FB_IMG_1503510060493रिश्ते होते है साथ निभाने का नाम,
हाथो में थामे हुए महोबत के जाम ।

 

बर्दाश कर सके जो, सितम अपनो के,
दर्द हर धड़कन से, तड़पने का नाम।।

 

गुजरता है हर एक रिश्ता, हर लम्हा, एक नए इन्तहां से,
परख-तराजू एक बेबसी, कत्ल अहसासों का नाम।

हर इम्तेहां, हर लम्हा, कराता है महसूस, एक नया फिर कोई इम्तेहां,
टूटे आईने से, टूटा सा अक्स, खामोश अहसासों
से एक बग़ावत का नाम।।

 

परत धूल से, मलिन ये रिश्ते, महक गुलाब से, हसीन ये रिश्ते।

दगा-ज़िन्दगी, मजबूर ये रिश्ते, साथ अपनो से, जिंदा ये रिश्ते।।

 

बनाने वाले ने बना दिया रिश्ता, अपनी हर एक आरज़ू के साथ।

निभाने वाले ने रखा सलामत, हर दर्द, हर रिश्ता, एक कसक के साथ।।

विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

#Poetry, Shayari, Story & Article’s with writer poet vikrant rajliwal-#

 

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