Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Aug 15, 2017
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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एक दीवाना।

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🎻कोई कहे पागल, कोई कहे दीवाना
दोष नही ये ज़माने का,
ये दील ही धड़कनो से अपने बागी है।

🎼 ये चाँद ये सितारे लगते है, ख़ामोश से क्यों आज।
ये मौसम ये तन्हाई शोर है, इन फिज़ाओ में क्यों आज।।

❤ टूक-टूक करती है जो घड़ी, रुक जाएगी एक दिन।
The clock, which stops the clock, will stop one day.

❣धोखे है जो जमाने में, उन-को, नज़र-अंदाज़ कर दो।
आ जाए पहेलु में जो ऐतबार से,
यक़ीन महोबत का, उन-पर अब कर लो।।

🗿सुन कर आवाज़ आत्मा की अपने, रुक पाना अब आसान नही।
राह-सच्चाई मंजिल वो अपनी, पीछे अब हट पाना आसान नही।।🐬

✍विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’swriterpoetvikrantrajliwal-#

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