FB_IMG_1505406336141.jpgएक विद्यार्थी जिसे अब भी अपनी पाठशाला की तलाश शेष है।
गुरु ज्ञान और गीता से जिसका रूबरू होना अभी शेष है।।

हो गया जो लापता, बिसात ए वक़्त, घायल जो राही, राह अनजाने पर एक,
टूटी जो तस्वीर, धुंधलाता-अस्तित्व, उखड़ती सासो से, थमना जिंदगी का अभी शेष है।

हर जो ठोकर, अहसास ए दर्द, रुक गया धड़कनो का अहसास हर-एक,
उम्मीद जो जिंदगी, तड़पती-रूह, सकूँ धड़कनो से धड़कनो का, ये जिंदगी अभी शेष है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

#Poetry, Shayari, Story & Article’s with writer poet vikrant rajliwal-#

 

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