Author, Writer, Poet, Drama and Story Writer Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

August 21, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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एक हक़ीक़त।

सुलगते हर एहसासो से अपने सुलगता सा जा रहा हु मैं।

बिखरते हर अरमानो से अपने बिखरता सा जा रहा हु मैं।।

दिख जाता है आईना आज भी जब मुझे, बतलाता है दर्द तन्हाई का अपनी एक ख़ामोशी से मुझे।

हक़ीक़त है जो हक़ीक़त नही, हर हक़ीक़त को करता बयां एक हक़ीक़त से वो मेरी मुझे।।

एक उड़ान अधूरी उड़ना आज भी है ख्वाहिश, हर उड़ान जिंदगी की उड़ने से पहले पँछी जो कैद हो गए।

कदमो से बंधी जंजीरे, लहूलुहान सी तड़पती सांसे, ख़ामोश हर एहसास मेरे एक ख़ामोशी से जो टूट गए।।

कोई तम्मना, कोई आरज़ू अधूरी सलामत ना बचा सके जो हम।

हर बढ़ते कदम से खुद को तन्हा और तन्हा सा करते गए जो हम।।

बदलते मौसम ने बतलाया है हर बार हमें कि ए मुसाफिर समय के, दूर है बहुत काफिला तेरा अब भी बहुत जो कहि खोया हुआ।

एक उम्मीद मेरी जो एक दुआ अब भी है सलामत, राह ए हक़ीक़त से है रौशन उमीदों का मेरा जो टूटा दिया।।

अक्स ए हक़ीक़त मिटा देगा जल्द ही हर अंधेरा, दिख जाएगा मुझ को मेरा फिर से जब वो खोया काफ़िला।।।

हो कर मज़बूर खुद से सिमट जाएगी हर तन्हाइयां एक रोज़ मुझ में, मिटते हर निशां जिंदगी के जब खुद ही एक रोज़ लौट आएंगे।

कब के बिछुड़े हम खुद से ही एक रोज़ जब अचानक से टकराएंगे, हक़ीक़त है ये किस्सा, हर गम ज़िन्दगी के उस रोज मिट जाएंगे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

21/08/2019 at 12:05 pmFB_IMG_1509257727466

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August 20, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

2 comments

Thank’s For 200+ Love and Blessings.

🌹 200 + my heartfelt gratitude to all your friends for your precious love and blessings, 200+ heartfelt friends for subscribing to your heart.

Please keep your love and blessings on your friend Vikrant Rajliwal’s pen and yourself on him.

Your own friend Vikrant Rajliwal.
20 August 9:35 pm

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🌹 200+आपका अनमोल प्रेम एव आशीर्वाद स्वरूप 200+ ह्रदय अज़ीज़ सब्सक्राइब करने के लिए अपने ह्रदय से आप सभी मित्रजनों शत शत बार आभार व्यक्त करता हु।

कृपया अपना प्रेम एवं आशीर्वाद अपने मित्र विक्रांत राजलीवाल की कलम और स्वयं उनपर पर ऐसे ही बनाए रखे।

आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल।
20 अगस्त 9:35pm

🙏 vikrantrajliwal.com ❤️❤️

August 20, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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💥 VIKRANTRAJLIWAL.COM AND MY SPIRITUAL PROGRAM (NA) ✍️

In the last few days, some inspirational ideas and articles written by my pen on various platforms of social media to promote my blog site vikrantrajliwal.com and my spiritual program.

बीते कुछ दिवसों में अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com एवं अपने आध्यात्मिक कार्यक्रम के प्रचार प्रसार हेतु सोशल मीडिया के अनेक मंचो पर मेरी कलम के द्वारा लिखे गए कुछ प्रेरणदायक विचार एव लेख।

💥 मित्रों जीवन को जीना है तो अपनो के प्रति अपने सच्चे मित्रों के प्रति हर प्रकार कि दुर्भावनाओं को अपनी ठोकर से मार कर कुचल दीजिए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

मेरी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com को फॉलो कीजिए।

Translated

💥 Friends, if you want to live your life, then you can crush all kinds of maliciousness towards yourself and your true friends by crushing them with your feet.

