तेरी याद में ए सनम, चिर के दिल लहू अपना बहा दिया।

तोड़ के धड़कती हर धड़कन, नाम तेरा मिटा दिया।।

आई न याद ए महोबत, दीवाने की जो तुझे, याद में तेरी उसने रौशन हर चिराग बुझा दिया।

देखता है वक़्त भी होकर के मजबूर, दीवाने ने इंतेज़ार में तेरे, वक़्त ए इंतेज़ार मिटा दिया।।

खड़ा है कब्र पे तन्हा जो अपनी, जख़्म ए दिल, ए महोबत, वो तेरा दीवाना।

बेवफाई ये बेरूखी तेरी, रुस्वा ये जिंदगी, तड़पता है हर लम्हा वो तेरा दीवाना।।

मातम ये खामोशिया, ज़लज़ला अब भी है कायम, खामोश धड़कनो में, जिंदा जो मेरी।

क़त्ल है ये लम्हा, क़यामत अब भी है कायम,
ज़हर ए नफ़रत, मदहोश नज़रो में, जिंदा जो तेरी।।

रचनाकार विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

Mahobat.

Teri yaad me ae sanam cheer ke dil laho apna bhha diya,

toad ke dharakti har dharkan, naam tera mita diya

Aai na yaad ae mahoobat,deewane ki jo tuze,Yaad me teri, uasne rooshan har chirag bhuja diya

Dekhta hai wkht bhi hokar ke majboor, Deewane ne intezaar me tere, wkht-intezaar mita diya

Khdha hai kaber pe tanha, jo aapni, jkham ae dil, ae mahobat, wo tera deewana

Bewafaai ye berukhi teri, ruswa ye zindagi, tadpata hai har lamha wo tera deewana

Matam ye khamoshiya, jaljala ab bhi hai kayam, khamosh dharkano me, jinda jo meri

Katal hai ye lamha, kayamat ab hai kayam, jahar ae nafart, madhosh nazro me, jinda jo teri

Rachnakar Vikrant Rajliwal dwara likhit

 

#Writer & Poet Vikrant Rajliwal’s Poetry, Shayari & Article’s-#

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