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💥 Recovery Man Author Vikrant Rajliwal

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You can produce a positive change in your personality today. The only requirement is a positive move and a qualified experienced person.

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When you want to make your precious life free from intoxication, it means that you want to be free from the company you all know in society as incompatible. With this, you are willing to make some positive changes in your chaotic life.

But here you did this idea and there all the above positive changes took place in your life and you ended up the chaos of your life and achieved life advancement. Do you think so

If you have come down then you are in great need of a responsible chancellor, otherwise you can waste your precious life on your own hands due to your ignorance or you may even die from your family members without any reason.

Recovery And Addiction by Vikrant Rajliwal

Why so? Have you ever considered it?

Because you first need a person who can accept you with your true state of mind. With this, the unknown problem you are feeling today or the unknown problems that have arisen in front of you like a chakravyuh, they had also faced the same problems and who could conquer those problems and reach here today. is.

Some real facts written by Vikrant Rajliwal which is a tangible result of true experiences.

Contact person.
Whatsapp no: 91 + 9354948135

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आप आज ही अपने व्यक्तित्व में एक सकरात्मक परिवर्तन उतपन कर सकते है। केवल आवश्यकता है तो एक सकरात्मक भरे कदम एवं एक योग्य अनुभवी व्यक्ति से एक मुलाकात की।

💥 जब आपने अनमोल जीवन को नशे से मुक्त करना चाहते है तो! इसका तातपर्य यह है कि आप अपनी उस संगत जिसे समाज में हम सभी असंगत के रूप में जानते है से मुक्त होना चाहते है। इसके साथ ही आप अपने अव्यवस्त जीवन में कुछ सकरात्मक परिवतर्न उतपन करने के इच्छुक है।

परन्तु यहाँ अपने यह विचार किया और वहाँ उपरोक्त सभी सकरात्मक परिवर्तन आपके जीवन मे उतपन हो गए और आप अपने जीवन की अव्यवस्था को समाप्त कर जीवन उन्नति को प्राप्त हो गए! क्या आपको ऐसा ही लगता है?

यदि आपका उतर हा है तो आपको एक जिम्मेवार कौंसलर की अति आवश्यकता है अन्यथा आप स्वयं अपने हाथों ही अपने अनमोल जीवम को अपनी अज्ञानता के कारण बर्बाद कर सकते है या बिना कारण ही स्वयं अपने परिवार के सदस्यों से आहात भी हो सकते है।

ऐसा क्यों? क्या कभी यह विचार किया है अपने?

क्योंकि आपको सर्वप्रथम एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता होती है जो आपको आपकी वास्तविक मनोस्थिति के साथ स्वीकार कर सके। इसके साथ ही जो अनजानी समस्या आप आज महसूस कर रहे है या जो अनजानी समस्याओं आपके सामने एक चक्रव्यूह के समान अक्समात खड़ी हो गई है कभी उन्होंने भी उन्ही समस्याओं का सामना किया था और जो उन समस्याओं पर विजय प्राप्त करते हुए आज यहाँ तक पहुच पाए है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित कुछ वास्तविक तथ्य जो सत्य अनुभवों का एक ठोस परिणाम है।

संपर्क सूत्र।
Whatsapp no: 91+9354948135

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स्वयं को किसी के समुख इतना ना झुकाए की वह आपको अपने मुनाफ़े एवं स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर सकें।

इसके विपरीत आप स्वयं में कुछ ऐसे सकरात्मक परिवर्तन उतपन कीजिए, जिससे आपको किसी के समुख झुकना ही ना पड़े।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

परामर्श हेतु निशुल्क संपर्क सूत्र है।

व्हाट्सअप न: 91+9354948135

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Do not bend yourself in front of anyone so that they can use you for their profit and selfishness.

On the contrary, you create some positive changes in yourself so that you do not have to bend over anyone.

Written by Vikrant Rajaliwal.

There is a free contact for consultation.

Whatsapp no: 91 + 9354948135

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Dear Loved One’s,My First Introduction video is uploaded now!

Video link is mentioned in below!

