हो गया हैं फ़ना, एक दीवाना जो कहि
सनम से अपने, बिछुड़ जाने के बाद।

बिखर गयी हैं चाहते, अश्क जख्मो पर कहि
टूट गयी सासे, दिल उसका टूट जाने के बाद।।

हो गया है दफ़न, परत में समय की जो कही
रह गए निसान ए इश्क, उसके चले जाने के बाद।

जल गयी है चिता, मायूस-अरमानो की उसके जो कहि
एक अहसास ये जुदाई, ये चीखती तन्हाई, उसके खो जाने के बाद।।

एहसास है धड़कनो को, खामोश धड़कनो का, ज़ुल्म धड़कनो पर उसके जो कहि
सो गया जो मुसाफ़िर, राह ए महोबत, अपनी लूट जाने के बाद।

चाहत हैं ज़िन्दगी, मजबूरी अब भी ये महोबत, चल रही जिंदगी जो कहि
उखड़ रही जो सासे, एक दर्द बन्द सीने में कहि, धड़कने
उसकी रुक जाने के बाद।।

रचनाकार विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

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