सो जाओ ए जगमगाते सितारो।
खो जाओ ए झिलमिलाते नज़रो।।

सो गई है रात चांदनी भी अब कहि।
खो गए जो सपने, बेरंग आसमां में कही।।

खो गयी हर आरज़ू , जिंदा है तन्हाई, बेजान दिल मे जो कहि
जख़्म ए जिंदगी से तड़प ए दिल, रुकी सासो से बेजान दिल, अब धड़कने न पाए।

हो गए जो खामोश हर शब्द, लड़खड़ाई टूटी कलम जो कहि
अहसास ए ज़िंदगी से फरियाद ए दिल, टूटी धड़कनो से जख़्म ए दिल, अब नासूर न हो जाए।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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