Watch my video and Subscribe to our Channel.

https://youtu.be/oEdfhLIaUwE 🙏💖💖

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💥 एक एहसास! सत्य से प्रेरित है जो। (विक्रांत राजलीवाल) ✍️

अक्सर कई बार कई चिरपरिचित एवं अलग अलग व्यक्तित्व के व्यक्ति अक्सर मुझ से पूछते है कि विक्रांत राजलीवाल जी आप अभी कुछ समय पूर्व तक अनपढ़ 2008 तक(10th pass) की श्रेणी में थे। और आपको 2004 मे लगभग 19 महीने तक पुनर्वासकेन्द्र (रिएबीटेशन सेंटर) में रहना पड़ा था! यहाँ वर्ष की वास्तविक स्थिति का मुझे आज भी पूर्णतः ज्ञात नही है क्योंकि आज भी आपको नशे के कारण जिन मानसिक स्थितियों से सामना करना पड़ा था; उसकी वजह से आज भी आपको कुछ कुछ विषय पूर्णता स्मरण नहो हो पाते। यहाँ तक मुझ को ज्ञात या स्मरण है वह वर्ष  2004 है परंतु मेरे गुरुजन मुझ को आज भी वर्ष 2003 का स्मरण दिलाने की बात करते है।
खैर जो भी हो…

आपको 2004 से 2005 तक मानसिक चिकित्सालय शाहदरा भी ले जाया जाता था। सैकेर्टिस्ट के साथ विचारविमर्श करने को। इसी दौरान आपने एक साल के कम्प्यूटर कोर्स के साथ ही एक हिंदी एवं अंग्रेजी तंकन एवं कुछ 10 महीने तक हिंदी की आशुलिपि का कोर्स भी किया/सीखा। एवं आप आगे शिक्षा प्राप्त करने का अवसर भी प्राप्त करने की कोशिश में सक्रिय थे। ऐसे में दिसम्बर 2007 में आपका विवाह  भी सम्पन कर दिया गया। इन सब के बाबजूद जब आपको आगे शिक्षा प्राप्त करने का अवसर भी प्राप्त हुआ; वो भी शादी के उपरांत तो आप देखते ही देखते पढ़ लिख गए; 2009 में 12th इंदिरागांधी ओपन यूनिवर्सिटी से और 2013 में  दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक पास कर के डिग्री प्राप्त करि। अपने असिस्टेंट कमांडेंट से लेकर आईएएस तक परीक्षाओं का सामना किया।

अपने एक अति संवेदनशील समाजिक मुदो पर अपने प्रथम प्रयास से अपनी समाजिक एवं मानवता की भावनाओ से पूर्ण कविताओं के द्वारा जो समाजिक कुरीतियों पर जो प्रहार किया वो भी बेहद सराहनीय एवं गर्व का विषय है।

जिस यहाँ आप स्वयं कभी भर्ती थे आप ने वहाँ एक गुरु के समान बहुत से कक्षाएं लगाई एवं अपने अनमोल जीवन अनुभवों को अन्य यूजिंग एडिक्ट्स के साथ से साँझा कर उन्हें एक दिव्य राह दिखलाई।

साहित्यिक क्षेत्र में भी अपने देखते ही देखते बहुत सी रचनाएँ गढ़ने के साथ प्रकाशित एवं रिकॉर्ड करि। चाहे वो हिंदी के काव्य हो कविताएं हो छंद हो या उर्दू की नज़म, गजक, गीत हो या विस्तृत नज़म कहानियां (दास्ताने)। रोमांचक उपन्यास, किस्से, व्यंग्य, नाटक के साथ सामाजिक, आध्यात्मिक एवं मनोवैज्ञानिक भावनाओं से प्रेरित विस्तृत और लघु लेख हो या बहुत से आध्यात्मिक एव स्वयं के जीवन अनुभवों से सम्बंधिक ब्लॉग।

👉 आपके अपने विक्रांत राजलीवाल द्वारा अब तक के लिखित, प्रकाशित एवं रिकॉर्डिड लेखन कार्य के साथ आगामी रचनाओं पर एक दृष्टि।👇👇👇

1) प्रथम प्रकाशित पुस्तक एहसास: अत्यधिक संवेदनशील काव्य-नज़म की पुस्तक एहसास संयोग प्रकाशन घर शहादरा द्वारा प्रकाशित एवं ए वन मुद्रक द्वारा प्रिंटिड। वर्ष जनवरी 2016(जिसे उसी दौरान विश्व पुस्तक मेला में भी प्रदर्शित किया गया था।)

2( वर्ष 2017 से अब तक अपनी लेखनी ब्लॉग वेबसाइट https://vikrantrajliwal.com पर सेकड़ो सदाबहार ग़ज़ल, नज़म, के साथ, सैकड़ो काव्य कविताए, सेकड़ो शेर उर्दू में, सैकड़ो शेर हिंदी में, के साथ कुछ गीत-गाने
एवं धार्मिक काव्य 💥 राम जन्म एवं 💥 हनुमन्त।

