FB_IMG_1498494656233लगी हो आग-जहनुम जब चारो और,ये दिल शायराना कैसे फिर हो जाये

रेशमी जुल्फों और शराबी निगाहों से, क्यों ये दिल घायल हो जाये

गिर रहे हैं नज़रो में अपनी जब, दास्तान ऐ इश्क महोबत कैसे हम दोहराये

एक तरफ हैं आलम ऐ बेबसी, मुफलसी में गीत-गजल कैसे हम गाये

जी रहे हैं सहते हुए सब ज़ुल्मो-सितम,हाथ ,वो अपनों के
दीवाना फिर कैसे ,हँसे और मुस्कुराये…लेखन द्वारा ✍विक्रांत राजलीवाल।

My second ready to published book is based on nazam-shayri hart-broken Love stories… coming soon.(शेयर करे)

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