ऐ यार बाट दो गम अपने हमे, हम भी है दर्द ए गम, अपनो के शिकार।
मुस्कुरा दे, ये सितम गुनाह तो नही, हर दर्द से छुपाए है दर्द जो तमाम।।

चले गए, साय जो तन्हा छोड़ कर, नादानियां ये गुनाह तो नही।
दिखाता है हर दर्द नज़दीक से आईना, ये जख्म ताज़ा जो अब नही।।

 

खफ़ा है दर्द क्यों मुझ-से ये मेरा साया,
दफ़न है साए से जो मुकदर, वो मेरा नही।

अहसास है वीरान ज़िन्दगी, ये अपनो के बीच
मुलाक़ात है खुद से, ये ज़िस्म ये रूह मेरी नही।।

 

ये नादानियां, ये दीवानापन, नया तो नही
ये आहट, ये खामोशियो यहाँ सदियो से है।

वक़्त की बिसात, ये चाल उलझी सी कोई
वॉर धड़कनो पर मेरे, तड़प ये अपनी सी है।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल

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