FB_IMG_1509262766088.jpgआह ये दिल की मेरे, ए सितमगर, तुझ-को भी, तड़पायेगी।

पर्दे छोड़ जमाने के सारे, तू भी पहेलु में, जब मेरे आ-जायेगी।।

अहसास ये दिल-हर-धड़कन, है महोबत, अहसास-दिल-हर धड़कनो का तेरे,

तड़प ए दिल, है आरज़ू-महोबत, चाह कर भी, दिल से कभी, अपने मिटा न पाएगी।

हर लम्हा, ये तन्हाई, इंतेज़ार है दीदार ए सनम, हो जाएगा, दीवाने को जब भी तेरे,

कसक ए महोबत, है इश्क-दीवाना, तड़प इस दिल की, तुझ को भी, एक रोज़ तड़पायेगी।।

भूल जाएगी, खुद को, सुन धड़कने-दीवाना,
क़दम शोले पर रख, सामने जब तू आएगी।

मिलेंगे राह ए शूल, निसान ए दिल, वो दीवाना
हर शूल से, दफ़न-दिल-दीवाना, जब तू पाएगी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
# Poetry, Shayari, Story & Article’s with writer poet vikrant rajliwal-#

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