FB_IMG_1502530295498कर गए नज़र-अंदाज़ वो, फेर के मदहोश नज़रो को अपनी।
ज़ला दिया दिल ए दीवाना, कातिल हर अदा से जो अपनी।।

कर के कत्ल निगाहों से दीवाने का मदहोश, मुस्कुराता हैं हुस्न बेबाक।
छोड़ के तन्हा बेपरवाई से, ज़ख्म ए दिल, बेदर्दी दे जाता हैं हुस्न बेबाक।।

दिखती नही राह कोई, बच के निकल जाये जो दीवाना।
हर राह हैं सनम से मेरी, बच के कैसे, गुज़र जाये दीवाना।।

आशिक है महोबत से उनकी, घायल जो मेरे अरमान।
देखा हैं नूर ए हुस्न का जलवा, कातिल हैं उनकी हर चाल।।

घायल अरमानो से हैं ख़्वाब कई
हर ख्वाब में रहती हैं वो, मेरी जान।

हर अदा होती हैं हुस्न की संगीन।
करता हैं मुलाकाते अक्सर,
ख्यालो में उनसे दीवाना, अपने रंगीन।।

कहते हैं आशिक पुराने, रोग ए महोबत है सदियों पुराना।
चलता हैं तीर निगाहों से, बेबस हो जाता हैं दीवाना।।

कर के नज़र-अंदाज़ ज़माने की रुस्वाइया।
खड़ा हैं चोखट ए सनम, ले रहा जो नाम ए महोबत,
थाम के धड़कता-दिल अब भी उनका दीवाना।।

💔 रुख से पर्दा, अपने हटा दे, चाल ये कोई नही
मरता हैं तेरे नाम से, अब भी तेरा दीवाना. ..

👤 विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।
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