ज़हर जड़ों में, वृक्ष का अपने, कर दे फलो को नष्ट जो अपने, वृक्ष बेचारा फिर क्या करे।

भर दे जहर फलो में जो अपने, भूख-प्यास, राही की फिर अपने, ए वृक्ष, तृष्णा कैसे मिटे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

 

 

 

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