अपनी जीवन से प्यार, अपने व्यक्तिव का निखार।
जरूरी है जानना हमको, अपने प्राकृतिक अधिकार।।

निराशा जीवन से जीवन के प्रति, कठोर है खुद से खुद का यह निर्दयी अत्याचार।
आशा जीवन से जीवन के प्रति, उड़ान है खुद से खुद की, उन्मुक्त ये अपनी उड़ान।।

साथ सकूँ का सकूँ से, बाकी है सफर ए जिंदगी, ए जिंदगी अभी, सकूँ जिंदगी का जिंदगी से, जिंदगी को जीने के साथ।
उठा कदम विशवास से, बाकी है नजारा ए मंजिलो का अभी, महकेंगी फ़िज़ाए, मिटा देंगे कदम, निसान ए जख़्म, उठे जो साथ सच्चाई के साथ।।

आध्यात्मिक रचनाकार एव लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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