Written by Vikrant Rajliwal.

Follow my blog site vikrantrajliwal.com.

💥
भृम है आँखों पर आपका जो आपके अपनो के प्रति कठोर हर भाव हर व्यवहार को दर्शाता है।

क्योंकि कभी जो दिखता एवं महसूस होता है वो सत्य से विपरीत आपका भृम भी हो सकता है।

ज्ञान और अज्ञान के बीच भृम की अत्यंत ही महीन परत होती है। जिसे कोई उचित ज्ञान का जानकर एवं एक दिव्य ज्ञान से शुशोभित ज्ञानी व्यक्ति ही आपके जीवन से मिटाते हुए, आपको एक दिव्य ज्ञान एव दिव्य प्रकाश को महसूस करने का एक अलौकिक अनुभव प्रदान कर सकता है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित सत्य अनुभवो से प्ररित।

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Translated

💥
The ignorance that you have on your eyes reflects your hard feelings and every harsh behavior towards your loved ones.

Because sometimes what you see and feel can be your ignorance contrary to the truth.

There is a very thin layer of misunderstanding between knowledge and ignorance. Whom a person knowing with proper knowledge and a knowledgeable person of divine knowledge can erase from your life, giving you a divine knowledge and a supernatural experience of feeling divine light.

Inspired by true experiences written by Vikrant Rajliwala

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💥 सुप्रभात मित्रों।

यदि आप अपने से श्रेष्ठ अनुभवों के व्यक्तियों का एवं उनके निःस्वार्थ भाव से किए हुए कार्यो का सम्मान नही करते है। तो वास्तव में आप स्वयं का, स्वयं के व्यक्तित्व का भी सम्मान नही करते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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💥 Good Morning Friends.

If you do not respect the people with best experiences than you and the work done by them selflessly. So in reality you do not respect yourself, your personality also.

Written by Vikrant Rajliwal.

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💥 मित्रों जीवन को जीना है तो अपनो के प्रति अपने सच्चे मित्रों के प्रति हर प्रकार कि दुर्भावनाओं को अपनी ठोकर से मार कर कुचल दीजिए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Translated

💥 Friends, if you want to live your life, then you can crush all kinds of maliciousness towards yourself and your true friends by crushing them with your feet.

Written by Vikrant Rajliwal.

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💥
भृम है आँखों पर आपका जो आपके अपनो के प्रति कठोर हर भाव हर व्यवहार को दर्शाता है।

क्योंकि कभी जो दिखता एवं महसूस होता है वो सत्य से विपरीत आपका भृम भी हो सकता है।

ज्ञान और अज्ञान के बीच भृम की अत्यंत ही महीन परत होती है। जिसे कोई उचित ज्ञान का जानकर एवं एक दिव्य ज्ञान से शुशोभित ज्ञानी व्यक्ति ही आपके जीवन से मिटाते हुए, आपको एक दिव्य ज्ञान एव दिव्य प्रकाश को महसूस करने का एक अलौकिक अनुभव प्रदान कर सकता है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित सत्य अनुभवो से प्ररित।

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Translated

💥
The ignorance that you have on your eyes reflects your hard feelings and every harsh behavior towards your loved ones.

Because sometimes what you see and feel can be your ignorance contrary to the truth.

There is a very thin layer of misunderstanding between knowledge and ignorance. Whom a person knowing with proper knowledge and a knowledgeable person of divine knowledge can erase from your life, giving you a divine knowledge and a supernatural experience of feeling divine light.

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💥 इस स्वार्थी संसार मे किसी भी भाव व्यवहार की अपनी ओर से पहल करना इस सृष्टि के प्रारम्भ से ही अत्यंत जटिल एवं कठिन भाव व्यवहार रहा है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Translated

💥 Taking initiative on behalf of any behavior in this selfish world has been a very complex and difficult behavior since the beginning of this creation.

Written by Vikrant Rajliwala

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💥
ऐसा क्यों?

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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💥
Why is this?

Written by Vikrant Rajaliwal.

