जशन है फ़िज़ा में, दिल ये उदास, ढूंढता है अब भी,

कदमो के बेगाना, अपने जो निसान।

हालात ए ज़िन्दगी, ये ख़ामोशी है क्यों, भूल गया जो लम्हा,

वो ये नही।।. ..लेखन द्वारा विक्रांत राजलिवाल।
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