💘दर्द ए तन्हाई।

रात की तन्हाई में, एक शोर सा मच जाता हैं।

धड़कता हैं दिल जोरो से, याद जब वो आता हैं।।

 

मचलती हैं ख्वाहिशे अधूरी, कोई आग सी जिस्म में लग जाती हैं।

बेचैनी का आलम लिए,याद बिछुड़े यार की तन्हा मुझे कर जाती हैं।।

 

दीख जाता हैं अक्स ऐ यार, सुनी नज़रो से ख्यालो में अक्सर।

बह जाते हैं अश्क, दर्दे ऐ दिल फिर उलझे से सवालो में अक्सर।।

 

न दिया हैं न रौशनी बाकी कोई, अंधेरा जो दामन खाली में मेरे।

रहे गये हैं निसान बाकी, जख़्मी-दिल, जो दामन ख़ली में मेरे।।

 

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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