🎻तन्हा महोबत.. .💌

रात है चाँद से, धड़कनो में एक तन्हाई।
छुप गया है, सनम मेरा, काले इन बदलो में कही।।

दर्द ए दिल, दे रहा पुकार, सुनने वाला कोई नही।
खता जो हो गयी यार से, माफ़ करने वाला कोई नही।।

कत्ल दीवाने का हुस्न ने, बहुत ही मासूमियत से किया।
बिना खंज़र, जख्म दिल-धड़कनो
नज़रो को मदहोश अपनी, फ़ेर कर दिया।।

असूल ए महोबत, वफ़ा के सिखलाए नही जाते।
वफ़ा ए महोबत, सनम से है
बिना मतलब हक उस पर नही जताते।।

महोबत है ऐतबार ए सनम,जान भी जिस पर
निछावर कर देगा दीवाना।

रुसवाई है बगावत एक जिस मे,बन्द लबो को भी
सी देगा दीवाना।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

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