अहसास ए ज़िन्दगी।

FB_IMG_1510647942279रुक गए है जो लम्हे, ठहर गयी ये जिंदगी, टूट गया जो राही, जुड़ती अब किसी उम्मीद के साथ।
छूट गए है जो साथ, धुंधला गए जो अक्स, नजरो से छलकते, हर पैमानों के साथ।।

उड़ते हौसलो से एक उम्मीद, रुकी सासो से, छीलते जख़्म, हर जख्म नासूर है मेरे, घुटती हर उम्मीद के साथ।
एक निसान, दर्द ए ज़िन्दगी, दब गई जो चाहते, दम तोड़ते अक्षर, जलती किताब, टूटती अपनी कलम के साथ।।

एक पथ है अंधेरे से कायम, टूटे कदम, चल रहा एक राही,
हर कदम से दबाए है साए कई, उठे जो ज़हरीले काटो के साथ।
हर आह से मिला है जख़्म ए दिल, आईना ए हकीकत, लगा जो ख़ंजर जख्मो पर मेरे, मासूम अहसासों के साथ।।

क़लम तड़पती है मेरी, अश्क ए श्याही, हाल ए दिल करते है बयां, साए जिंदगी के, बैठे जो राही मेरी कब्र के साथ।
चल रही है सासे, बेरुखिया जो खुद से, चटका जो आईना ए दिल, जख़्म रूह पर मेरे, टूटी अपनी कलम के साथ।।

रचनाकार एव लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Ahsaas ae zindagi.

Ruk gye hai jo lamhe, tha-her gayi ye zindagi, tut gya jo rahi, judti kisi ummid ke sath.
Chut gye hai jo sath, dhundhla gye jo aks, nazron se chalakte har pemane ke sath.

Uadte hoslo se ek ummid, ruki sason se chilte jkham, har jakham nasur hai mere, ghutti har ummid ke sath.
Ek nisan dard ae zindagi, dab gayi jo chahte, dm todte aksr, jalti kitab, tuttie apni kalam ke sath.

Ek path hai andhere se kayam, tute kadam, chal rha ek rahi, har kadam se dabaae hai saae kai, uathe jo jaherile kato ke sath.
Har aah se mila hai jakham ae dil, aaina ae hakikat, laga jo khanjar jakhamo par mere, masum ahsasao ke sath.

Kalam tadapti hai meri, ashak ae shyahi, haal ae dil karte hai bayan, saae zindagi ke bethe jo rahi meri kabar ke sath.
Chal rahi hai sase, berukhiya jo khud se, chataka jo ainaa ae dil, jakham ruh par mere, tutie apani kalam ke sath.

Rachnakar ev lekhak Vikrant Rajliwal dwara likhit.

Writer & Poet Vikrant Rajliwal’s Poetry, Shayari & Article’s

Published by Voice Of Vikrant Rajliwal ( My Writing, My Blogs & My Voice)

