ये मासूम चेहरा, उस-पर दर्द महोबत का, अश्क ये चेहरे
पर जो कमसिन, हाल ए दिल सुनाते है उसका, ये सुनहरे निसान।

कर दिया कत्ल दीवाने का, ये दर्द नही असां, अब पोछ भी लो, अश्क-महोबत के चेहरे से मासूम अपने, बेदर्द ये सुनहरे निसान।।

रचनाकार विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

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