कुचल दो हर एक बाधा-विरोधी, विरोधि-हर साए को, बढ़ा कदम विशवास से आगे, कुचल दे मलिन मर्यादा को!

जी सके, तो जी लेना तू, मार न जाना बीच रास्ते,
देख रही है उमंग-जिंदगी, राह तेरी बाह अपनी पसारे!

विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

#Poetry, Shayari, Story & Article’s with writer poet vikrant rajliwal-#FB_IMG_1503510145255.jpg

Advertisements

Leave a Reply