FB_IMG_1509784233319.jpg👉क्यों आज भी इस देश के मासूम बच्चे अपनी मासूम उम्र में फुट-पाथ पर कूड़े के ढेर पर तंगहाली में अपनी जिंदगी जीने के लिए मजबूर है! जिस उम्र में उनके हाथों में विद्यालय की पुस्तके होनी चाहिए, उस उम्र में उनके कमजोर हाथों की हथेलियो में गरीबी और तंगहाली के निशान छाले बन कर उभर पड़े है। क्या उन के इस हालात के जिमेदार कही न कही हम ही तो नही!

👉कहा है इस देश के काबिल और जिमेवार नेता। क्यों उनको ऐसे मासूम बच्चे और उनकी तंगहाली नज़र नही आती या वो इस और ध्यान ही देना नही चाहते! जब देश का भविष्य समझे जाने वाले ये मासूम बच्चे खुद ही से धुंधले पड़ जायँगे तू इस देश-दुनिया में वो निर्मल उजाला कहा से आएगा जिसकी हर भारतीय को एक उमीद है…जय हिंद।

✍विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। *(शेयर करे)

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