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मेरे द्वारा लिखित मेरा प्रथम हिंदी गाना।(re-post after some edit by me)

मेरे द्वारा लिखित मेरा प्रथम हिंदी गाना। उम्मीद करता हु आप सब को पसन्द आए।(re-post after some edit by me)

(सिन है एक प्रेमी युगल बिछुड़ रहा है या बुछुड़ जाते है। और प्रेमी या प्रेमिका एक दर्द भरी पुकार से करहा उठते है।)

रुक रुक रुक रुक रुक रुक ए हवा।
सुन सुन सुन सुन सुन सुन… तू सदा।।

महोबत को तेरी भुला न सकेंगे।
न जिंदा रहे सकेंगे, न हम मर सकेंगे।।

दर्द ए दिल, तुझ से दुआ हम करेंगे।
आईने में दिल के, तुझ को ढोंढा करेंगे।।

रुक रुक रुक रुक रुक रुक ए हवा।
सुन सुन सुन सुन सुन सुन… तू सदा।।

आ आ आ आ आ आ ए दिल-रुबा।
न जा जा जा जा जा जा तू है कहा।।

यादो को तेरी मिटा न सकेंगे।
न मिल हम सके तो, जला करेंगे।।

जुदाई से तेरी तड़पा करेंगे।
जख्म दिल के अपने कुरेदा करेंगे।

रुक रुक रूल रुक रुक रुक ए हवा।
सुन सुन सुन सुन सुन सुन… तू सदा।।

जख्मो को दिल के, सी न हम सकेंगे।
न दवा हम करेंगे, न उनको भर सकेंगे।।

फिज़ाओ में सुनी, तन्हाइयो में अक्सर।
यादो में अपनी, दुआओ में अक्सर।।

तड़प ए दिल, दिल की, गहराइयो में फिर भी मिला हम करेंगे…ए दुआ।
जागती आखो से अपने, अधूरे ख्वाबो में फिर भी, तुम को देखा करेंगे…ए दुआ।

रुक रुक रुक रुक रुक रुक ए हवा।
सुन सुन सुन सुन सुन सुन…तू सदा।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Seen hai premi bekhud rhe hai, ja fir bekhud jate hai.or premi dard se pukar uthta hai.

Ruk ruk ruk ruk ruk ruk ae hwa
Sun sun sun sun sun sun tu sda

Mahobat ko teri bhula n sakenge
Na jinda rhe sakenge, na hum mar sakenge

Dard ae dil, tuz se duwa hum karenge
Aaine me dil ke, tuze dunda karenge

Ruk ruk ruk ruk ruk ruk ae hwa(ya duwa)
Sun sun sun sun sun sun… tu sada

Aa aa aa aa aa aa ae dilruba
Na ja ja ja ja ja ja tu hai kha

Yado ko teri mita n sakenge
Na mil hum sake to tuta krenge

Judaai se teri, tadpa krenge
Jakhm dil ke kureda krenge

Ruk ruk ruk ruk ruk ruk ae hwa
Sun sun sun sun sun sun… le sda

Jakhmo ko dil ke, si n hum sakenge
Na dwa hum krenge, n unko bhr sakenge

Fizao me suni, tnhaaio me aksar
Yado se apni, duwao me aksar

Tadap ae dil, dil ki, gheraio se Fir bhi mila hum krenge…Ae dua
Jagti aakho se apane, adhure khwabo me fir bhi , tum ko dekha karenge…Ae dua

Ruk ruk ruk ruk ruk ruk ae hawa
Sun sun sun sun sun sun tu sda

Vikrant Rajliwal dwara likhit

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Published by Voice Of Vikrant Rajliwal ( My Writing, My Blogs & My Voice)

