FB_IMG_1497325258190हमारा ब्रह्माण्ड अनेक प्रकार के रहस्यों को अपने में समाय हुए हैं।और इस ब्रह्माण्ड के रहस्य अनेक प्रकार के आचर्यो से परिपूर्ण हैं। उन रहस्यो या आचार्यो की कलपना भी कोई साधारण मनुष्य मष्तिक नही कर सकता। परन्तु फिर भी कुछ होनहार मस्तिक उन तमाम अदभुत ब्रह्माण्ड के रहस्यों में से किसी ना किसी रहस्य का फर्द फाश करने की भरपूर कोशिश करते हुए अनेक प्रकार के प्रमाण जाहीर करते हैं।

क्या वो प्रमाण सौ प्रतिशत सत्य होते हैं? कई बार वो स्तय होते हुए भी सत्य नही लगते। साधारण मस्तिष् कहे या व्याकूल मस्तिक जिनकी संख्या अमूमन ज्यादा ही होती हैं। उन्हें वो तथ्य या प्रमाण ,केवल काल्पनिक ही मालूम होते हैं। क्या वो पूरी तरह गलत हो सकते हैं? या उन साधारण से प्रतीत होते हुए मष्टिक्ष की सोच के पीछे कई असाधारण सोच छुपी हूँ… खैर, कई बार हम सबी ने भी देखा हैं कि आज जो प्रमाण स्तय हैं कुछ समय उपरांत कोई और ज्ञानी पुरुष उसे असत्य साबित करते हुए एक न्य प्रमाण तथ्यों के साथ जग जाहिर कर देता हैं।

हमारा मस्तिक्ष कई बार आने तथ्यों को सुलझाये बिना ही परिमाण घोषित कर देता हैं। दरअसल मानव मस्तिक्ष हैं क्या? कही इसमें भी कम्प्यूटर की भांति केवल *data*तथ्यों का केवल संग्रह मात्र ही तो नही?

हमारी दुनिया में कई होनहार, जिज्ञासा से परिपूर्ण मस्तिक्ष मौजूद हैं। परंतु फिर भी अगर कोई ज्ञानी मस्तिक्ष
कोई गलती कर दे तो क्या यह पूरी तरह उसी का दोष हैं?

आखिर यह गलत जानकारी या गलत*d ata*तथ्य उस मस्तिक्ष में आया कहा से? कही यह तो नही कि किसी चालक मस्तिक्ष ने यह गलत तथ्य उसने transfer या लोड कर दिया हो? और खुद सामने आये बिना ही अपना प्रयोग उस के द्वारा करवा रहा हो?।खैर जो भी हो।

मैं आपसे पूछना चाहूंगा कि अगर कोई दूषित मस्तिक्ष आपके सामने आ जाये तो क्या..?
किसी को तो इस दूषित मानव मस्तिक्ष साफ्टवेयर का तोड़ ढूँढना ही पड़ेगा। पर कैसे ?
दरअसल यह एक दूषित सॉफ्टवेर होते हुए भी एक प्रकार का *वायरस*होता हैं।

जी हा आज से नही बल्कि अनादि-काल से मनुष्य के पास ऐसे -ऐसे एंटी वायरस या तोड़ मौजूद है जिंकी कल्पना भी कोई साधारण मस्तिक्ष नही कर सकता।

आज के संदर्भ में बात करे तो आज का मस्तिक्ष खुद को कुछ ज्यादा ही *fast* तेज समझने की भूल करता जा रहा हैं। और उन तमाम एंटी-वायरसो को नकारते हुए
फिजूल का मैंने लगा हैं।

आखिर क्या हैं ये एंटी-वायरस? और यह काम कैसे करता हैं?

