Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Oct 3, 2017
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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नसीब।

होती है हर पहचान मुसाफ़िर, वक़्त नसीब से जिंदगी में अपने।
हर कदम है मन्ज़िल, सफ़र सदियों से तन्हा, साथ अब भी जो अपने।।

जिद है जनून ये जिंदगी, ये दौड़ता लहू, फड़कती रगों में अपने।
हर बून्द है श्याही, बग़ावत ये लहू, अब भी रगों में जो अपने।।

विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।FB_IMG_1506966591895

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