💥Spiritual communicator, Motivational Speaker, Author, Writer, Poet And Thinker. विक्रांत राजलीवाल। (समाजिक कार्यकर्ता, कवि, शायर, नज़्मकार, ग़ज़लकार, गीतकार, व्यंग्यकार, लेखक एव नाटककार-कहानीकार-सँवादकार) 1) एहसास प्रकाशित पुस्तक (published Book) : अत्यधिक संवेदनशील काव्य पुस्तक एहसास, जिसका केंद्र बिंदु हम सब के असंवेदनशील होते जा रहे सभ्य समाज पर अपनी काव्य और कविताओं के द्वारा एक प्रहार का प्रयास मात्र है। Sanyog (संयोग) प्रकाशन घर शहादरा द्वारा प्रकाशित एव ए वन मुद्रक द्वरा प्रिंटिड। प्रकाशन वर्ष जनवरी 2016. प्रकाशित मूल्य 250:00₹ मात्र। 2) My Site: Vikrant Rajliwal Url address: vikrantrajliwal.com वर्ष 2016-17 से अब तक सैकड़ो दर्दभरी नज़्म, ग़ज़ल, बहुत सी काव्य-कविताए एव कुछ व्यंग्य किस्से, कुछ एक गीतों के साथ बहुत से विस्तृत समाजिक, आध्यात्मिक एव मनोवैज्ञानिक लेखों के साथ कई प्रकार के सामाजिक एव आध्यात्मिक विचार लिख कर अपनी साइट पर प्रकाशित कर चुके है। एव दिनप्रतिदिन कॉप्के प्रेमस्वरूप नित्य नई रचनाओँ का लेखन एव प्रकाशन जारी है। एवं स्वम् की कई नज़्म कविताओं एव लेखों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद कर चुके है। 3) Youtube channel: Vikrant Rajliwal पर मेरे द्वारा लिखित मेरी समस्त रचनाओँ जैसे प्रकाशित पुस्तक एहसास से अति संवेदनशील काव्य- कविताए, और मेरी निजी लेखनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित मेरी सैकड़ो नज़्म, ग़ज़ल और बहुत सी काव्य, कविताओँ एव्यंग्य किस्सों को मेरे स्वयं के स्वरों के साथ देखने और सुनने के लिए मेरे YouTube चैनल को अभी Subscribe कीजिए। 👉 आगामी रचनाएँ (Upcoming Creation's) : अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर सक्रिय अति विस्तृत दर्दभरी नज़्म दास्ताँ श्रृंखला "दास्ताँ" के अंतर्गत चौथी एवं अब तक लिखी गई अंतिम अति विस्तृत दर्दभरी नज़्म दास्ताँ "मासूम मोहब्ब्त" प्रकाशित करि जाएगी। जल्द ही अपनी ब्लॉग साइट vikranrajliwal.com पर अपनी कुछ लघु कहानियों का प्रकाशन का कार्य प्रारंभ करूँगा। 👉 साथ ही मैं वर्ष 2016 से एक अत्यंत ही दर्दभरा जीवन के हर रंग को प्रस्तुत करती एक सामाजिक कहानी, एक नाटक पर कार्य कर रहा हु। 💥 इसके साथ ही शायद आप मे से बहुत से महानुभव इस बात से परिचित नही होंगे कि मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल वर्ष 2003-04 से नशे से पीड़ित मासूम व्यक्तियों के लिए निःस्वार्थ भाव से सेवा करता आ रहा हु एव स्वम भी कई प्रकार के जटिल उतार चढ़ाव के उपरांत एक शुद्ध रिकवरी को प्राप्त कर सका हु। यदि आप मुशायरे या कवि सम्मेलन के आयोजक है और आप मेरी सैकड़ो दर्दभरी नज़्म ग़ज़ल शायरी या काव्य कविताओं के द्वारा मेरे कार्यक्रम को बुक करते है तो यकीन मानिए इस प्रकार से आप अपना एक अनमोल योगदान उन मासूमो के लिए सहज ही प्रदान कर सकते है। क्योंकि मेरी कला के कार्यक्रम से होने वाली 100% कमाई नशे से पीड़ित उन गरीब एव बेबस मासूमो के इलाज लिए समर्पित होगी। जिन्होंने अपना जीवन जीने से पूर्व ही नशे के आदि बन कर बर्बाद करना शुरू कर दिया है या बर्बाद कर चुके है। 😇 समाज सेवा: स्वमसेवी नशामुक्ति कार्यक्रम के तहत नशे की गिरफ्त में फंसे नवयुवको एवं व्यक्तियों को एक स्वास्थ्य जीवन को जीने के लिए प्रेरित करता आ रहा हु। स्वमसेवी संस्थाओं एवं स्वयम से जन सम्पर्को के माध्यम द्वारा निशुल्क सेवा भाव से वर्ष 2003 से अब तक। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। मेरासंपर्क सूत्र नीचे अंकित है। My Whatsapp no: 91+9354948135 (Translated) One service and one collaboration Hello Friends, Many of you may not be familiar with the greatness that I have been serving my self-indigenous friends Vikrant Rajliwal with selfless service for innocent people who have been suffering from intoxicants since 2003-04. After a complex fluctuation of type, I could get a pure recovery. And if you are the organizer of mushere or poet conference or you can book my program with my hundreds of painful najm ghazal shayari or poetic poems and also in your program, believe that in this way you have a valuable contribution They can easily provide for those innocent people. Because 100% earnings from my program will be dedicated to the treatment of those poor and unemployed innocent people who have started wasting or wasted by becoming addicted to drugs before living their lives. Name: Vikrant Rajliwal Published book: एहसास (a highly sensitive poetic book inspired by social and humanitarian values) published by Sanyog publication house shahdara. Which was also showcased at the Delhi World Book Fair in the same year 2016. 🎤 Upcoming creations: The story of my fourth and last nazam tales written so far. And a play, a painful story presenting every run of life. 😇 Social service: Swamsevy has been promoting the life of the youth and all the people trapped under the influence of intoxicants as a drug addiction program. Free service charges through Swamsevy institutions from 2003 till now. Thank you Vikrant Rajliwal Hometown: Delhi. The contact form is displayed below. My Whatsapp no: 91 + 9354948135 प्रिय पाठकों एव मित्रजनों, यह है अब तक का मेरे द्वारा सम्पन्न एव आगामी लेखन कार्य, जो आप सभी प्रियजनों के प्रेम एव आशीर्वाद से शीघ्र अति शीघ्र ही सम्म्प्न हो अपने वास्तविक स्वरूप को प्राप्त हो जाएगा। आप सभी प्रियजन अपना प्रेम एव आशीर्वाद अपने रचनाकार मित्र विक्रांत राजलीवाल पर ऐसे ही बनाए रखे। धन्यवाद। विक्रांत राजलीवाल।

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