लिखता हु एहसास ए दिल, धड़कनो से जो अपने।
कलम-श्याही वो लहू ए जिगर है बिखर जाता है कोरे कागज़ पर जो बन कर एक निसान,

वो लहू है वो लहू है वो लहू है मेरा…

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल। द्वारा लिखित।

Advertisements

Leave a Reply