FB_IMG_1496982003398.jpgसुबह सवेरे जाग के जल्दी , होता हैं साक्षात्कार
नयी सुबह, नया सवेरा भरता हैं देह-प्राण

सब-से पहले,नाम-ईशवर,नश्वर हैं बाकि ये संसार
रग-रग में जग जाए उमंग, करो न अब विचार

योग-प्रयाणं, धयान,करो,लेके प्रभु का नाम
नयी सुबहे, नया सवेरा भरता हैं देह-प्राण

खुश-हाली के संस्कार हे ये, आत्म-शांति का ज्ञान
माँत-पिता, एक वो ही ईशवर,तुम लो अब उसको थाम

सचाई के मार्ग पे आगे, चलो हमेशा बढ़ते
राह-शूल हो या कंकर पथर, या हो आग का दरिया

कर लोगो तुम पार भी उसको,पर न करना अभिमान
छोटे -बड़े, सब लोगो का करना हमेशा सम्मान

सुबह सवेरे जाग के जल्दी होता हैं साक्षात्कार
नयी सुबहे,नया सवेरा भरता है देह प्राण. ..

लेखन द्वारा ✍विक्रांत राजलीवाल।

#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s#

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