🇮🇳 एक सोच-एक बदलाव…💥

🕊आज के भ्र्ष्टाचार और भावना हीन होते जा रहे हमारे समाज में हर कोई जागरूक और शोषित व्यक्ति एक बदलाव की मांग कर रहा है। अगर हम बदलाव चाहते है। एक सकरात्मक बदलाव। जिस के कारण हमारे समाज से हर प्रकार के भ्र्ष्टाचार का अंत हो सके! तो उसकी शुरुआत सबसे से पहले हमे खुद से ही करनी होगी।

जिस दिन संसार का प्रतेक व्यक्ति यह संकल्प धारण कर लेगा के आज और अभी से ही वह अपने अंदर कुछ सकरात्मक बदलाव या खुद को सामाजिक बनाने के लिए खुद पे कार्य करना आरंभ करेगा। और वह किसी भी प्रकार के शोषण को बर्दाश न करते हुए उसका शांति और अहिंसा से पुर जोर शक्ति के साथ विरोध करेगा। तो उस दिन से जरूर एक सकरात्मक बदलाव हमारे समाज में खुद व् खुद आ जायेगा। जैसे से की आप सभी ने यह तो सुना ही होगा 1+1=2 ठीक उसी प्रकार जब एक एक व्यक्ति जागरूक होता जायेगा, तो हम सब जल्द ही एक ऐसे समाज का निर्माण कर पाएंगे जहाँ कोई भी व्यक्ति बेबस और शोषण का शिकार नही बन पाएगा।

इसकी शुरुआत हमे सबसे पहले खुद से ही करनी होगी। तो दोस्तों सबसे पहले हमें खुद को बदलना हैं फिर दुसरो को! यह रास्ता कोई सरल या कठिन नही हैं यहाँ बात हैं खुद में एक सकरात्मक बदलाव की। यह बात हैं ईमानदारी की, यह बात हैं हर प्रकार के शोषण और अत्याचार से मुक्ति की! इसके लिए हम सब को अभी से अपने जीवन में कुछ सकरात्मक और सामाजिक बदलाव लाने की अति आवश्यकता है।

👉क्यों की शिकायत या शिकवा करने से नही बनते हैं कोई काम,

चलना पड़ता हैं राह सत्य पे, हाथ सचाई का थाम।
जय हिंद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

#Poetry, Shayari, Story & Article’s with writer poet vikrant rajliwal-#(शेयर करे)FB_IMG_1503595629346.jpgFB_IMG_1503506637358.jpg

Advertisements

Leave a Reply