Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Jul 29, 2017
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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अहसास-ज़िन्दगी।

कभी कभी मेरे दिल में एक ख़याल आता है।
दिल धड़कनो को वह हर पल बेहद सताता है।।

हर घड़ी एक इम्तेहां ये जिंदगी, इतनी कठोर क्यों है।
माया मोह से जंजाल, ये जिंदगी, इतनी लाचार क्यों है।।

कभी तन्हाई, तो कभी जलसा ये ज़िन्दगी, इतनी बेवफ़ा क्यों है।
खुशबू बहारो की, ये प्यास रेगिस्तानों की, ये ज़िन्दगी इतनी संगदिल क्यों है।।

जो भी हो, ये ज़िन्दगी, ये धड़कती-धड़कने, ये तड़पती सासे, जान ये ज़िन्दगी, ये पहरा सासो पर, इतना प्यारा क्यों है।

हर एक सास, एक कर्ज, ये अहसास अपनो का, हर पल हर अहसास एक दुआ, ये सितम ज़िन्दगी, इतना प्यारा क्यों है।।

लेखम द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

Hindi Poetry, Shayari & Story Article’swriterpietvikrantrajliwal-

 

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