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💥
क्योंकि हम मनुष्य इस सृष्टि के प्रारम्भ से ही प्रत्येक नवीन विचार एवं व्यवहार के द्वारा एक अनजाने भय से भयभीत होते आए है। और उन्हें अपनाने या समझने के विचार मात्र से ही हमारा हलक सुख कर बैठ जाता है और हमारी व्याकुल आत्मा स्वयं के व्यक्तिव में परिवर्तन की आशंका मात्र से काँप जाती है। चाहे वह परिवर्तन सकरात्मक ही क्यों न हो।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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💥
Because we humans have been afraid of an unintentional fear from the beginning of this creation through every new thought and behavior. And with the thought of adopting or understanding new ideas and practices, our throat gets dry and our distraught soul is shaken by the possibility of change in our personality. Even if that change is positive.

Written by Vikrant Rajliwala.

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💥
आज जमाना बदल गया है मित्रों, अब किसी भी लेखक कलाकार, कवि, एवं शायर को किसी भी घमंड से चूर अत्यचारी के समक्ष अपनी चप्पलें घिसते हुए अपने आत्मसम्मान को स्वयं अपने ही हाथो क़त्ल करते हुए किसी भी घमंड से चूर अत्यचारी के समक्ष अपनी कला को जीवित रखने हेतु झुकने की कतई भी आवश्यकता नही है।

आज ईष्वर की कृप्या से इंटरनेट जिंदाबाद है और अनेकों ऑनलाइन मंच है जहाँ से आप अपनी कला का प्रदर्शन जारी रखते हुए एक आत्मसम्मान के साथ अपनी कला को जीवित रख सकते है।

हो सकता है इसमें आपको कामयाब होने में एक अरसा भी लग जाए, परन्तु मैं विक्रांत राजलीवाल आपको विशवास देता हूं कि उस एक अरसे के बाद भी आप एक बादशाह के सम्मान ही स्वयं के आत्मसम्मान की रक्षा करते हुए खुद को सम्मानित महसूस कर सकेंगे। मुझ को यकीन है आपको तो यकीन है ना!

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Translated

💥
Today, the time has changed, friends, now any writer, artist, poet and poet is not required to bow down to keep his art alive by killing his own self-esteem in front of an arrogant person.

Today, due to the kindness of God, the Internet is alive and there are many online forums from which you can continue to showcase your art and keep your art alive with a self respect.

It may take you an time to succeed in this, but I mean that your friend Vikrant Rajliwal gives the assurance to all of you that even after that one time you will protect your self-respect like a king. Will be able to feel honored. I’m sure are you sure?

Written by Vikrant Rajliwala

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#curruption #Literature #System #भृष्ट #साहित्यिक #व्यवस्था #इंटरनेट #internet #poetry #Shayari #Vikrant #Rajliwal #freedom #wisdom

💥 सुप्रभात मित्रों,

जीवन का एक अचूक मन्त्र है यही तंत्र है कि हम अपने जीवन के प्रत्येक क्षण व्यस्त रहे, व्यवस्त रहे एवं स्वच्छता को अपनाते हुए प्रभु की मस्ती में मस्त रहे।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Translated

💥 Good morning friends

There is an unmistakable mantra of life, this is the system that we remain busy at every moment of our life, stay busy in the joy of God while adopting cleanliness.

Written by Vikrant Rajliwala

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💥आपने आपके अपनो को हानिकारक व्यसनो की चपेट में एक बीमार व्यक्ति के सामान तड़पते देखा है।

पर क्या आपको यह ज्ञात है कि वह वास्तव में एक बीमार व्यक्ति ही है जिसका उपचार केवल आध्यात्मिक कार्यक्रम के तहत कुछ गिने चुने जानकर व्यक्तियों के द्वारा ही सम्भव है।

जरा कुछ क्षण स्वयं के चित्त को शांत रखते हुए एक बार पुनः विचार कीजिए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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You have seen your loved ones suffering like a sick person in the grip of harmful addictions.

  But do you know that he is really a sick person whose treatment is possible only by a few people knowing that under the spiritual program.

  Just think again, keeping yourself calm for a few moments.

