Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Nov 30, 2017
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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सोचता हूं अक्सर तन्हा अँधेरी रातो में…

FB_IMG_1509779868593याद हैं अब भी गुजरा वो ज़माना, देखा था खोया अक्श नज़रो में उनकी, अपना वो वर्षो पुराना

रात थी वो चाँद की,आशिक था महोबत से उनकी
यह सारा ज़माना

रहता था उफ़ान धड़कनो में जब मेरे, बजता हो साज कोई,
जैसे सासो से मेरे

उनकी हर एक अदा अब भी हैं याद मुझ को

वख्त बे वख्त वो इतराना, तीर शराबी निगाहों से चलाना

अब तक हैं याद मुझ को

वो मौसम, वो सर्द रात, वो थी मेरी तन्हाई की बात,
साया था पीपल का एक मेरे साथ, वो थी उनसे-जुदाई की रात

अब तक हैं याद मुझ को

देखी थी राह ए सनम, धड़कती हर धड़कन के साथ
वो आये नही, देने को दीवाने का अपने जो साथ

निकलती थी एक आह, गुजरते हर लम्हे के साथ
आलम था बेदर्द बहुत, आया था जो एक बेबसी के साथ

खड़ा हैं दीवाना राह ए सनम, साए से अपने लिपट कर,
खो गयी राह ए मन्ज़िल, एक दर्द, वो महबूबा किसी गैर के साथ

वख्त गुजरा, समा गुजरा, गुजर गया वो जमाना
चली गयी थाम के हाथ, देखता रह गया दीवाना,
वो किसी गैर के साथ

अब तक हैं याद मुझ को

खड़ा हैं अब भी वही उसका दीवाना, उसी साए से पीपल के साथ
देख रहा हैं राह अब भी वो न जाने किसकी, तनहा उसके चले जाने के बाद

अब तक हैं याद मुझ को…

रचनाकार विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

#Writer & Poet Vikrant Rajliwal’s Poetry, Shayari & Article’s-#

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