FB_IMG_1496674038744.jpgबदला मौसम, बदली फ़िज़ाय, बदल गया ये जहाँ सारा,

बदला ना मिज़ाज़ ऐ इश्क, हैं इस दिल-धड़कनो में

जो सदियों पुराना

धड़कती हैं धड़कन, तो धड़कता हैं दिल, धड़क जाता हैं

ये जहाँ सारा

आती हैं याद समन की, भूल जाता हैं धड़कना, ये दिल हैं

बेबस हमारा

आलम हैं मदहोशी का, कोई महक सी सासो में हैं समाई

देख कर हुस्न मद-मदस्त वो उनका,

दर्द-दिल, रग रग में हैं महोबत , खुमारी सी हैं कोई समाई

देख रहे हैं चाँद को ,पलको से हैं, जो वो छुपाये

घिर आई घटा फिर कोई

रेशमी जुल्फे है, जो उन्होंने लहराई

बरस रहा अमृत कोई, गुलाबी लबो से उनके

जल रहा दिल-दीवाना,हर कातिल अदा से उनके

हो जाता हैं क्यों बे-हाल ए दिल, नही नादाँ जब ये इश्क

है मेरा

चलते हैं तीर मदहोश-निगाहों से, ये दिल तड़प जाता

हैं मेरा

सच ही कहते हैं आशिक वो दीवाने, खेल नही कोई

असां, ये हैं महोबत,
दरिया हैं धधकती एक आग का, और जलते ही जाना हैं,

जलते ही जाना हैं बस जल जाना हैं. ..

लेखन द्वारा✍विक्रांत राजलीवाल।

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