  Written by Vikrant Rajliwala

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इस संसार मे कुछ व्यक्तियों को इंकलाब की बोली ही समझ मे आती है। उनसे आप कितना ही विन्रम क्यों ना हो जाए परन्तु वो आपको निर्जीव समझते हुए आपकी हर विन्रमता को नकारते हुए आपके व्यक्तिव को गारेंटिड लेने से बाज नही आते।

ऐसे ही व्यक्तियों के लिए मैं यानी कि विक्रांत राजलीवाल आज सरेआम अपने इस फेसबुक के पेज़ से अपने हज़ारो फॉलोवर्स मित्रों को साक्षी मानते हुए कहता हूं कि आप बाज़ आ जाए कहि ऐसा ना हो सच्चाई का दिव्य प्रकाश आपकी मलिन आत्मा को जिंदा ही ना भस्म कर दे।

स्मरण रहें जब जब उस संसार से किसी सच्चे व्यक्तिव ने इस संसार के किसी भी भाग से इंकलाब किया है तब तब जन जागृति क्रान्तियों का एक सैलाब उमड़ा है। फिर चाहे आप स्वयं को कितना ही सभ्य साबित करने का प्रयत्न क्यों ना करें। परन्तु जब अध्यात्म की बुलन्द आवाज़ के साथ इंकलाब हुआ है तब हर सभ्य चेहरों से उनका सभ्य होने का नक़ाब सच्चाई की एक हुंकार मात्र से खण्ड खण्ड हुआ है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Vikrant Rajliwal
(Recovery Addict)
Author, Writer, Poet, Dramatist, Spiritual Thinker And Writer.

💥
इस मनुष्य जीवन मे आप अपने व्यक्तिव में एक सकरात्मक परिवर्तन रातो रात या अकस्मात ही उप्पन नही कर सकते। इसके लिए आपको एक योग्य मार्गदर्शक की अति आवश्यकता जीवन के पग पग पर हर कदम पर अवश्य महसूस होती रहेगी।

क्यों कि आज आप जिस जटिल समाजिक स्थितियों का सामना कर रहे है वह जटिल स्थितियां या गम्भीर समस्याएं भी रातो रात या अकस्मात ही आपके जीवन मे प्रवेश नही कर सकी है।

इसीलिए उनके समाधान हेतु आपको एक योग्य गुरु एव ज्ञानी मार्गदर्शक के अंतर्गत एक गहन चिंतन एवं एक उचित जीवन प्रणाली को समझना एव अपनाना ही होगा।

आपका मित्र विक्रांत राजलीवाल।
(रिकवरी एडिक्ट)

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Translated

Vikrant Rajliwal
(Recovery Addict)
Author, Writer, Poet, Dramatist, Spiritual Thinker And Writer

💥
In this human life, you cannot achieve a positive change in your personality in the night or accidentally. For this, you will definitely feel the need of a qualified guide at every step on the path of life.

Because the complex social situations you are facing today, even complex situations or serious problems could not enter your life overnight or accidentally.

That is why you have to understand and adopt a deep thinking and a proper life system under a qualified guru and knowledgeable guide to solve them.

Your friend Vikrant Rajliwal.
(Recovery Addict)

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💥
एक निर्जीव होता या निष्क्रिय होता वृक्ष (घर, परिवार या कोई संस्था) जब एक दिव्य उजाले की दिव्य ऊर्जा से स्वयं की निष्प्राण होती शाखाओं की जीवन धारा में कोई भी जीवन प्राण रूपी ऊर्जा प्रदान करने हेतु कोई भी प्रयास ना करे तो ज्ञात रहे उसका अंत अब निच्छित है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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#Narcotics #Anonymous #Programme #Recovery #Life #Vikrant #Rajliwal #Experience

Translated

💥
A tree that is a lifeless ( Home, Family and Institution) or a tree lying dormant, when one does not make any effort to provide life-like energy in the life stream of the branches, which is self-sacrificed by the divine energy of a divine light, then its end is now certain.

