FB_IMG_1509262520640.jpgकर गुस्ताखी ए दिल, धड़कनो से कोई अपने
हर धड़कन यहाँ, साथ ज़िन्दगी छोड़ने लगी है।

न देख मुड़ के दोबारा, अक्स बिछुड़े को अपने
ये वख्त श्याही यहाँ, अब मिटने लगी है।।

न कर कोशिश, हालात ये नसूर है अपने
हर दवा ज़िन्दगी यहाँ, बेमतलब से है।

कर ले नया, फिर कोई समझौता बेगाने
हर यक़ीन अहसास यहाँ, आजमाए हुए है।।

रचनाकार एव लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

# Writer & Poet Vikrant Rajliwal Poetry, Shayari & Article’s #
View on wordpress Test print…अहसास।

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