ज़िन्दगी की मन्ज़िले है हिमालय से उच्ची,
राह-दरख्तों से टकरा कर, रुक न जाना।
चमक-चांदनी है तेरी सितारों से रौशन,
देख अंधेरा, ये रात काली घबरा न जाना।।

लेखन विक्रांत राजलीवाल।

Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s

Advertisements

Leave a Reply