एवं

3) हिंदी काव्य किस्सा 🇮🇳 मंत्री जी।

5) व्यंग्य किस्सा 🙃 मसखरे और नाटक 🇮🇳 सत्य है या भृम।

6) मेरी सबसे ख़ास दर्दभरी मोहब्ब्त की विस्तृत नज़म दास्तानों के साथ,

7)  मेरा प्रथम विस्तृत रोमकंचक उपन्यास भोंडा। (एक कहानी जो दिल को छू जाए) लिख एवं प्रकाशित कर चुका हूं।

भोंडा। (एक कहानी जो दिल को छू जाए) अपनी लेखनी ब्लॉग साइट https://vikrantrajliwal.comपर आपके पठन हेतु प्रकाशित है।

👉 YouTube पर रिकॉर्डिड वीडियो भोंडा। (एक कहानी जो दिल को छू जाए।) का लिंक है।

🌹… https://youtu.be/P8YjIu5S5cc

एवं बहुत से संवेदनशील लेख अपनी लेखनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर आपके पठन हेतु प्रकाशित किए है।

👉 YouTube चेंनल Kavi & Shayar Vikrant Rajliwal
Url adress is 👇👇👇 https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A

👉 अब तक कि कुछ खास FacebookLive videos का लिंक पता है।

1) https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=903529033412424&id=204032090116708

2) https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1522177451271047&id=204032090116708

3) https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=221447672266776&id=204032090116708

4) https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=473747996541799&id=204032090116708

5) https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=436523326979688&id=204032090116708

👉 ✍️ अब तक मेरी कलम से लिखी गई एवं प्रकाशित कुछ अत्यधिक दर्दभरी मोहब्ब्त की विस्तृत और लघु नज़म दास्ताने इस प्रकार है।

1) एक इंतजार…मोहब्ब्त। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)

2) पहली नज़र। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)

3) बेगुनाह मोहब्ब्त। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)
4) मासूम मोहब्ब्त। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)
5) एक दीवाना। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)

6) पैगाम ए मोहब्ब्त। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)

7) सितमगर हसीना। (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)
YOUTUBE LIVE https://youtu.be/F8TKFt7G4Us

8) अक्सर सोचता हूं तन्हा अंधेरी रातों में कि… (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)
YouTube live https://youtu.be/ElipaWVQOrw

9) धुंधलाता अक्स। दर्द ए जिंदगी की दर्दभरी नज़म दास्ताँ ( मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)
YouTube live https://youtu.be/_tKFIu1onQw

10) एक खेल जिंदगी। दर्द ए जिंदगी की दर्दभरी नज़म दास्ताँ (मेरी लेखनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित है।)
YouTube live https://youtu.be/02TpemeSFsA

👉 हिंदी भाषी काव्य किस्सा 🇮🇳 मंत्री जी।
का युट्युब वीडियो लिंक है।

👉 व्यंग्य किस्सा मसखरे एवं नाटक सत्य है या भृम  का युट्युब वीडियो लिंक है।

अ) 🙃मसखरे।

आ) सत्य है या भृम।

👉 कुछ अध्ययमिक एवं मनोवैज्ञानिक लेख का युट्युब वीडियो लिंक है।

अ) 💥 ब्रह्मांड एवं मस्तिक।

आ) 🙂 चरित्र।

आगामी रचनाएँ 👉 👇

शीघ्र ही एक रोमांचक और मार्मिकता के एहसासों से पूर्ण एक दिलचसब कहानी को प्रकाशित एवं रिकार्डिक करूंगा।

एक अत्यधिक विस्तृत जिंदगी के हर रंग को अत्यंत ही समीप से दर्शाता एक नाटक+उपन्यास।

अब तक लिखि गई मेरी समस्त दर्दभरी मोहब्ब्त की दस्तानों का एक संग्रह। नज़म-गज़ल सँग्रह, काव्य कविताओं का सँग्रह। उपन्यास भोंडा। (एक कहानी दिल को छू जाए) का ब्लॉग वेबसाइट के साथ एक पुस्तक में प्रकाशन।

प्रथम प्रकाशित पुस्तक की अत्यधिक संवेदनशील काव्य नज़म को संशोधित कर पुनः प्रकाशन।

✍️ एक नवीन उपन्यास पर भी कार्य करने का विचार बना रहा हु।

👉 उपरोक्त विषयों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय यह है कि आज आप अपने परिवार  के सदस्यों के साथ एक सम्पन और शान्ति से परिपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे है। यह सब देखते ही देखते आप ने कैसे कर दिखाया?

