनकी वीडियो का आनन्द प्राप्त कीजिएगा।

पता नीचे अंकित है।

💖 👉 ब्लॉग साइट 👉 vikrantrajliwal.com

1. यूट्यूब चैनल 👉 Kavi Vikrant Rajliwal
यूआरएल पता 👉 https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A

2. यूट्यूब चैनल 👉 Fitness & Health Vikrant Rajliwal
यूआरएल पता 👉 https://www.youtube.com/channel/UCENUJ6Atpi8-Nzc6NJ1USMA

3.यूट्यूब चैनल 👉 Recovery & Life
यूआरएल पता है 👉 https://www.youtube.com/channel/UCr0vYobDXMHVnwrVhK7fTEg

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Jan 15, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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सितमगर हसीना। (YouTube Live video)

अक्सर सितमगर एक हसीना का दीदार किया करता हूँ।

आती है पर जब वो सामने तो मुह फेर लिया करता हूँ।।

देखना तो चाहता हूँ उसको मैं जी भर, मगर न जाने उसके हाव भाव से क्यों डर जाता हूँ।।।

उस सितमगर हसीना की शख्सियत भी कमाल लगती है।

चेहरे पर उसके हमेशा आग ग़ुस्से की दिखती है।।

न जानें चमक से उस आग की क्यों ठिठर जाता हूँ।

ख्यालो में मगर, हाल ए दिल उससे, अक्सर बतियाता हूँ।।

उस समय मुझ में भी कुछ हिम्मत जाग जाती है।

सुनाने को हल ए दिल, तबियत मेरी भी मचल जाती है।।

फिर देख के हाव-भाव वो चहरे के उसके, दम तोड़ महोबत मेरी जाती है।।।

उसकी उस आग से चेहरे कि ए दिल क्यों जल जाता हूँ।

करता हूँ महोबत, बेहिंतिया जब उससे, हाल ए दिल ये उससे अपना, क्यों कह नही पाता हूँ।।

चाल हर बार क्या जहरीली सी कोई, चल जाती है वो।

मिलती है अक्सर तन्हाई में तो घण्टों मुझ से बतियाती हैं वो।।

आती है ए वक़्त पर सामने जब वो सब के तो मुझको भूल जाती हैं।

जख्मी ये दिल इस तरह सरेआम वो मेरा कर जाती है।।

दिखा के चहरे की आग वो अपने, इस दिल पर जख्म

दे जाती है, इस दिल पर जख्म दे जाती है… इस दिल पर जख्म दे जाती है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

पुनः प्रकाशित अपनी YouTube चेनल kavi Vikrant Rajliwal की निविनतम Live वीडियो सितमगर हसीना के यूआरएल लिंक के साथ। अगर आपको मेरा चेनल एव मेरी वीडियो पसन्द आए तो मेरा यूट्यूब चैनल Kavi Vikrant Rajliwal को सब्सक्राइब करना न भूले एव बेल आइकॉन को अबश्य दबाए जिससे आपको भविष्य में भी मेरे live वीडियो का नोटिफिकेशन तुरन्त प्राप्त हो सके।

मेेरे यूट्यूब चैनल एव रचना सितमगर हसीना का यूआरएल लिंक नीचे अंकित है।

चैनल Kavi Vikrant Rajliwal url address is 👉 https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A 🙏💖💖👍👍

Live video सितमगर हसीना का यूआरएल पता है 👉 https://youtu.be/F8TKFt7G4Us 🙏💖💖👍👍

Jan 14, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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खण्डित विशवास। (मेरी Live परफॉर्मेंस वीडियो)

सत्य प्रेम से अगन ह्र्दय कि जवलित ज्वाला जो रंग इंद्रधनुषी स्थापित प्रेम गगन पर हुआ।

थाप विद्रोह से पीड़ित जो ह्र्दय ध्वनियां, प्रहार ह्र्दय पर विच्छेद जो ध्वनियां, थामे व्याकुल जो पंछी प्रेमी, उलझे सम्बन्धों से उनका फिर विच्छेद हुआ।।

करि ज्ञान से प्रेम परीक्षा घात ह्र्दय जो अटल प्रेम का,
खंडित विशवास दुखी स्वम् से फिर हमें जो रोष हुआ।

प्रेम सागर से तरंग ध्वनियां थामे जो अटूट प्रेम कि अकस्मात ही छिद्र भवँर का हलाहल फिर हमें जो प्राप्त हुआ।।

प्रेम दर्पण से अस्तित्व प्रेम का, छल जीवन में अकस्मात फिर स्थापित जो सत्य से हमारे हुआ।

सूखे नयन, पथराई सांसे, दया प्रेम से रुदन स्वम् का खंडित विशवास, अंधकार हर दिशा स्थापित फिर जो अकस्मात हुआ।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Republish with link of my Live performance on my YouTube channel Kavi Vikrant Rajliwal

Url of my Live performance video is in below.
👉 https://youtu.be/PbTk4iY6L1s 🙏💖💖👍👍🎉

Jan 12, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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🎻 सोचता हूं अक्सर तन्हा अंधेरी रातो में… (YouTube Live performance)

याद हैं अब भी गुजरा वो ज़माना, देखा था खोया अक्श नज़रो में उनकी अपना जब वो वर्षो पुराना।

