वो मुझ-से अंजान तो न थे।
मेरी हर एक सास, वो ही तो थे।।

ज़िन्दगी हर लम्हा, एक उनका इंतेज़ार क्यों है।
वो आए नही, शायद भूल गए हमको,
हर एक मेरी धड़कन, एक कसक के साथ क्यों है।।

उनकी वो यादे, ये ज़िन्दगी एक इम्तेहान क्यों है।
वो हक़ीक़त नही, दर्द ये अहसास हमको
हर सितम मेरी आरज़ू, एक दीदार उनका साथ क्यों है।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

Ek kasak

Wo muz-se anjaan toh na thhe
Meri har ek sas wo hi toh thhe

Zindagi har lamha, ek unka intezaar kyu hai
Wo aae nhi, shayad bhul gye humko
Har ek meri dharkan, ek kasak ke sath kyu hai

Unki wo yaadein, ye zindagi ek imtehan kyu hai
Wo hakikat nahi, dard ye ahsaas humko
Har sitam meri aarzo, ek deedar unka sath kyu hai

Lekhan dwara Vikrant Rajliwal

#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’s#

 

 

 

 

Advertisements

Leave a Reply