Author, Writer, Poet, Drama and Story Writer Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

August 15, 2017
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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भृष्ट व्यवस्था से रोता गरीब।

FB_IMG_1502481726828FB_IMG_1495674788325आज जब भी अपनी नज़रो को उठा कर अपने आस पास के सामाजिक माहौल को देखता हूँ! तो पीड़ा की हैरानी से आँखे फ़टी और धड़कने कुछ कटी कटी सी ज्ञान होती है।

आप सोच रहे होंगे ऐसा क्यों? तो मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि ऐसा क्यों न हो! जब भी कोई व्यक्ति भ्र्ष्टाचार की अग्नि में झुलसता हुआ और अपने भाग्य को कोसता दिखाई देता है।

और उस की उस असहनीय पीड़ा की अनदेखी कर कोई अपना ही उस की मजबूरी की पीड़ा से सुलगती हुए अग्नि से अपनी रोटी सेकता है तो वाक्य में इस निर्दयता से पूर्ण व्यवहार पर हैरानी की पीड़ा से आँखे फ़टी और धड़कने कुछ कटी सी ज्ञान होती है।

ओर दिल से निकलती है एक आह!!!

चाहे वो अपना अपने ही देश का कोई भृष्ट सरकारी बाबू हो या कोई भृष्ट नेता ?

👓 खा गया मेरे देश को, देश के गरीब को वो भृष्टाचरी बाबू, वो भृष्ट नेता।

उड़ाया है मख़ौल गरीब का, उसकी मजबूरी का,

कर के वादा झूठा, दिखाया था जो सपना,

आया दर्पण में नजर सचाई के, था वो भृष्टाचरी

बाबू, वो नेता झूठा।

🇮🇳 15 अगस्त, स्वतन्त्रता दिवस का यही हो संकल्प, हो जाए स्वाह विचार सब भृष्ट। चल पड़े काफ़िला, विकास का, हर मजबूर से गरीब से मिला, मजबूती से कदम से कदम।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

#Hindi Poetry, Shayari & Story Articleswriterpoetvikrantrajliwal#

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