FB_IMG_1513179713839.jpgदर्द जब हद से गुज़र जाए, कोई दवा भी काम न अपने आए,
जख्म कुरेद लेते है अपने, प्याला-ज़हर हलक से उड़ेल लेते है

निशानी है दर्द ये तेरे, इन्तेहाँ की, जनून-ज़िन्दगी ये सब तेरे उत्तर-चढ़ाव की
हर इम्तेहां जान-ज़िन्दगी, से खेलेगा तेरी, मुकदर ये सितम , कशमकश सासो में तेरी…

रचनाकार एवं लेखक श्री विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

# Writer Poet Vikrant Rajliwal’s Poetry, Shayari & Article’s- #

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