क्या यह कोई चमत्कार है या कोई जादू टोना है?

👉 तो मै उन सभी महानुभवों से यही कहना चाहूंगा कि जो कार्य आपको अकस्मात ही घटित हो गया हूं के जैसा प्रतीत हो रहा है या जिस कार्य की अवधि आपको अति पल भर की या चन्द वर्षो की प्रतीत हो रही है!

मित्रों यह पल भर या चन्द वर्षो की अवधि का कार्य सम्पन्न करने के लिए मुझ को लगभग 16 से 17 वर्ष का समय लगा है। यह सब इतना सरल नही था जितना कि आपको प्रतीत हो रहा है।

वर्ष 2004 में जब मुझको ज्ञान की प्राप्ति का मार्ग दिखा या ज्ञान का एहसास हुआ था। पुनर्वासकेन्द्र में दर्द ए जिंदगी की हकीकत से झूझते हुए, जीवन के हर एहसास को महसूस करते हुए उन्हें बेहद समीप से समझते हुए! तब…

अंत मे हुआ एक साक्षात्कार स्वम् से स्वम् का, अपने वास्तविक व्यक्त्वि को स्वीकार करते हुए उसको निखारने का, मेरे मित्रो।उस समय से निरन्तर चलते हुए, जलते हुए आज मैं यहाँ तक पहुच पाया हु और अब भी मैं निरन्तर ही सत्य की दिव्य आगमी में जलता हुआ चलता जा रहा हु। वर्ष 2008 में इंद्रा गांधीयूनिवर्सिटी से 12 कक्षा का फार्म भरा और वर्ष 2013 में दिल्ली विश्विद्यालय से स्नातक की डिग्री उत्तीर्ण करि।अवसर की कमी के बाबजूद अपने कर्मो पर एक विशवास रखते हुए आपने स्नातक की शिक्षा के उपरांत 2013 में संघ लोक सेवा आयोग की कोचीन ली एव तैयारी करि।

एक आध स्नातक स्तरीय सरकारी परीक्षा का लिखित परीक्षा भी पास किया। 2016 में अपने शोषित समाज के मासूम व्यक्तिओ को कुछ राहत पहुचने की लिए अपनी अति संवेदनशील कविताओ की पुस्तक प्रकाशित करवाई। जिसका नाम एहसास है।

2016 जुलाई में प्रथम मोबाइल के साथ कम्प्यूटर पर प्रथम बार सोशल मीडिया के संपर्क में आया और 2017 से जुलाई से सोशल मीडिया एवं मेरी लेखनी बालिग वेबसाइट https://vikrantrajliwal.com के माध्यम द्वारा सभ्य रचनात्मक साहित्य के साथ; समाजिक एवं आध्यात्मिक लेखन कार्य करना आरम्भ किया। जमीनी स्तर पर भी जहाँ तक सम्भव हो सका निस्वार्थ भाव के साथ सक्रिय रहा हु।

👉 यह सब कैसे सम्पन हो पाया; मित्रो इसके पीछे एक महान भावना छुपी है और वह है मेरे माता और पिता का असीम प्रेम, अनुशाशन और विश्वास।

👉  इस कार्य के पीछे छुपी है एक महान भावना और वह है 💥 ईष्वर की असीम कृपया एवं आप सब मित्रो और गुरुजनों का असीम प्रेम एवं आशीर्वाद।

अंत मे मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि…

🕊️  यह जो चन्द पलो का सफर है न जो, किया है तय कई वर्षों में।

जलना पड़ा था जलना पड़ेगा, जलता ही जा रहा हु मैं।।

हर दर्द एक सबक बन जाता है न जो, सीखा देता है मुस्कुराना हर दर्द ओ सितम में।

बहती है जो धारा ये जीवन की, देता है सुनाई एक संगीत फिर उस मे।।

टूट जाते है छुप जाते है जब सहारे उम्मीद के सब।

निकलता है सूर्य पुकार एक सत्य से तब।।

यह जो चन्द पलो का सफर है न जो, किया है तय कई वर्षो में।

जलना पड़ा था जलना पड़ेगा जलता ही जा रहा हु मैं।। 

स्वतन्त्र लेखक/कवि-शायर/गीतकार-नज़्मकार-गज़लकार/उपन्यासकार/नाटककार/व्यंग्यकार/ब्लॉगर/सत्य अनुभवों से प्रप्त जीवन संघर्ष का एक यात्री विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित उनके जीवन से सम्बंधित एक सत्य अनुभव।🖋

मेरी लेखनी ब्लॉग वेबसाइट है।/My writing blog website is

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vikrant.rajliwala@gmail.com

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👉 91+9354948135

🖤 The Reality.

