एक डर, खामोश ये खोलते अहसास अपने! जिंदा है धड़कने, बे-आवाज सी, ये धड़कती, जो जिंदगी।

एक मौत, अहसास ये ज़हर ए ज़िन्दगी! लम्हा है एक कायम, अहसास ये कब्र से झाँकती जो ज़िन्दगी।।

एक खेल, खुद से खुद के यक़ीन का! बाजी है ये अनहोनिया, अनहोनियों से लहूलुहान, जूझती ये ज़िन्दगी।

एक सवाल, जवाब ये लहू ए जिगर अपना! जख़्म है हर सास, जिंदा ये जिस्म में, हर लम्हा मरती ये ज़िन्दगी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

10 August 2:57pm
#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’swriterpoetvikrantrajliwal-#

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