🕊सच्चा नाम।

💥करता हूँ महसूस आत्मा से अपने, अस्तित्व उस ईष्वर का, दिखता हैं राह तन्हा जीवन मेँ जो ज़िन्दगी को ज़ीने का

नही छोड़ता थाम के हाथ, चाहें भूल ही क्यों न जाये, नादाँ उसको आज का स्वार्थी इंसान

हर रूप मेँ उसका ही है अस्तित्व, राम कहो या कहो उसे तुम रहीम
बिन मांगे ही करता हैं दुआ हर पूरी,राम वो रहीम

जल जाता हैं ह्रदय ज्ञान का दीप, करो न देरी आ जयो अब तुम उसके समीप…

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।(शेयर करे)

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