Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Oct 31, 2017
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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अश्क़!

ये मासूम चेहरा, उस-पर दर्द महोबत का, अश्क ये चेहरे
पर जो कमसिन, हाल ए दिल सुनाते है उसका, ये सुनहरे निसान।

कर दिया कत्ल दीवाने का, ये दर्द नही असां, अब पोछ भी लो, अश्क-महोबत के चेहरे से मासूम अपने, बेदर्द ये सुनहरे निसान।।

रचनाकार विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

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अश्क़!

ये मासूम चेहरा, उस-पर दर्द महोबत का, अश्क ये चेहरे
पर जो कमसिन, हाल ए दिल सुनाते है उसका, ये सुनहरे निसान।

कर दिया कत्ल दीवाने का, ये दर्द नही असां, अब पोछ भी लो, अश्क-महोबत के चेहरे से मासूम अपने, बेदर्द ये सुनहरे निसान।।

रचनाकार विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

Ashk!

Ye masum chehara, us-pr dard mahobat ka,
Ashk ye chehre pr yo kamsin, hal ae dil, sunate hai uska, ye sunhare nisan.

Kar diya katal deewane ka, ye dard nhi asan,
Ab poch bhi lo, ashk mahobat ke chehare se masum apane, bedard ye sunhare nisan.

Rachnakar Vikrant Rajliwal dwara likhit.

FB_IMG_1509289740424.jpg

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