Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Oct 31, 2017
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

no comments

अधूरी-धड़कने।

FB_IMG_1509289727270.jpgहोती है मुलाकात, ख्वाबो में ख्वाबो से अपने ए गुलाब, रंगीन तुझ से जो ख्वाब अपने आजकल।
हर ख्वाब है जिंदा, ख्वाबो में अब भी ख्वाब जख्मी कई, हर जख़्म-नासूर है ख्वाब जो अपने आजकल।।

गर कर गए है जो तन्हा, धड़कने-लहू-जिगर से नाम ए महोबत, जुल्म वो जालिम अदाओ से अपने आजकल।
हर जख़्म है एक जुल्म-हक़ीक़त का टूटा-आईना, दर्द ए दिल, लहूलुहान जो ख्वाब अपने आजकल।।

दफ़न है तम्मना, एक फ़रियाद बाकी, नूर ए नज़र, दीदार ए हुस्न वो तेरा, ख्वाबो में अब भी अपने आजकल।
परत है खरोच कोई, धड़कनो पर मेरे, बदल गयी जो सूरत ए यार, ख्वाब फ़रेबी जो अपने आजकल।।

ये इश्क है महोबत, फड़कती हर नब्ज से, झलकती आरज़ू, महक सासो में सासो की, ख्वाब अब भी कई अधूरे बाकी, जो अपने आजकल।

एक तड़प है महोबत, महोबत का महोबत से, इज़हार ए महोबत, निसान धड़कनो से धड़कनो का अधूरा एक, ए हुस्न ए गुलाब, ख्वाबो में जो अपने आजकल।।

रचनाकार विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: