उड़ गए हर अक्षर यादो की किताब से लम्हा लम्हा।
याद हैं अब भी मगर, याद वो तेरी हर लम्हा लम्हा।।

दिल की किताब पर, टूटती धड़कनो से लिख दिया जो लहू से अपने,
अश्क लहू नाम वो तेरा, तड़पती रूह, ज़िंदा जिस्म से अब, हर लम्हा लम्हा।

रुसवाई ये महोबत, टूटती धड़कने, जख्मी ये दिल, दीवाने का तेरा,
बेपरवाई ये बेरुखिया, ये जुल्म तेरा, कत्ल ए दीवाना हर लम्हा लम्हा।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

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