Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Aug 15, 2017
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

no comments

एक दीवाना।

FB_IMG_1502634136117🕊
🎻कोई कहे पागल, कोई कहे दीवाना
दोष नही ये ज़माने का,
ये दील ही धड़कनो से अपने बागी है।

🎼 ये चाँद ये सितारे लगते है, ख़ामोश से क्यों आज।
ये मौसम ये तन्हाई शोर है, इन फिज़ाओ में क्यों आज।।

❤ टूक-टूक करती है जो घड़ी, रुक जाएगी एक दिन।
The clock, which stops the clock, will stop one day.

❣धोखे है जो जमाने में, उन-को, नज़र-अंदाज़ कर दो।
आ जाए पहेलु में जो ऐतबार से,
यक़ीन महोबत का, उन-पर अब कर लो।।

🗿सुन कर आवाज़ आत्मा की अपने, रुक पाना अब आसान नही।
राह-सच्चाई मंजिल वो अपनी, पीछे अब हट पाना आसान नही।।🐬

✍विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’swriterpoetvikrantrajliwal-#

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: