FB_IMG_1506106273340खुशनसीब होते है वो राह ए मुसाफ़िर, सफ़र ए जिंदगानी में, साथ संघर्ष हर कदम, जिनके ए साथी।

हर एक सवेरा, लाता है एक नई रोशनी, लिपटीअहसासों से, चिंगारी कोई, बेदर्द साथ जो अपने ए साथी।।

चक्रव्यूह नही अभिमन्यू सा, तोड़ न सके, कोई जिसे, विशवास सासो में तेरे ए साथी।

तीर है अर्जुन सा, भेद लक्ष्य, निकल जाएगा, साथ न हो कोई चाहे तेरे, तन्हा ए साथी।।

विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

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