🕊️ Birds knows the principle of this world, the same person is alive here who has also shed his blood to save himself. Who’s mother, who’s father is here? The one who has power is the same mother, the same father is here.

There are a lot of bookish things in this wild world, asul, ideal is found in many examples in this world. But the truth is that the dagger is bloody in the hand and the mask on the face stands silently for shame! Friend has wealth in his pocket, his corruption flourishes in the shadows.

A Mantra

If you kill humanity, then do it in such a way that humanity itself becomes ashamed. Every evidence and witness should be your slave. Never see the truth come out! No matter whoever is in power, you should never get off the mask.

Written by Vikrant Rajliwal

Vikrant Rajliwal

🖤 हक़ीक़त।

🕊️ पंछी जानता है इस दुनिया का असूल, यहाँ वही जिंदा है जिसने खुद को बचाने के लिए अपनो का लहू भी बहाया है। कौन माँ, कौन बाप है यहाँ? जिसकी सत्ता है वही माई है वही बाप है यहाँ।

किताबी बातें बहुत होती है इस वहशियाना संसार में, असूल, आदर्श कि मिलती है मिसालें बहुत इस संसार मे। परन्तु सत्य है कि हाथ मे खंजर खूनी और चेहरे पर नकाब शराफत का लिए खामोशी से खड़ा है! मित्र है दौलत जेब मे उसकी, साए में फलता फूलता है उसके भ्र्ष्टाचार।

एक मंत्र।

करू कत्ल इंसानियत का तो ऐसे करू कि खुद इन्सानियत भी शर्मशार हो जाए। हर सबूत और गवाह खुद तुम्हारे गुलाम हो जाए। देखना सत्य कभी भी बाहर ना आने पाए! सत्ता किसी की भी हो, नकाब चेहरे से तुम्हारे कभी उतरने ना पाए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

विक्रांत राजलीवाल।

जीवन चक्रव्यूह। / Life Cycle.

💥जीवन चक्रव्यूह। (Translation in english is below.)


 ये जीवन एक रण क्षेत्र और जीवन से जुड़े प्रत्येक मार्ग जब द्रोण द्वारा रचित चक्रव्यूह के समान ही प्रतीत होते हुए, आपको प्रत्येक क्षण एक धर्म युद्ध लड़ने के लिए विवश करें! यदि आपके समीप गुरु कृष्ण के समान कोई गुरु ना हो? आपके कंधे पर वीर अर्जुन के समान गांडीव और आपके तरकश में जब कोई तीर भी ना हो?


तब अभिमन्यु के समान युद्ध करना आपकी विवशता होती है। हर साम, दाम, दण्ड और भेद से गूँजते हुए, प्रत्येक वार, प्रत्येक अत्याचार का सामना करते हुए, स्वयं को किसी प्रकार जीवित रखते हुए इस चक्रव्यूह  से निकलना एक लक्षय बन जाए। जितना आप इससे बचो उतना ही यह आपको थकाए,  जितना उलझो इससे उतना ही यह घायल करते हुए आपको द्वार के मृत्यु पर ले जाए। 


प्रारम्भ जीवन जो चक्र एक, पृथक भृम है सबके, पृथक सत्य है सबके, पृथक पृथक है भावनाए। आज भी एक मौन सत्य का खड़ा है द्वार सृष्टी पर, साथ प्रगति है, साथ है विनाश एक घनघोर साथ अपने लिए। देख कर भी अनदेखा न्याय, सत्य को जीसने किया,  विनाश सृष्टि का जो होगी एक प्रलय, कारण उसका तू उसी को जान। कारण तू उसका उसी को जान, हा कारण उसका तू  उसका…उसी को जान। 


विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।16/मई/शनिवार 2020

💥 “Life Cycle” ^Zivan Chakravyooh^
 

When this life seems like a battlefield and every path related to life, like the Chakravyuh composed by Drona, force you to fight a dharma “War of Divine Path” war every moment, if there is no Guru like Guru Krishna near you?  Gandiv like Vir Arjun on your shoulder and when there is no arrow in your quiver?  


