कर गुस्ताखी ए दिल, धड़कनो से कोई अपने
हर धड़कन यहाँ, साथ ज़िन्दगी छोड़ने लगी है।

न देख मुड़ के दोबारा, अक्स बिछुड़े को अपने
ये वख्त श्याही यहाँ, अब मिटने लगी है।

न कर कोशिश, हालात ये नसूर है अपने
हर दवा ज़िन्दगी यहाँ, बेमतलब से है।

कर ले नया, फिर कोई समझौता बेगाने
हर यक़ीन अहसास यहाँ, आजमाए हुए है।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

# Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s #

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