FB_IMG_1499008594319न देख भर के, महोबत झूठी, मदहोश अपनी इन निगाहों में

भरा है दामन, जख्मो से ये मेरा

वाकिफ है हर चल-हुस्न से, नादां नही ये इश्क मेरा

असूल ए महोबत, वफ़ा सिख ला देती है

करती है महोबत, जब कोई बेवफ़ा

चीर के दिल-धड़कने, अपने दीवाने को बर्बाद करती है

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

Hindi Poetry, Shayari & Story
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