Then you are forced to fight like Abhimanyu.  Every object, price, punishment and distinction, every attack, every torture, keeping themselves alive somehow, it becomes a goal to come out of this cycle.  The more you avoid it, the more it exhausts you, the more it entangles, the more it injures you and takes you to the death of the door.  


The cycle of life, which is one, separate earth, is the true truth of all, is separate and separate.  Even today, a silent truth stands at the door, with progress, with destruction, with a pouring for oneself. Seeing undiscovered justice, resurrected the truth, the destruction of the world will be a catastrophe, because you know him only.  The reason you know him only, yes, the reason you know him… know him only.  


Written by Vikrant Rajliwal.16/may/Saturday 2020 (If there is an error in translation, then I apologize)

विक्रांत राजलीवाल।

निवास स्थान है पाताल लोक अभी हमारा। (छंद काव्य) विक्रांत राजलीवाल।

निवास स्थान है पाताल लोक अभी हमारा, नाम अज्ञात है पता लापता अभी हमारा।

मोह माया है मिथ्या जगत जो समस्त ये अनन्त हमारा, लक्ष्य मोक्ष है साधना तप तपस्या, उद्देश्य जीवन का हमारा।।

हर कदम है व्यहू चक्र से पीड़ित अभी हमारा, तूणीर रिक्त है  बाणों से, साथ शत्रु की छाया, कोटनीति छल कपट, ये जीवन की विपरीत धारा।

अश्रु अध्रु समाए स्वयं में, रक्त देह का खोलता हमारा, धैर्य धर्म चोटिल जो न्याय परीक्षा, अटल युद्ध है सुनिचित, धर्म जीवन का हमारा।।

विजय पराजय, परिणाम न्याय का, दंड मृत्य, क्षमा सौभाग्य, सत्य ज्ञान स्थापित धरा पर, अस्तित्व रहे सुरक्षित, धर्म मानवता का हमारा।

विक्रांत राजलीवाल।

हर्ष उमंग, जीवन की ऊर्जा, प्राण वायु, शीतल जल, रहे संतुलित,   चक्र धरा का, पवित्र चेतना, जीवन जो हमारा।।

शत्रु मित्र, साथी जो पग पग, शत्रु कुटिलता, मित्र विशवास, अक्स दर्पण में पृथक पृथक दिखाई सत्य के आए, रहे स्मरण एक भाव भातृत्व का सदियों पुराना जो हमारा।

देह जीवन, ऊर्जा जीवित अंतरात्मा, ध्यान वही जो सत्य दिखलाए, ज्ञान वही जो स्वयं से मिलाए, मिथ्या मृत्य, मिथ्या जीवन, मिथ्या एहसास समस्त, धरा मृत्यु पर, स्थिर है मिथ्या, स्थिर है अस्तित्व जो हमारा।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

प्रकाशित तारीख 9 महीना मई वर्ष 2020

समय रात्रि 9:10 बजे

🌹 दर्द दिल का उत्तर गया। (ग़ज़ल) विक्रांत राजलीवाल।

दर्द दिल का उत्तर गया, हर अल्फ़ाज़ में मोहब्ब्त कोई खामोशी सी साथ अपने लिए।

हर जख्म भी आतुर है बिकने को, नाम ए मोहब्ब्त वो नाम महबूब का कर दिया बदनाम सरेराह, हर अश्क़ भी मेरे बन गए, खुद एक मोहब्ब्त की कोई दास्ताँ।।

ये कलम धड़कती है मेरी, हर धड़कन से एक शोर सा उठ जाता है मेरे।

दिल के बाजार में ये दीवाना, जब गीत कोई मोहब्ब्त का अपना गुनगुनाता है।।

बिकने को उतर आया बाजार में, सीने से लगाए तस्वीर ए यार, तड़प गए हर ज़ख्म दिल के मेरे, मोहब्ब्त भी सरेराह हमारी नीलाम हुई।

विक्रांत राजलीवाल।

कोई कहता है शेर सुनाओ, तो कोई कहता है दास्ताँ ए मोहब्ब्त अपनी हमे भी बतलाओ, हो गया मजबूर ये दीवाना, ज़िंदगी भी हमारी खुली किताब हुई।।

