FB_IMG_1503411114391रात की तन्हाई से, ये दिल धड़क जाता है।
मिलने को सनम से, ये दीवाना मचल जाता है।।

बेचेनी का आलम लिए, नज़र सुनी नज़रो में, तस्वीर उसकी दिख जाती है।

हर अदा मासूम, वो नज़ाकत महोबत भरी, दर्द-बेदर्दी मुझको, आज भी बेहिंतिया रुलाती है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

#Hindi Poetry, Shayari & Story Article’swriterpoetvikrantrajliwal-#

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