💥Spiritual communicator, Motivational Speaker, Author, Writer, Poet And Thinker. विक्रांत राजलीवाल। (समाजिक कार्यकर्ता, कवि, शायर, नज़्मकार, ग़ज़लकार, गीतकार, व्यंग्यकार, लेखक एव नाटककार-कहानीकार-सँवादकार) 1) एहसास प्रकाशित पुस्तक (published Book) : अत्यधिक संवेदनशील काव्य पुस्तक एहसास, जिसका केंद्र बिंदु हम सब के असंवेदनशील होते जा रहे सभ्य समाज पर अपनी काव्य और कविताओं के द्वारा एक प्रहार का प्रयास मात्र है। Sanyog (संयोग) प्रकाशन घर शहादरा द्वारा प्रकाशित एव ए वन मुद्रक द्वरा प्रिंटिड। प्रकाशन वर्ष जनवरी 2016. प्रकाशित मूल्य 250:00₹ मात्र। 2) My Site: Vikrant Rajliwal Url address: vikrantrajliwal.com वर्ष 2016-17 से अब तक सैकड़ो दर्दभरी नज़्म, ग़ज़ल, बहुत सी काव्य-कविताए एव कुछ व्यंग्य किस्से, कुछ एक गीतों के साथ बहुत से विस्तृत समाजिक, आध्यात्मिक एव मनोवैज्ञानिक लेखों के साथ कई प्रकार के सामाजिक एव आध्यात्मिक विचार लिख कर अपनी साइट पर प्रकाशित कर चुके है। एव दिनप्रतिदिन कॉप्के प्रेमस्वरूप नित्य नई रचनाओँ का लेखन एव प्रकाशन जारी है। एवं स्वम् की कई नज़्म कविताओं एव लेखों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद कर चुके है। 3) Youtube channel: Vikrant Rajliwal पर मेरे द्वारा लिखित मेरी समस्त रचनाओँ जैसे प्रकाशित पुस्तक एहसास से अति संवेदनशील काव्य- कविताए, और मेरी निजी लेखनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित मेरी सैकड़ो नज़्म, ग़ज़ल और बहुत सी काव्य, कविताओँ एव्यंग्य किस्सों को मेरे स्वयं के स्वरों के साथ देखने और सुनने के लिए मेरे YouTube चैनल को अभी Subscribe कीजिए। 👉 आगामी रचनाएँ (Upcoming Creation's) : अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर सक्रिय अति विस्तृत दर्दभरी नज़्म दास्ताँ श्रृंखला "दास्ताँ" के अंतर्गत चौथी एवं अब तक लिखी गई अंतिम अति विस्तृत दर्दभरी नज़्म दास्ताँ "मासूम मोहब्ब्त" प्रकाशित करि जाएगी। जल्द ही अपनी ब्लॉग साइट vikranrajliwal.com पर अपनी कुछ लघु कहानियों का प्रकाशन का कार्य प्रारंभ करूँगा। 👉 साथ ही मैं वर्ष 2016 से एक अत्यंत ही दर्दभरा जीवन के हर रंग को प्रस्तुत करती एक सामाजिक कहानी, एक नाटक पर कार्य कर रहा हु। 💥 इसके साथ ही शायद आप मे से बहुत से महानुभव इस बात से परिचित नही होंगे कि मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल वर्ष 2003-04 से नशे से पीड़ित मासूम व्यक्तियों के लिए निःस्वार्थ भाव से सेवा करता आ रहा हु एव स्वम भी कई प्रकार के जटिल उतार चढ़ाव के उपरांत एक शुद्ध रिकवरी को प्राप्त कर सका हु। यदि आप मुशायरे या कवि सम्मेलन के आयोजक है और आप मेरी सैकड़ो दर्दभरी नज़्म ग़ज़ल शायरी या काव्य कविताओं के द्वारा मेरे कार्यक्रम को बुक करते है तो यकीन मानिए इस प्रकार से आप अपना एक अनमोल योगदान उन मासूमो के लिए सहज ही प्रदान कर सकते है। क्योंकि मेरी कला के कार्यक्रम से होने वाली 100% कमाई नशे से पीड़ित उन गरीब एव बेबस मासूमो के इलाज लिए समर्पित होगी। जिन्होंने अपना जीवन जीने से पूर्व ही नशे के आदि बन कर बर्बाद करना शुरू कर दिया है या बर्बाद कर चुके है। 😇 समाज सेवा: स्वमसेवी नशामुक्ति कार्यक्रम के तहत नशे की गिरफ्त में फंसे नवयुवको एवं व्यक्तियों को एक स्वास्थ्य जीवन को जीने के लिए प्रेरित करता आ रहा हु। स्वमसेवी संस्थाओं एवं स्वयम से जन सम्पर्को के माध्यम द्वारा निशुल्क सेवा भाव से वर्ष 2003 से अब तक। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। मेरासंपर्क सूत्र नीचे अंकित है। My Whatsapp no: 91+9354948135 (Translated) One service and one collaboration Hello Friends, Many of you may not be familiar with the greatness that I have been serving my self-indigenous friends Vikrant Rajliwal with selfless service for innocent people who have been suffering from intoxicants since 2003-04. After a complex fluctuation of type, I could get a pure recovery. And if you are the organizer of mushere or poet conference or you can book my program with my hundreds of painful najm ghazal shayari or poetic poems and also in your program, believe that in this way you have a valuable contribution They can easily provide for those innocent people. Because 100% earnings from my program will be dedicated to the treatment of those poor and unemployed innocent people who have started wasting or wasted by becoming addicted to drugs before living their lives. Name: Vikrant Rajliwal Published book: एहसास (a highly sensitive poetic book inspired by social and humanitarian values) published by Sanyog publication house shahdara. Which was also showcased at the Delhi World Book Fair in the same year 2016. 🎤 Upcoming creations: The story of my fourth and last nazam tales written so far. And a play, a painful story presenting every run of life. 😇 Social service: Swamsevy has been promoting the life of the youth and all the people trapped under the influence of intoxicants as a drug addiction program. Free service charges through Swamsevy institutions from 2003 till now. Thank you Vikrant Rajliwal Hometown: Delhi. The contact form is displayed below. My Whatsapp no: 91 + 9354948135 प्रिय पाठकों एव मित्रजनों, यह है अब तक का मेरे द्वारा सम्पन्न एव आगामी लेखन कार्य, जो आप सभी प्रियजनों के प्रेम एव आशीर्वाद से शीघ्र अति शीघ्र ही सम्म्प्न हो अपने वास्तविक स्वरूप को प्राप्त हो जाएगा। आप सभी प्रियजन अपना प्रेम एव आशीर्वाद अपने रचनाकार मित्र विक्रांत राजलीवाल पर ऐसे ही बनाए रखे। धन्यवाद। विक्रांत राजलीवाल।

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