Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Jul 29, 2017
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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चाहत।

दर्द ए दिल,जख्म वो अपना, तकलीफ़ से सरोबार हो गया। मुस्कान चेहरे पर अब भी है उसके, उसकी एक मुस्कान से दर्द-दिल, दर्द दीवाने का झलक गया।

ये बेबसी, ये तड़प, ये दामन मेरा, आँसुओ से सरोबार हो गया। चाहत सीने में मेरे, अब भी घायल, उसकी एक आह से आह ए दिल, दिल दीवाने का अब फ़ना हो गया।।

लेखन द्वारा विक्रान्त राजलीवाल।

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