Written by Vikrant Rajliwal.
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#Narcotics #Anonymous #Programme #Recovery #Life #Vikrant #Rajliwal #Experience

💥
आज मै यानी कि अपनी अंतरात्मा से एक अध्यात्म प्रोग्राम का फालोवर एक रिकवरी एडिक्ट विक्रांत राजलीवाल अपने इस फ़ेसबुक पेज़ के इन चंद गिने चुने से मेरे ह्रदय अज़ीज़ फॉलोवर्स समेत इस संसार के प्रत्येक उस एडिक्ट के लिए जो आज भी किसी ना किसी हानिकारक व्यसन की चपेट में एक अशांत जीवन जीने को मजबूर है के लिए उनकी आत्मा के शांति के लिए अपनी उच्च शक्ति उस परमपिता परमेश्वर से एक आत्मशांति की प्रार्थना करता हु। ईष्वर हम हम की आत्मा को एक आत्मशांति प्रदान करने की कृपया करे।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल।
(रिकवरी एडिक्ट)

मेरी सेवा का लाभ प्राप्त करने हेतु वट्सअप के जरिए सम्पर्क कीजिए। जी इस पेज पर अंकित है।

#NA #Programme #Vikrant #Rajliwal #HaiPower

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Thank You.

Written By

Vikrant Rajliwal

August 19, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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💥 One Truth. 4 (Fourth Blog) A Real truth based on Truth Events.

By now, you have known how in the year 2003-04, going through a tender age, how an insignificant change has come in my life and how and with which thoughts started that day. And how do I get out of my police official quarters and pass through Mandi (Asia’s largest fruit and vegetable market) with a broken wall sitting on the roadside across the market, near some of the addicts and some other addicts gaming on gilasiyo
on the ground near them Got to stand up and then ..

Now further.

  And then a voice came from one side that is to bet? As soon as I hear this, I walk away from them that a addict comes a few steps behind me and asks me to stop and ask do you want to pudiya (bhaag & Dhatura? Hearing this from his mouth, I stared at him from top to bottom in a police manner and told him how much it was. On hearing this from my mouth, a wave of joy ran across his face and he said, first to take a puff, then to see and we sit on the railway track and inhale and in the first puff I came to know that my brother Somebody has a bubble. And I took three drug Pudiya (bhaang & dhatura) from her and entered the mandi (Asia’s biggest fruit vegetable market) through the same broken wall to come back and with every rising step the sight and tone in front of my vision was loud and Fast and my intoxication continued to intensify. After that, I have no recollection of how I was able to get back to my government police quarters from that confusing state. But it is so important to remember that on reaching my police quarters, I had a strong kick on the door of my policeman’s quatter while suffering from thirst and dry throat.

After a few moments, I came to know that I had locked and after removing the key from my pocket, I open the lock and enter inside the police quarters. As soon as I enter my quater, I close the door and empty a cold bottle from the fridge and empty half of it in one knee. Now I get some control over my senses and my breath. And I think about my last night what I had created something scary. I will tell you about that which was very terrible, but not yet at the appropriate time by one of the upcoming blogs. Thinking of all this, I take a cigarette out of my pocket and stand outside a window of that fourth floor policeman quater and take a look outside and with a jerk, ignite that curvy cigarette very loudly. I puff. At the same time, the door bell of the Quarter rings. And I start wondering who would have come this time. Thinking that I give one to two puffs and that is when the doorbell rings again. And I slowly approached near the door and peeped out of the door with the third eye, But the saroor, which had drunk the puff of a drunk cigarette, was now beginning to dominate my brain again. And in that stage I don’t see any thing properly outside and I open the door with a jerk.

Remaining next blog …

A real truth based on true events written by Vikrant Rajliwal

19 August 2019 at 1:45pm

If there has been any error in my translation, due to which someone is hurt, then I apologize.