इसका जवाब छुपा हैं अधयातम में, जी है अपने सही ही सुना। अधयातम ही एक मात्र ऐसा जरिया हैं जिसके द्वारा हम उन तमाम दूषित मस्तिक्षो का इलाज करते हुए उनके
दूषित हो चुके सॉफ्टवेर को अध्यात्म के एंटी-वायरस द्वारा सुधारा जा सकता हैं।

फिर भी आज का तेज मस्तिक्ष उन सभी आधात्मिक साफ्ट-वेयरो को नकारते हुए नित्य नये प्रयोग करता जा रहा हैं।

कई बार सिथिति बेहद ही भयानक रूप धारण कर लेती हैं।और कोइ एंटी-वॉर्स भी फिर ढंग से कम नही आ पता।
फिर उन तमाम दूषित मस्तिक्षो को सॉफ्ट वेयर मैकेनिक यानि मस्तिक्ष सुधार गृह*mental hospital*भेजा जाता हैं। परन्तु अक्सर लोग रिपेयर हुयी वस्तु को शंखा कु नज़रो से देखते आये हैं।तो क्या?

मस्तिक्ष की भी बड़ी अजीब दुनिया हैं साहब। मेरी नज़रो में वह मानव मस्तिक्ष बड़े हे निराले होते है जो बिना वायरस के या गड़बड़ी होने पे अध्यात्म के एंटी वायरस से काम चला लेते हैं।

आज कल नित्य नयी खोज हो रही हैं।और वो नयी चीज नयी न होते हुए भी बहुत ही प्राचीन होती हैं।

कई बार कुछ अपने में कुछ विद्वान् मस्तिशो को हम अक्सर कहते सुनते है कि यह बात या यह अधयातम का सॉफ्ट-वेयर बेकार हैं।या यह तो महिला मस्तिक्ष का सॉफ्ट वेयर हैं।
क्या हमें ये बात मन लेनी चाहिए की महिला मसितक्ष और पुरुष मशिक्स भिन -भिन होते हैं।और उनका सॉफ्ट वेयर अलग -अलग ढंग से कम करता हैं?या प्रकृति ने उन्हें अलग -अलग ढंग से बनाया हैं।यह तो कोरी कल्पना हैं साहब।

सदियों से पुरुष मस्तिक्ष ने महिला मस्तिक्ष को अपने से शीर्ण या छोटा ही समजा हैं।
क्या एक मस्तिक्ष केवल लिंग के द्वारा उच्च या निम्न हो सकता हैं?

देखा जाये तो आज पुरुष मस्तिक्ष कुछ हैरान हैं और परेसान सा हैं आखिर क्यों?

क्यों की आज महिला मस्तिक्ष ने अपने को हर क्षेत्र में साबित केर के दिखा दीया हैं। और उन्होंने यह साबित कर दिया हैं कि उनका सॉफ्ट-वेयर किसी भी प्रकार से किसी भी पुरुष मस्तिक्ष सॉफ्ट-वेयर से कम नही।

आज महिलाये नित्य नये इतिहास रच रही हैं।*क्यों की अगर कोई गलती होती हैं तो दोष किसी मस्तिक्ष जा नही
होता बल्कि उस सॉफ्ट-वेयर का होता हैं जो उसे चलता हैं। दोष उन आकड़ो का होता है जो उसमे जब-अनजाने लोड हो जाते हैं।

आज जिस प्रकार से महिला मस्तिक्ष ने अपने सॉफ्ट-वेयर का इस्तेमाल कर के दिखया हैं और जो इतिहास रचे हैं
उससे यह साबित हो गया हैं कि अगर हम अपने मस्तिक्ष का सही इस्तेमाल करे तो हर किसी को अपने मस्तिक्ष के सॉफ्ट-वेयर पे गर्व हो जायेगा।

इसी प्रकार से ब्राह्मण और मस्तिक्ष के राज भला की पूरी तरह से कोई हल कर पाया हैं नही दोस्तों अभी तो केवल शुरुआत मात्र हैं।

आज हमें एक ऐसे मानव मस्तिक्ष सॉफ्ट-वेयर की आवश्यकता हैं जो आने वाली पीढ़ियों को नैतिकता, मानवता,और समानता की नेक राह पे चला सके।

और उस मानवता से परिपूर्ण साफ्ट-वेयर के ऊपर कोई भी वायरस अपना कार्य न कर सके।तभी हर एक मस्तिक्ष खुद को स्वस्थ्य और ताज़ा महसूस कर पायेगा।

आज की युवा पीढ़ी को चाहिए कि वह भविष्य के लिए ऐसे ही युवा मस्तिक्ष तैयार करे। और यह हर एक ज़िमेदार व्यक्ति की ज़िमेदारी हैं दोस्तों।

अगर ऐसा हो पाया तो वः दिन दूर नही जब कोई मस्तिजस खुद को हिन् और असहाय समझ-ने की भूल नही करेगा। और इस सम्पूर्ण ब्राह्मण पे केवल सुशासन का एक छत्र राज होगा!!!