रात थी वो चाँद की, आशिक था महोबत से उनकी
यह सारा ज़माना।।

रहता था उफ़ान धड़कनो में जब मेरे।

बजता हो साज कोई, जैसे साँसों से मेरे।।

उनकी वो हर एक अदा अब भी हैं याद मुझ को।

वख्त बे वख्त वो इतराना, तीर शराबी निगाहों से चलाना,
अब तक हैं याद मुझ को।।

वो मौसम, वो सर्द रात, वो थी मेरी तन्हाई की बात।

साया था पीपल का एक साथ मेरे, वो थी उनसे मेरी जुदाई की रात।।

अब तक हैं याद मुझ को…

देखी थी जब राह ए सनम, धड़कती तो कभी टूटती अपनी हर धड़कन के साथ।

वो आये नही थे देने को जब दीवाने का अपने, जो अब भी धड़कनो में कहि मेरे मेरा साथ।।

निकलती थी एक आह, गुजरते हर लम्हे के साथ।

आलम था बेदर्द बेहिंतिया, आया था जो एक बेबसी के साथ।।

खड़ा था दीवाना जो राह ए सनम, साए से अपने लिपट कर,
खो गयी राह ए मन्ज़िल, एक दर्द, वो महबूबा किसी गैर के साथ।

वख्त गुजरा, समा गुजरा, गुजर गया वो जमाना, चली गयी थाम के हाथ,
देखता रह गया जो तन्हा दीवाना, वो किसी गैर के साथ।।

अब तक हैं याद मुझ को…

खड़ा हैं अब भी वही उसका दीवाना, साए से उसी पीपल के साथ।

देख रहा हैं राह सुनी, अब भी न जाने किसकी वो, उसके चले जाने के बाद।।

अब तक हैं याद मुझ को…

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Yotube Live performance video link in below.

Click the link & watch my Live performance video on my YouTube channel Kavi Vikrant Rajliwal and 8f you like my video so please subscribe my channel.👇
👉 https://youtu.be/D9otM-H6CRg 🙏💖💖

Jan 10, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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एक विशेष सूचना।

नमस्कार मित्रों,

मित्रों जेसा की आपको मैने सूचित किया था कि मेरी एक अप्रकाशित पुस्तक, एक नज़्म पुस्तक, एक अनकही महोबत की एक दर्द भरी अधूरी महोबत की दस्ताने है।

जिसको मैं अपने साधारण से स्वर के साथ जल्द ही अपने यूट्यूब चैनल kavi Vikrant Rajliwal पर आप सभी प्रियजनों के साथ साँझा करने का विचार कर रहा हु।

हो सकता है अब शायद आपको जल्द ही मेरी वह नज़्म रूपी अधूरी महोबत की दर्द भरी दस्ताने मेरे यूट्यूब चैनल Kavi Vikrant Rajliwal पर मेरे साधारण से स्वरों के साथ सुनने को प्राप्त हो जाए।

अपना प्रेम और आशीर्वाद अपने रचनाकार, कवि एव शायर मित्र विक्रांत राजलीवाल पर यू ही बनाए रखे।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल।

मेरे यूट्यूब चैनल का यूआरएल पता नीचे अंकित है।

👉 https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A 🙏💖💖

Jan 4, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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🌅सत्य प्रकाश।

💥 सत्य प्रकाश।

इस सभ्य समाज के बड़े बड़े मंचो से शोषित एव पीड़ितों को उनके शोषण से मुक्ति प्रदान करने हेतु बड़ी बड़ी बातें करना और उनकी भलाई के लिए अनेक प्रकार के आश्वाशन देना एक बात है और जमीनी स्तर पर उन तथ्यों की सच्चाई से परिचित होना एव हर प्रकार के शोषण से सभ्य समाज के कमजोर वर्ग (पीड़ित एव शोषित) को मुक्ति दिला पाना एक अलग है।

न जाने कितने ऐसे मासूम होते है जिनकी कभी भी किसी ने कोई सुनवाई ही नही करि। अपितु उन पर कोई न कोई दोष या उनको मानसिक रोगी बनाने की कोशिश करते हुए उनकी हिम्मत एव हर एक बुलन्द आवाज़ को कुचल दिया गया।

आज मैं ऐसे ही समस्त मासूमो एव बेबसों के लिए सोशल मीडिया के इस महान मंच से एक आवाज़ उठता हु और उनकी आत्मा की शांति के लिए अपने इष्ट देव परम् परमात्मा से एक आत्मशांति की प्रार्थना करता हु।

ईश्वर उनका इंसाफ अब स्वम् करे और उनको एव उनके समस्त परिजनों को एक आत्मशांति प्रदान करें।

एव मेरा ईष्ट मेरा परम् परमात्मा इस लेख रूपी दर्द का पाठन करने वाले समस्त पाठको एव स्वम् मुझ को भी एक ऐसी सदबुद्धि प्रदान करे जिससे हमारी आत्मा को भी एक आत्मशांति का अनुभव प्राप्त हो सके।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक दर्द जो उनके निजी जीवन अनुभव से प्रेरित एव सम्बंधित है।
16/11/2018 at 20:21 pm

Jan 4, 2019
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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आत्मस्वीकृति।

स्वीकार अस्तित्व व्यक्तिव का वास्तविक हम अपने कभी जो कर ना सके।

भृम जीवन में जीवित हर श्वास साथ में, जीवन हम अपना जो जीते रहे।।

बदल ना सके भावो को दूषित, व्यवहारों को भृमित कभी जो हम अपने।

बदलते रहे स्वम् को बदलते भावो से व्यवहारों को दूषित जो हम अपने।।

ह्रदय कक्ष से स्थापित भाव नेक, ज्वलित दिव्य अग्नि एक, सत्य प्रकाश निल गगन से जो अपने।

राह नेकी पर बढ़ते कदम, छीलते घाव, टूटते पथिक घात छलित विश्वासों से जो अपने।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

05/11/2018 at 19:57 pm