FB_IMG_1509799484015.jpgए वख्त सुना दे, तू ही दीवाने को अब।

क्या है अंजाम ए हकीकत, उसकी अब।।

देखे थे ख्वाब मासूम जो कभी, टूट हए है वो अब।

रह गया है तन्हा, तनहाई में, तन्हा मर गया है वो अब।।

ज़ी रहा है रूसवा, अहसास ए रुसवाई , ज़माने में वो अब।

कर रहा है फ़रियाद, बेरुखों से, खुद से जल गया, है वो अब।।

ज़िन्दगी की थी चाह एक, हुए दीदार ए मौत जो

हक़ीक़त ए ज़िन्दगी से अपनी, तड़प गया है अब वो…

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Ahsass Ae Hakikat

Ae wkht tou hi bta de deewane ko ab

Kya hai anjaam ae hakikat uaski ab

Dekhe thae kwaab, masum jo kabi, tuat gye hai

wo ab

Rhe gya hai tanha, tanhaai mai, tanha mar hai

wo ab

Zee rha hai ruswaa, ahsaas ae rushwaai,

zamane mae wo ab

Kar rha hai freeyad, berukho se, khud se jal gya,

hai wo ab

Zindagi ki thie ek chah, huye jo deedar ae moat,

Hakikat ae Zindagi, se apni, tadap gya hai, wo ab. ..

Rachnakar Vikrant Rajliwal dwara likhit.

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