आखिर वह दिन कब आएगा!!!कब आएगा… ?

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

Universe and the mascot. (Translate by help of
google tools)

Our Universe has set a variety of mysteries in its own right. And the mysteries of this universe are full of various types of mysterious. Any ordinary man can not do any magic or magic of mysterious. But still some promising masters declare a variety of proofs while trying hard to trap the secret of some of the mysteries of all the supernatural universe.

Are those proofs are 100 percent truthful? Many times they are not true even when they happen. Normal brain or paralytic masters whose numbers are usually more frequent. They know that fact or proof, only imaginary. Can he be completely wrong? Or seemingly ordinary, I have hidden many extraordinary thinking behind the thinking of the peas … Well, many times we all have seen that the proofs are today, some time later some other knowledgeable men prove it a false and a new The world reveals with evidence facts.

Our motivation often declares quantities without coming to the conclusion of the facts. What are the human masks? Is it not just a collection of only * data * facts like computers?

There are many promising and curious masters in our world. But even if some knowledgeable mind
If you make a mistake then is it completely the fault of him?

After all, did this wrong information or false * d ata * come in that math? Is it anyway that a driver’s brain has made this wrong fact that he has transferred or loaded? And without being able to come in front of himself, doing his own experiment by him? Whatever is happening.

I would like to ask you if there is any contaminated miscarriage that comes in front of you ..?
Anybody will have to find a break from this malicious software software. but how ?
Actually it is a type of * virus * even when it is a corrupted software.

Yes, is not from today, but from time immemorial, such an anti virus or break is available to humans, even imagination can not do any ordinary design.

In today’s context, today’s masters are forgetting to think of themselves as something more fast * fast. And refusing all those anti-viruses
I have fizzled out

What are these anti-viruses? And how does this work?

The answer is hidden in the supernatural, it is true that you have heard it right. The only way through which we are able to treat all those maladies is their priority.
Corrupted softwares can be improved by anti-virus of spirituality.

Yet today’s sharp masters are constantly using new experiments, rejecting all the physical softwares.

Sometimes the status takes on a very horrible form. And any anti-war also does not come down again.
Then all those corrupt minds are sent to soft ware mechanics ie mental health *. But often people have come to see the repaired objects with a smile. So what?

There are also big strange world of maushak sahab. In my eyes, the human mammals are very large, without any viruses or disturbances, they work from the anti-virus of spirituality.

Today, there are regular new discoveries today. And those new things are very old even when they are not new.

Many times we hear some of our scholars say that we are often saying that this thing or the soft-ware of this supernatural is useless. Or this is the soft ware of women’s brain.
Should we have to understand that women’s teachers and men’s machics are bad and they soften their soft ware differently? Or nature has made them differently.It’s a fantasy, sir .

For centuries, man’s masculature has understood the female masculature from its own or small.
Can a masculine be high or low only by gender?

If you see, men’s masks are somewhat shocked today, and why are they paralyzed?

Why today the woman’s mascot has shown herself to prove herself in every field. And he has proved that his soft-ware is not less than any male masti soft-ware.

The women today are creating new history. * Why if there is a mistake then the blame will not go away
It is rather soft-wired that it moves. The blame is of those figures that when unknowingly it loads.

The manner in which women’s masks have shown using their softwares and have made history
It has proved to him that if we use our brains properly, then everyone will be proud of the soft-ware of our masters.

In the same way, there is absolutely no solution to the rule of Brahmin and Mastak, but friends are still only beginning.

Today, we need a human brain softwire that can run the next generations on the good path of ethics, humanity, and equality.

And no virus on its surface could be able to do its work on the right hand ware.

The younger generation of today wants to prepare such a young mood for the future. And this is the responsibility of every responsible person.

If this happens, then the day is not far when no Mastijas will forget their Hindus and helpless-will not forget them. And on this entire Brahmin will be the rule of good governance only !!!

After all, when will that day … When will it come…? Written by Vikrant Rajliwal.

#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s#

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