हर लम्हा हम उन्हें याद करते गए, जाम ए लहू वो लहू जिगर का अपने पीते गए।

महफ़िल महफ़िल नाम मोहब्ब्त का लेते गए, नज़रों में मोहब्ब्त के एक गुन्हेगार, हम गुनाह जो करते गए।।

गुज़र गए ना जाने ज़माने कितने और ना जाने मौसम भी कितने आ आ कर बीत गए।

हर दर्द बन गए ज़िंदगी का सबक कोई, हर आह भी आहे भरती रही, ज़ख्म टूटे एहसासों से टूट कर बिखर गए मेरे, जिंदगी भी हालत पर मेरे जब हँसती रही।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

प्रथम प्रकाशित तारीख 9/महीना मई/वर्ष 2020/समय सुबह 9:30 बजे।

एक सत्य अनुभव।

एक सत्य अनुभव।

जब एक 16 वर्षीय बालक सुधार के मार्ग का महत्व महसूस करते हुए उस पर चलने का निर्णय करता है। उस समय उसकी वह छवि जिसके साथ वह अपना जीवन व्यतित कर रहा था एकदम से बदल जाती है और उसको एक अंजाने भय से भयभीत करते हुए तोड़ कर रख देती है।

उस समय उसके समस्त जानने वाले उसके इस सुधार के मार्ग को अपनाने या उसे उस पर चलते हुए देख कर, जो वास्तव में उसकी वास्तविक मनोस्थिति से एकदम अंजान होते है उसे अपने अपने तरीके से दुत्कार या अस्वीकार कर देते है क्यों कि उस सुधार के मार्ग से एक छवि हमेशा आपके समुख अपने होने का एक एहसास आपको अत्यंत ही समीप से करवाती है और वह छवि होती है आपके जीवन का वह समय जिससे आहात होकर उस बालक ने यह अत्यंत ही जटिल और दुर्गम मार्ग को चुना।
यह मार्ग इतना जटिल और दुर्गम क्यों होता है? क्योंकि आपके व्यक्तित्व में वह ज्ञान और जीवन ऊर्जा नही होती है जो आपको आपकी वास्तविक मनोस्थिति से परिचित करवा कर, उसका समाधान उपको प्राप्त करवा सके। 
अंत मे इतना ही कहना चाहूंगा कि फिर भी जो दृढ़ संकल्प व्यक्तित्व के व्यक्ति अपने व्यक्तित्व के सुधार हेतु प्रयत्नशील रहते है वह एक दिन अवश्य ही स्वयं के वास्तविक व्यक्तित्व या जिसको आज कल हम रियल पर्सनैलिटी कहते है को प्राप्त कर जाते है।

यदि मैं स्वयं के विषय मे कहु तो मुझ को  15 या 16 वर्ष की आयु में अपने व्यक्तित्व ने अनेको अनेक प्रकार के दोष दिखाई दिए; जिनमे से कुछ शारीरिक दोष थे तो बहुत से मानसिक दुष्विचार के दोष थे। आज लगभग 20 वर्षो के उपरांत भी मैं अपने उस निर्णय पर एक विश्वाश बनाए रखने का प्रयत्न करते हुए स्वयं के व्यक्तित्व को स्वयं के प्रति दुर्विचारो एवं दुर्व्यवहारों से मुक्त करने हेतु पर्यासम्य हु।


विक्रांत राजलीवाल।

4/05/2020 समय प्रातः 11:00 बजे।

क्रोना से बचाव हेतु एक प्रयास।/An attempt to rescue Krona. Film by Vikrant Rajliwal

Film by Vikrant Rajliwal


जैसा कि आप सभी प्रियजनो को ज्ञात (पता होना) है कि क्रोना एक अत्यंत ही हानिकारक वायरस है। इसलिए आप सभी को इस अत्यंत ही हानिकारक वायरस “क्रोना” से बचाव हेतु लॉक डाउन के साथ ही कुछ सावधानियों का पालन करना अत्यंत ही आवश्यक हो जाता है जैसे कि…

1) बार बार हाथ धोना। किसी भी साबुन से आपको 20 सेकंड के लिए हाथ धोना है।

अन्य जनों के प्रति भी आपकी कुछ नैतिक जिम्मेदारी बनती है जैसे कि…

2) छींकते एवं खांसते समय रुमाल का उपयोग अवश्य करें।

यदि आप स्वयं को पूर्णतः स्वास्थ्य महसूस कर रहे है तब भी आप को अपने स्वास्थ्य को स्वस्थ्य रखने हेतु घर पर ही कुछ आसन एवं प्राणायाम अवश्य करे।

यदि अत्यधिक आवश्यक हो तब ही घर से बाहर जाए।

उपयोक्त सावधानियों का पालन करते हुए हम सब इस क्रोना नामक अत्यधिक हानिकारक वायरस को मात देते हुए इस पर विजय पताका फहरा सकते है।

जय हिंद।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

23 अप्रेल 2020 समय सांझ 6:40 बजे।

Translated

As you all know (to be aware) that krona is a very harmful virus.  Therefore, it becomes extremely important for all of you to follow some precautions such as lock down to prevent this very harmful virus “Crona”.