August 19, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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💥 एक सत्य। 4 (चौथा ब्लॉग) सत्य घटनाओं पर आधारित एक अलौकिक सत्य।

अब तक आपने जाना कि कैसे वर्ष 2003-04 में एक कच्ची उम्र से गुजरते हुए कैसे मेरे तुच्छ से जीवन मे एक महत्वपूर्ण परिवतर्न आया और उस दिन का प्रारम्भ कैसे और किन विचारों के साथ हुआ। एवं किस प्रकार मैं अपने पुलिसिया सरकारी क्वाटर से निकल कर मंडी (एशिया की सबसे बड़ी फल एवं सब्जी मंडी) से गुजरते हुए एक टूटी दीवार से मंडी के पार सड़क के किनारे बैठे कुछ चिलमची और उनके समीप गिलसियो पर सट्टा लगाते कुछ अन्य चिलमचियो के समीप जा कर खड़ा हो गया और तभी..

अब आगे।

और तभी एक ओर से एक आवाज़ आई कि सट्टा लगाना है क्या? यह सुनते ही मैं उनसे दूर चला जाता हूं कि एक चिलमची मेरे पीछे पीछे कुछ कदम आते हुए मुझ को रुकने को कहता है और पूछता है कि पुड़िया चाहिए क्या? उसके मुंह से यह सुनते ही मैने उस को ऊपर से नीचे तक एक पुलिसिया अंदाज़ में घूरा और उससे कहा कि कितने की है। मेरे मुंह से यह सुनते ही उसके चेहरे पर एक हर्ष की लहर दौड़ गई और वह बोला पहले एक कश लगाऊ फिर देखना और हम वही रेल की पटरी पर बैठ कर कश लगाते है और पहले ही कश में मुझ को ज्ञात हो गया कि भाई यह तो कोई बबाल लिए हुए है। और मैंने उससे तीन पुड़िया नशा ले लिया और वापसी के लिए उसी टूटी दीवार से होते हुए मंडी (एशिया की सबसे बड़ी फल सब्जी की मंडी) के भीतर प्रवेश कर जाता हूं और हर बढ़ते कदम से मेरी दृष्टि के सामने के नजारे और स्वर तेज़ और तेज़ और मेरा नशा तीव्र और तीव्र होता गया। उसके बाद का मुझ को ठीक ठीक कुछ स्मरण नही की उस भृमित अवस्था से किस प्रकार मैं अपने सरकरी पुलिसिया क्वाटर पर वापस पहुच पाया। लेकिन इतना अवश्य स्मरण है कि अपने उस पुलिसिया क्वाटर पर पहुच कर मैंने उस भृमित अवस्था मे सूखते कंठ से व्याकुल होते हुए दरवाजे पर एक जोरदार लात जमाई थी।

कुछ क्षणों के उपरांत मुझ को ज्ञात हुआ कि मै तो ताला लगा कर गया था और अपनी जेब से चाबी निकाल कर मैं ताला खोल देता हूं और पुलिसिया क्वाटर के भीतर प्रवेश कर जाता हूं। अपने क्वाटर के भीतर प्रवेश करते ही मैं दरवाजे की साकल मूंद कर एक ठंडी बोतल फ्रिज से निकल कर एक ही घुट में आधी खाली कर देता हूं। अब मुझ को कुछ कुछ होश और उखड़ी सांसो पर कुछ काबू प्राप्त होता है। और मैं विचार करता हु अपनी बीती हुई रात्रि ( last night) के बारे में कि मैने क्या कुछ बबाल मचाया था। जो कि अत्यंत ही भयानक था इस बारे में भी आपको बताऊंगा मगर अभी नही उचित समय पर आगामी ब्लॉग्स में किसी एक के द्वारा। यह सब सोचते हुए मैं अपनी जेब से पुड़िया की एक सिगरेट निकाल कर अपने चौथी मंजिल के उस पुलिसिया क्वाटर की एक खिड़की के समीप खड़े हो कर बाहर का नज़ारा लेता हूं और एक झटके के साथ उस पुड़िया की सिगरेट को ज्वलित कर अत्यंत ही जोर से कश लगा देता हूं। कि ठीक उसी समय क्वाटर की डोर बेल बज उठती है। और मैं सोच में पड़ जाता हूं कि इस समय कौन आया होगा। यह सोचते हुए मै एक से दो कश और लगा देता हूं कि तभी एक बार पुनः डोर बेल बज उठती है। और मैं आहिस्ता आहिस्ता से दरवाजे के समीप पहुच कर दरवाज़े की तीसरी आंख से बहार को झांकता हु पर पुड़िया के कश से अब मुझ को पुनः भृम सा होने लगा था। मुझ को बाहर कुछ ठीक से नज़र नही आता और मै दरवाज़ा खोल देता हूं।

