FB_IMG_1508907295169.jpgदिल की किताब पर, लिख दिया जो धड़कनो से अपने

उन शब्दो को, ज़िन्दगी, ज़िंदा एक नई आवाज अब देंगे।

भूल गया, जो तराने, ये ज़माना, खामोश अल्फाज़ो से अपने,

उन खामोशियो को, लव्ज़, दहाड़ती एक नई गूंज, अब देंगे।।

छु लेंगे आसमां, मग़रूर सितारों को भी झुका देंगे।

हर दरिया, वो आग का, कदमो से अपने बुझा देंगे।।

नसीब वो आरज़ू आखरी, खुद को जिंदा अब जला देंगे।

छुपी वो बग़ावत जिसमे, उन शोलो को अब भड़का देंगे।।

वक़्त चाहे ठहर भी जाए, हर चाल वो लम्हा बेगाना,

ठोकर से अपनी, जादू हक़ीक़त का, आईना दिखा देंगे।

हर नव्ज़, हर धड़कनो का धड़कनो से कुछ बतलाना,

नक़ाब चेहरे से, बन्दिशें धड़कनो से अपनी, अब हटा देंगे।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

 

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