रौशन है चाँद सितारों से, गुलिस्तां ये ख्वाबो का मेरा।
महक है मदहोशी सी कोई, खिलती कलियो सा ख्वाब मेरा।।

सकूं ये रूह, नही है वीरान, आबाद ये गुलिस्तां ख्वाबो का मेरा।
खोए अरमान, जागती ख्वाहिशो सा, ये गुलिस्तां ख़्वाबो का मेरा।।

दफ़न हर खामोशिया, जख़्म-जख़्मी-अहसासों के जहा, गुलिस्तां वो ख्वाबो का मेरा।
ज़हर हर यक़ीन, नासूर वो ज़ख्म, मरहम हर जख्मो पर मेरे, गुलिस्तां वो ख्वाबो का मेरा।।

कर यक़ीन, नही ख्वाब कोई, एक तम्मना ये ज़िन्दगी, गुलिस्तां ये ख्वाबो का मेरा।
हर आरज़ू, एक हक़ीकत जहा, गम आए ज़िन्दगी से दूर, गुलिस्तां ये ख्वाबो का मेरा।।

लेखन द्वारा विक्रांत राजलीवाल।

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