न बेचना ए वक़्त नसीब अपना कभी,किसी गैर के हाथ।
चला जायेगा,मार के ठोकर,पड़ा है कदमो में जो नसीब,किसी गैर के पास।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल

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