शेष अगले क्रम से…

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित सत्य घटनाओ पर आधारित एक अलौकिक सत्य।

19 अगस्त 2019 at 12:15 pm

August 18, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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💥 नया ज़माना।

नया ज़माना कविता को मैने कुछ संशोधित कर उसमें चंद भावुक पंक्तियों की बढ़ोतरी करि है। आशा करता हु आपको पसंद आए।

💥 नया ज़माना।

बढ़ा कर हाथ, हट जाना पीछे को, चलन हैं आज-कल ये नए जमाने का।

मुस्कुरा कर चरित्र उछालना यारो का, दौर हैं आज कल ये नये ज़माने का।।

जता कर यारी, दिखा के अपना-पन, असूल हैं देना दगा आज कल ये नए ज़माने का।

भरी हैं रग-रग में मक्कारी जिनके, शान हैं बदलना रंग अपना, आज कल ये नये ज़माने का।।

तोड़ विशवास भाई का सगे स्वयं, बाट पुरखों की देना जमीन ताक पर हर रिश्ता रख नाज़ुक, हक है आज कल ये नए ज़माने का।

कर विस्मरण सुगंध माटी वो गांव की, विस्मरण भाईचारे का अपना व्यवहार अनमोल, हर सम्बन्ध है कठोर, आज कल ये नए जमाने का।।

उड़ गए पंछी लिए दाना पानी अपना अपना, छोड़ आशियाना वो अपना पुराना, सत्य है कमज़ोर अत्यंत,आज कल ये नए जमाने का।

पंछी है ये भावनाए स्वार्थी, आशियाना जो नेकी से भरा,कर विस्मरण वो साथ अपनों का, भृम है कायम आज कल ये नए ज़माने का।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

पुनः प्रकाशित संसोधित रूप में प्रथम बार।
प्रकाशित तिथि: 18/08/2019
समय: 8:05am
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August 17, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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A Very Painful Drama, An Exciting StorY. (Upcoming Work.)

Photo_1566022661055Hello all my dear readers and friends, as I have informed you earlier, but I am feeling that the time has come when I will have to inform you all once again that I will start the year 2016. In the period, a very painful, exciting and a story presenting every color of life, I started working on a play and in a few months I continued working That first story was completed approximately 85% of the play. But at the same time, I had to study Master of Mass Communication and Diploma.

In a few days there, I got to know the state of the art equipment with my first mobile, but due to lack of mutual communication at the time of admission (the subject medium which was a vile attempt to impose English on me by imposing Hindi) Cheating was also found there. Which he very easily gave the name of Missunderstanding. And I decided to take a reasonable and concrete step, ending all contact with that news channel’s university.

However, in all this, my family had to face loss of one and a half to two lakhs or cheating. That reputed news channel of the country would have thought that I would have received education from them by making a compromise with the fear of loss of one and a half to two lakh rupees with their cheat which they had very easily named Miss Understanding. Will stay But they probably did not know that I have been trying to provide correct knowledge and direction to many innocent people while working in a spiritual program (Narcotics Anonymus) for the last 13 years at that time.

Well, I will talk on this subject again someday, after being separated from them, I joined social media and I am with you all till now. During EC, I wrote hundreds of gazal, poetry, articles and also published on many social forums. Now that my entire painful detailed Nazam Dastane is about to be published, I will once again get an opportunity to work on that story on that painful drama.

I hope that you will not have to wait any longer for my first play, a painful story depicting the ups and downs of every color of life.

Thank you

Written by Vikrant Rajliwal.

^If there is any error in my translation, then forgive.^

Follow his blog site vikrantrajliwal.com today to read upcoming compositions and blogs with his hundreds of published nazam, ghazam, poems, poems, lyric satire, anecdotes, social, spiritual and psychological articles written by Vikrant Rajaliwal.

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