20171017_235748लहू ए ज़िगर, चाहती है एक बग़ावत, हर एक जंजीर बांधे जो गुलाम को गुलामी से…हर एक एहसास दबाए है जुल्मों-सितम, दास्तां ए मौत, एहसासों की अपने, ख़ामोश अपने एहसासों से!

रचनाकार विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

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