धड़का धड़का कर रोक दी तुम-ने, हर धड़कती, ये जो धड़कने।
धड़कते धड़कते, धड़कना ही भूल गयी, धड़कती ये जो धड़कने।।

धक धक धक धड़कती है धड़कती ये जो धड़कने।
धड़कनो में शायद तुमको ढूंढ़ती है ये जो धड़कने।।

धड़कनों का धड़कना, याद महबूब की बिछुड़े, हर अश्क़ नाम ए महबूब, छुपा रही है खुद से धड़कने, बेवफ़ा है ये जो धड़कने।

धड़कनो का टूटना, अक्स महोबत का वो अधूरी, धड़कनो से छुपा लिया, दर्द ए दिल, क़ायम है धड़कने, बेवफ़ा नही है ये जो धड़कने।।

धड़कती हर धड़कन, एक रोज़ ख़ामोश हो जाएगी।
धड़कती-धड़कनो से धड़कने-महबूब की, महोबत जब खुद मिट जाना चाहेगी।।

धड़कती हर धड़कन, उस रोज़ खुद ही रोक देगा दीवाना।
धड़कती धड़कनो को और धड़का कर, चिर के दिल रोक देगा धड़कने खुद अपनी दीवाना।।

FB_IMG_1507106506071रचनाकार विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

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