1) Washing hands frequently.  You have to wash your hands for 20 seconds with any soap.

You also have some moral responsibility towards other people like …

2) Must use handkerchiefs while sneezing and coughing.

Even if you feel yourself completely healthy, you must do some asanas and pranayam at home to keep your health healthy.

Go out of the house only if necessary.

By following the above precautions, we can all defeat this highly harmful virus called Crona and hoist it.

Jai Hind.

Thank you.

Written by Vikrant Rajliwal.

23 April 2020 time 6:40 pm

रहे आबाद ये दुनिया। (ग़ज़ल) *एक नए शेर के साथ।* With #FacebookLive और YouTube recorded video.

रहे आबाद ये दुनिया। (ग़ज़ल)

रहे आबाद ये दुनिया। (ग़ज़ल)

आज के इस कठिन और जटिल दौर में अपनी पूर्व प्रकाशित एवं अपलोड कविता 💥 भय मुक्त क्रोना से। के बाद अब इस बढे हुए लॉक डाउन के अत्यधिक जटिल समय मे मैंने यानी कि विक्रांत राजलीवाल ने एक और जनजागरूकता से पूर्ण जंजागृक ग़ज़ल रहे आबाद ये दुनिया। (ग़ज़ल) को जंजागृक करने के लिए लिखी और कल रात को 12:55 बजे अपनी ब्लॉग वेबसाइट https://vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित (छाप ) कर दी है।

और fecbookLive के जरिए एक सकरात्मक वार्ता या बातचीत के साथ आपके लिए अपलोड कर रहा हु। यदि मेरी यह ग़ज़ल अपने जंजागृक अभियान में अंश मात्र भी सही साबित हो पाई तो यकीं मानिएगा मैं खुद को बहुत ही ख़ुशनसीब मानूंगा।

विक्रांत राजलीवाल।

रहे आबाद ये दुनिया। (ग़ज़ल) एक नए शेर के साथ।

एक नया शेर।

डर जाता है हर शख्स, सुनते ही आज कल नाम क्रोना, दिखता अक्स मौत का है खतनाक बहुत ये क्रोना।

रहे महफूज़ ये दुनिया। (ग़ज़ल।)

रहे महफूज़ ये दुनिया, घरों में रोक लो दुनिया, बचा लो खुद को क्रोना से, रहे आबाद ये दुनिया।

घिर आई घटा है जो, जहरीली जहरीली, दम घोट देगी वो, धड़कने रोक देगी वो, हो कर दूर दुनिया से, बचा लो ये दुनिया।।

वो खुली हवा, वो आज़ादी, जल्द ही लौट आएगी, देखना एक रोज़ जीत जाएगी, ये रुकी हुई दुनिया।

यकीं खुद पर रहे कायम, हँसी-मुस्कुराहट से होगी रौशन, हरा क्रोना को, ये हसीं दुनिया।।

ये कैसी हो चली दुनिया, संक्रमण से क्रोना के, अब डरने लगी ये दुनिया।

सांस लेते, कहि जाते, छूने से भी देखो, अब डरने लगी ये दुनिया।।

ये कैसी अनहोनी आ गई, यह सोच सोच, अब मरने लगी ये दुनिया।

कहि भूखे मरते गरीब, कहि जान खरते में, कहि दूर अपनो से, फंसी हुई ये दुनिया।।

ये दुनिया है जो ये दुनिया, हरा हर संक्रमण को, देखना जी जाएगी ये दुनिया।

एहसास मोहब्ब्त का, रहे कायम हमेशा, साथ अपनो से, महक जाएगी ये दुनिया।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

17 अप्रेल शुक्रवार रात्रि 12:55 बजे।

पुनः प्रकाशित एक नए शेर के साथ। 17 अप्रेल शुक्रवार दोपहर 1:45 बजे।

मेरी लेखनी ब्लॉग वेबसाइट है।
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